देहरादून, विजय जोशी। हराभरा दून और सुकून भरी आबोहवा मानो गुजरे जमाने की बात हो गई है। अपनी हरियाली के लिए जाना जाने वाला दून अब अपनी पहचान खोता जा रहा है। दून की हरियाली कंकरीट के जंगलों में गुम होने लगी है। वैसे तो दून चारों ओर से वन क्षेत्र से घिरा हुआ है, लेकिन शहरीकरण के चलते दून का बदलता स्वरूप लगातार वनों पर दबाव बढ़ा रहा है। हालांकि, हर साल मानसून सीजन में शासन-प्रशासन के साथ ही तमाम संस्थाएं पौधे रोपने और लोगों को जागरूक करने का प्रयास करती हैं, लेकिन धरातल पर यह प्रयास दम तोड़ते नजर आते हैं।

देहरादून की भौगोलिक परिस्थिति की बात करें तो यहां एक ओर राजाजी पार्क की सीमा है तो दूसरी ओर मसूरी वन प्रभाग का वनाच्छादित क्षेत्र। इसके अलावा दो ओर से नरेंद्रनगर और कालसी-चकराता की वादियां भी। चारों ओर से वन क्षेत्रों से घिरे दून में अब भी करीब 52 फीसद वन क्षेत्र है। हालांकि, दो दशक पूर्व यह आंकड़ा और भी सुकून देने वाला था। लेकिन, बढ़ती आबादी और शहरीकरण के बीच वनों के सिमटने का सिलसिला शुरू हुआ तो आज भी यह बदस्तूर जारी है।

तेजी से बढ़ती कॉलोनियां और सड़कों का जाल इसका प्रमुख कारण तो है ही, लेकिन भारी मात्र में किए जा चुके अतिक्रमण और वनों के अवैध दोहन को भी नकारा नहीं जा सकता है। ऐसे में अब केवल पौधरोपण और लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने से ही बात नहीं बनेगी। पौधों की देख-रेख और वनों के अवैध दोहन को रोकने के लिए वृहद स्तर पर गंभीरता से प्रयास करने होंगे।

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दून में एक व्यक्ति के हिस्से में महज 0.09 हेक्टेयर वन क्षेत्र

देहरादून का क्षेत्रफल 3088 वर्ग किलोमीटर है, जिसमें कुल 1605 वर्ग किमी क्षेत्र वनाच्छादित है। दून की जनसंख्या करीब 16 लाख 96 हजार 694 है। इस हिसाब से वन क्षेत्र का अनुपात निकाला जाए तो प्रति व्यक्ति 0.09 हेक्टेयर वन क्षेत्र आता है। जो कि पर्वतीय जिलों की तुलना में बेहद कम है। इस संबंध में केवल हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर और बागेश्वर ही दून के आसपास हैं। 

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Posted By: Raksha Panthari

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