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Delhi-Doon Expressway Accident: न पहरा काम आया और न इंतजाम, अब तक 18 हादसों ने मचाया कोहराम

Published: Thu, 05 Nov 2026 08:45 AM (IST)

देहरादून-दिल्ली एक्सप्रेसवे पर मोहब्बेवाला-आशारोड़ी खंड हादसों का गढ़ बन गया है, जहां हाल ही में ट्रक पलटने से चार लोगों की मौत हो गई।

चार जिंदगियां लीलने वाले हादसे ने फिर खोली सुरक्षा दावों की पोल। जागरण

चार जिंदगियां लीलने वाले हादसे ने फिर खोली सुरक्षा दावों की पोल। जागरण

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अंकुर अग्रवाल, देहरादून। एक के बाद एक पलटते ट्रक, कुचलते वाहन और बिछती लाशें। हर हादसे के बाद अधिकारियों का निरीक्षण, नई योजना और सुरक्षा के नए इंतजाम। फिर कुछ दिन की खामोशी और एक नया हादसा। देहरादून-दिल्ली एक्सप्रेसवे पर मोहब्बेवाला-आशारोड़ी का करीब दो किलोमीटर का हिस्सा इसी अंतहीन सिलसिले का गवाह बन चुका है।

बुधवार को कार के ऊपर ट्रक पलटने से चार लोगों की मौत ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर इस सड़क पर ऐसा क्या है, जो तमाम कोशिशों के बावजूद हादसे नहीं रुक रहे।

चौबीस घंटे निगरानी, रंबल स्ट्रिप, जिगजैग बैरिकेडिंग, गति सीमा के संकेतक लगाने के साथ स्पीड लिमिट कैमरे लगाने की कवायद तक चल रही है। स्थानीय लोगों की आस्था के सम्मान में हनुमान मंदिर की नींव भी रखी जा चुकी है। लेकिन सड़क पर खतरा जस का तस है। अब यह महज दुर्घटनाओं का सिलसिला नहीं, बल्कि व्यवस्था के सामने खड़ा यक्ष प्रश्न है।

ढलान, भारी वाहन और बेकाबू रफ्तार का खतरनाक मेल

मोहब्बेवाला की समस्या को समझने के लिए सड़क की भौगोलिक स्थिति पर गौर करना जरूरी है। मोहंड की लंबी चढ़ाई पार करने के बाद भारी वाहन आशारोड़ी की ओर से देहरादून में प्रवेश करते हैं। इसके बाद आने वाली ढलान पर लदे हुए ट्रकों और ट्रालों की रफ्तार बढ़ने का खतरा रहता है।

यदि चालक समय रहते निचले गियर का इस्तेमाल न करे या लगातार ब्रेक लगाने से ब्रेक प्रणाली अत्यधिक गर्म हो जाए, तो वाहन पर नियंत्रण बनाए रखना मुश्किल हो सकता है। परिवहन विभाग के पूर्व उपायुक्त सुधांशु गर्ग और सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों ने पहले भी ढलान, भारी वाहनों की गति व सड़क की बनावट को हादसों के संभावित कारणों के रूप में रेखांकित किया है। स्थानीय कट और मुख्य मार्ग पर वाहनों की आवाजाही भी जोखिम बढ़ाती है।

पिछले हादसों के बाद सामने आई रिपोर्टों में परिवहन विभाग की ओर से सड़क की एलाइमेंट से जुड़ी तकनीकी समस्या का उल्लेख किया गया था। यदि सड़क की बनावट ही वाहनों के नियंत्रण में बाधा बन रही है, तो केवल चेतावनी बोर्ड और निगरानी से स्थायी समाधान की उम्मीद कितनी कारगर होगी, यह अहम सवाल है।

सुरक्षा के उपायों की लंबी सूची, नतीजे कहां

हादसों के बाद संबंधित विभागों ने कई स्तर पर उपाय किए हैं। कहीं रंबल स्ट्रिप लगाई गईं, कहीं संकेतक और परावर्तक चिह्न लगाए गए। भारी वाहनों की जांच व निगरानी के लिए दल तैनात करने की व्यवस्था भी की गई। जिगजैग बैरिकेडिंग और गति सीमा का उल्लंघन पकड़ने वाले कैमरों की योजना पर भी काम हुआ।

क्षेत्र में 24 घंटे निगरानी और भारी वाहनों की रफ्तार पर अंकुश लगाने के प्रयास किए गए। रंबल स्ट्रिप का उद्देश्य चालकों को ढलान पर पहुंचने से पहले सतर्क करना है, जबकि जिगजैग बैरिकेडिंग से वाहनों की गति नियंत्रित करने की कोशिश की जाती है। कैमरों से गति सीमा के उल्लंघन पर नजर रखने की योजना भी इसी कड़ी का हिस्सा है।

लेकिन यहां एक बुनियादी सवाल है। क्या इन उपायों का प्रभाव लगातार आंका जा रहा है। क्या यह दर्ज किया जा रहा है कि रंबल स्ट्रिप से पहले और बाद में ट्रकों की वास्तविक गति कितनी है?

क्या तेज गति से आने वाले भारी वाहनों पर नियमित कार्रवाई हो रही है? क्या तकनीकी खामियों की पहचान के बाद उन्हें दूर किया गया है? यदि इन सवालों के जवाब स्पष्ट नहीं हैं, तो सुरक्षा उपायों की लंबी सूची भी सड़क पर उतरने वाले लोगों को भरोसा नहीं दे सकती।

आस्था की राह पर भी उम्मीद

लगातार हादसों से परेशान स्थानीय लोगों ने आशारोड़ी क्षेत्र में हनुमान मंदिर बनाने की मांग उठाई थी। स्थानीय लोगों की मान्यता है कि एक्सप्रेसवे निर्माण से पहले यहां पीपल के पुराने पेड़ थे, जहां पूजा-अर्चना होती थी। यहां निर्माण के दौरान पेड़ कटने के बाद हादसे बढ़ने की बात भी स्थानीय स्तर पर कही जाती रही है। जिसके बाद स्थानीय विधायक विनोद चमोली ने लोगों की मांग के अनुरूप मंदिर निर्माण को स्वीकृति दी थी।

आस्था लोगों को संबल दे सकती है, लेकिन सड़क सुरक्षा के लिए तकनीकी व प्रशासनिक उपायों का कोई विकल्प नहीं है। मंदिर निर्माण के साथ-साथ यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि भारी वाहन बेकाबू होकर आबादी, कारों और दोपहिया सवारों के लिए जानलेवा न बनें।

अब स्थायी समाधान की दरकार

समाजसेवी अनूप नौटियाल के अनुसार मोहब्बेवाला को हादसों से सुरक्षित बनाने के लिए अब निरीक्षण और अस्थायी उपायों से आगे बढ़ना होगा। सड़क की एलाइमेंट, ढलान, मोड़, प्रवेश बिंदुओं और भारी वाहनों की आवाजाही का स्वतंत्र तकनीकी आडिट जरूरी है।

ब्रेक फेल होने की आशंका वाले वाहनों की जांच, ढलान से पहले गति नियंत्रण, प्रभावी निगरानी और उल्लंघन पर त्वरित कार्रवाई को एकीकृत व्यवस्था में बदलना होगा। विशेषज्ञों की ओर से पहले भी चेतावनी प्रणाली और आपात स्थिति में वाहन रोकने के लिए अलग बचाव लेन जैसे विकल्पों पर विचार की जरूरत बताई गई। ऐसे विकल्पों की तकनीकी व्यवहार्यता का आकलन कर समयबद्ध निर्णय लिया जाना चाहिए।

सवाल नहीं, ठोस नतीजा चाहिए

मोहब्बेवाला में अब सवाल यह नहीं है कि अगला हादसा कब होगा, बल्कि यह है कि उसे रोकने के लिए जिम्मेदार तंत्र कब ठोस नतीजा देगा। चौबीस घंटे पहरा हो या रंबल स्ट्रिप, कैमरे हों या मंदिर की नींव, इन सबके बीच सड़क से गुजरते लोगों की सुरक्षा सबसे ऊपर होनी चाहिए। चार मौतों के बाद भी यदि स्थायी समाधान नहीं निकला, तो यह यक्ष प्रश्न और गंभीर होता जाएगा।

हादसों की फेहरिस्त, हर बार नए सवाल

मोहब्बेवाला में हादसों का सिलसिला नया नहीं है। बीते एक वर्ष में यहां ट्रकों के पलटने, दूसरे वाहनों को टक्कर मारने और सड़क किनारे दुकानों व संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने की 18 बड़ी घटनाएं हो चुकी हैं।

  • 15 अक्टूबर: चावल लदा ट्रक बेकाबू होकर पेड़ में घुसा, क्लीनर की मौत।
  • 10 अक्टूबर: सहारनपुर से आ रहा ट्रक बेकाबू होकर चेकपोस्ट में घुसा, परिचालक घायल।
  • 25 सितंबर: ईंटों से भरा ट्रक बेकाबू होकर डिवाइडर तोड़ते हुए पलटा। चालक गंभीर घायल।
  • 20 सितंबर: सीमेंट से लदा ट्रक पलटने से एक बाइक सवार की मौत हो गई और दूसरा व्यक्ति घायल हुआ।
  • 13 अगस्त: तेज रफ्तार कंटेनर रोड क्लीनिंग मशीन पर पलटा और परिचालक का सिर धड़ से अलग हो गया।
  • 30 मई : चीनी से लदा ट्रक डिवाइडर से टकराकर पलट गया। परिचालक घायल हुआ और मार्ग पर लंबा जाम लगा।
  • 16 अप्रैल: पेंट से लदे ट्रक के अनियंत्रित होने से कई पेड़ और वाहन क्षतिग्रस्त हुए। हादसे ने भारी वाहनों की रफ्तार और नियंत्रण को लेकर चिंता बढ़ाई।
  • 9 मार्च: मार्बल से लदा ट्रक पलट गया और देहरादून-सहारनपुर मार्ग पर यातायात प्रभावित हुआ।
  • 18 फरवरी: मोहब्बेवाला चौक पर अनियंत्रित ट्रक कार के ऊपर पलट गया। वाहनों में आग लगने से स्थिति गंभीर हो गई, हालांकि उस घटना में लोग बच निकले।
  • 5 दिसंबर 2025: सीमेंट से लदे ट्रक ने कई वाहनों को टक्कर मारने के बाद दुकानों में घुसकर नुकसान पहुंचाया। हादसे के बाद सड़क पर अफरा-तफरी मच गई थी।

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