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अब दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के जाम से देहरादून नहीं होगा परेशान, बनेगा नया फ्लाईओवर

Published: Fri, 09 Oct 2026 10:52 AM (IST)Updated: Fri, 09 Oct 2026 10:57 AM (IST)

दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे से आने वाले वाहनों के लिए आशारोड़ी-मोहकमपुर एलिवेटेड कॉरिडोर अब मोहकमपुर से आगे मियांवाला तक विस्तारित होगा।

इस तस्वीर का उपयोग सांकेतिक रूप में किया गया है।

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सुमन सेमवाल, देहरादून। दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे से दून पहुंचने वाले वाहनों को अब शहर के भीतर उतरकर हरिद्वार या ऋषिकेश की राह पकड़ने की जरूरत नहीं होगी।

आशारोड़ी से मोहकमपुर तक प्रस्तावित एलिवेटेड कॉरिडोर का सबसे बड़ा अपडेट यह सामने आया है कि इसका सफर मोहकमपुर पर खत्म नहीं होगा। मियांवाला के बाद भी फ्लाईओवर और एलिवेटेड कनेक्टिविटी के जरिए वाहन आगे बढ़ते रहेंगे और लच्छीवाला टोल प्लाजा से पहले मौजूदा हाईवे पर उतरकर सीधे हरिद्वार-ऋषिकेश की दिशा पकड़ सकेंगे।

एनएचएआइ के परियोजना निदेशक सौरभ सिंह के अनुसार मौजूदा संशोधित डीपीआर के अनुसार आशारोड़ी-मोहकमपुर परियोजना की कुल लंबाई 13.174 किलोमीटर है। इसमें करीब 11 किलोमीटर हिस्सा एलिवेटेड होगा और पूरा कॉरिडोर चार लेन का प्रस्तावित है।

परियोजना की कुल अनुमानित लागत 2,598 करोड़ रुपये है। डीपीआर स्वीकृति के लिए केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय में लंबित है और कभी भी इस पर अंतिम स्वीकृति मिल सकती है। इससे पहले एलाइनमेंट में बदलाव के कारण डीपीआर में संशोधन और जियो-टेक्निकल जांच कराई गई थी।

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आशारोड़ी से शुरू होगा ऊपर का सफर

दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के आशारोड़ी पर पहुंचने के बाद बाहरी वाहनों को देहरादून के व्यस्त शहरी हिस्से में उतारने के बजाय प्रस्तावित एलिवेटेड कॉरिडोर पर आगे बढ़ाया जाएगा। आशारोड़ी से मोहब्बेवाला, आइएसबीटी और अजबपुर की दिशा में एलिवेटेड मार्ग मौजूदा सड़क के ऊपर से आगे बढ़ेगा। पहले प्रस्ताव में करीब 12 किलोमीटर के इस कॉरिडोर की डीपीआर लगभग 1,500 करोड़ रुपये की बताई गई थी, लेकिन एलाइनमेंट में बदलाव के बाद परियोजना का स्वरूप और लागत दोनों बढ़े हैं।

रिस्पना क्षेत्र इस परियोजना में सबसे अहम बदलाव वाला हिस्सा है। यहां भारी यातायात के कारण पहले प्रस्तावित व्यवस्था को बदलकर एलिवेटेड मार्ग को रेलवे ट्रैक के समानांतर ले जाने की योजना बनाई गई। एनएचएआई के अनुसार रिस्पना पुल पर प्रतिदिन 40 हजार से अधिक वाहन गुजरते हैं, इसलिए निर्माण के दौरान मौजूदा यातायात को प्रभावित करने से बचने के लिए एलाइनमेंट बदला गया।

अजबपुर और मोहकमपुर के बीच उपलब्ध जगह के अनुसार कुछ हिस्सों में फ्लाईओवर की व्यवस्था भी रखी गई है। योजना की असली उपयोगिता मोहकमपुर के बाद सामने आएगी। मोहकमपुर तक पहुंचने के बाद वाहन सीधे नीचे उतरकर शहर के यातायात में शामिल नहीं होंगे। आगे मियांवाला की दिशा में पहले से प्रस्तावित फ्लाईओवर कनेक्टिविटी से जुड़ते हुए यह मार्ग हरिद्वार हाईवे पर आगे बढ़ेगा।

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यह परियोजना मियांवाला, जीवनगढ़ और अन्य स्थानों पर इस व्यापक हाईवे सुधार कार्यक्रम के तहत धरातल पर उतारी जा रही है। भविष्य में इसी तरह के कार्य आगे भी जरूरत के मुताबिक जारी रहेंगे।

करीब 1000 करोड़ सिर्फ जमीन पर

परियोजना में निर्माण के साथ सबसे बड़ी चुनौती भूमि अधिग्रहण है। मौजूदा आंकड़ों के अनुसार करीब 1,000 करोड़ रुपये भूमि अधिग्रहण पर खर्च होने का अनुमान है। एनएचएआई इस प्रक्रिया को जिला प्रशासन और विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी (एसएलएओ ) के माध्यम से आगे बढ़ा रहा है। प्रभावित भूमि और संपत्तियों के लिए अधिग्रहण तथा मुआवजा प्रक्रिया आगे बढ़ने के बाद निर्माण की गति तेज होने की उम्मीद है।

परियोजना के लिए देहराखास, सेवला खुर्द, बद्रीपुर, ब्राह्मणवाला, माजरा, माजरी माफी, मोहब्बेवाला, मोहकमपुर खुर्द, शाहनगर, कारगी ग्रांट, अजबपुर कलां, अजबपुर खुर्द, चक अजबपुर खुर्द, चक शाहनगर समेत कई क्षेत्रों में भूमि अर्जन की प्रक्रिया शुरू की गई है।