देहरादून में बुजुर्ग दंपती और नौकरानी की दिनदहाड़े हत्या, रिटायरमेंट की पनाहगाह दून में बुजुर्ग ही ‘सॉफ्ट टारगेट’
देहरादून में बुजुर्ग दंपती और नौकरानी की दिनदहाड़े हत्या ने शहर में वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।


समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
अंकुर अग्रवाल, देहरादून। शांत आबोहवा, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं और सुकून भरी जिंदगी... इन्हीं खूबियों के कारण देहरादून दशकों से नौकरी से सेवानिवृत्त होने के बाद जिंदगी बिताने के लिए बुजुर्गों की पसंद रहा है। लेकिन, समय के साथ तस्वीर बदल रही है।
जिन घरों को बुजुर्गों ने उम्रभर की कमाई सेअपने बुढ़ापे का सुरक्षित ठिकाना बनाया, वही सूने घर अब अपराधियों की नजर में आसान निशाना बन रहे हैं। मंगलवार को रायपुर क्षेत्र की विष्णु लोक कालोनी में दिनदहाड़े बुजुर्ग दंपती और उनकी नौकरानी की हत्या ने एक बार फिर शहर के हजारों बुजुर्गों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है।
वसंत विहार, रेसकोर्स, डालनवाला, जाखन, हाथीबड़कला, विजय कालोनी, रायपुर से लेकर शहर की तमाम पुरानी कालोनियों में बड़ी संख्या में ऐसे बुजुर्ग रहते हैं, जिनके बच्चे नौकरी या कारोबार के कारण दूसरे शहरों अथवा विदेश में हैं। उम्र बढ़ने के साथ बाजार जाने से लेकर घरेलू काम तक उनकी निर्भरता नौकर, प्लंबर, इलेक्ट्रिशियन, माली, दूधवाले और दूसरे बाहरी लोगों पर बढ़ जाती है।
यही निर्भरता कई बार अपराधी के लिए घर की चौखट पार करने का रास्ता भी बन जाती है। विष्णु लोक की वारदात इसका ताजा उदाहरण है। लूट के इरादे से घर में दाखिल युवक ने बुजुर्ग दंपती पर पेचकस से ताबड़तोड़ वार किए और उन्हें बचाने आई नौकरानी को भी मौत के घाट उतार दिया।
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एक माह पहले भी घर में अकेली बुजुर्ग महिला बनी थी निशाना
इस वारदात की भयावहता इसलिए भी ज्यादा है कि शहर अभी पिछली घटना भूला तक नहीं था। चार सितंबर को डालनवाला क्षेत्र में घर में अकेली बुजुर्ग महिला रेखा बंसल की हत्या कर दी गई थी। उनके हाथ से सोने का कड़ा गायब मिला था। दिन में पति दुकान पर चले जाते थे और वह घर पर अकेली रहती थीं।
उनके एक बेटे के विदेश में रहने की बात भी सामने आई थी। जांच में बाद में पुलिस ने घरेलू नौकर को गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार रुपये के लेनदेन के विवाद में उसने महिला का मुंह व नाक दबाकर हत्या की थी। यानी बुजुर्गों के लिए खतरा सिर्फ बाहर से दरवाजा खटखटाने वाले अनजान व्यक्ति से ही नहीं, बल्कि घर के भीतर आवाजाही रखने वालों से भी है।
किरायेदार बनकर आया और अकेली वृद्धा का गला रेत गया
मार्च 2023 में भंडारीबाग में 75 वर्षीय कमलेश धवन की हत्या ने भी यही खतरा सामने रखा था। वह घर में अकेली रहती थीं। आरोपित ने पहले मकान पर किराये का बोर्ड देखा और किरायेदार बनकर बातचीत के बहाने घर में प्रवेश किया। अगले दिन दोबारा पहुंचा और पानी मांगने के बहाने भीतर गया। पर्स उठाते देख वृद्धा ने विरोध किया तो उसने चाकू से उनका गला रेत दिया। बेटी रोज सुबह-रात फोन कर मां का हाल जानती थी।
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फोन नहीं उठा तो पड़ोसी को भेजा गया और तब हत्या का पता चला। पुलिस को आरोपित तक पहुंचने के लिए करीब 200 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी पड़ी थी। इससे पहले सितंबर 2020 में कांवली रोड पर घर में अकेले रहने वाले 72 वर्षीय ब्रजभूषण की हत्या कर दी गई थी। उनके हाथ पीछे रस्सी से बंधे मिले थे।
अगली सुबह मिलने पहुंची महिला और पड़ोसियों को घटना का पता चला। ये घटनाएं अलग-अलग साल और इलाकों की जरूर हैं, लेकिन इनमें एक समान कड़ी है, उम्रदराज व्यक्ति, घर में अकेलापन व अपराधी के लिए सीमित प्रतिरोध की संभावना।
पुलिस के पास दर्ज 453 ‘एकाकी बुजुर्ग’
पुलिस के अपने आंकड़े बताते हैं कि जिले में कम से कम 453 ऐसे वरिष्ठ नागरिक दर्ज हैं, जो अकेले जीवन गुजार रहे हैं। इनमें कई के बच्चे बाहर रहते हैं। वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा के लिए पुलिस मुख्यालय स्तर पर सीनियर सिटीजन सेल है।
इसी वर्ष एसएसपी ने थानाध्यक्षों को अकेले रहने वाले प्रत्येक वरिष्ठ नागरिक के घर जाकर संपर्क करने और उन्हें पुलिस व नियंत्रण कक्ष के नंबर उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए थे। पूर्व में बीट स्तर पर वरिष्ठ नागरिकों से नियमित संपर्क और उनकी कुशलक्षेम लेने की व्यवस्था भी इसी सोच का हिस्सा रही है। मगर लगातार हो रही घटनाएं बता रही हैं कि केवल रजिस्टर में नाम और मोबाइल नंबर दर्ज कर लेना पर्याप्त नहीं है।
पैसा भेज देना ही क्या माता-पिता की देखभाल है
मनोचिकित्सक डा. स्वाति मिश्रा के अनुसार बुजुर्गों की सुरक्षा का पूरा बोझ पुलिस पर डालकर परिवार अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकते। बेहतर भविष्य व रोजगार के लिए बच्चों का दूसरे शहर या फिर विदेश में जाना स्वाभाविक है, लेकिन हजारों किलोमीटर दूर बैठकर महीने में पैसे भेज देना माता-पिता की सुरक्षा की गारंटी नहीं बन सकता।
भंडारीबाग की कमलेश धवन की बेटी मां को रोज फोन करती थीं। एक रात और अगली सुबह फोन नहीं उठा तो उन्होंने पड़ोसी को घर भेजा, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डालनवाला में मारी गई रेखा बंसल के भी तीन बच्चे थे, जिनमें एक बेटा विदेश में था। बुढ़ापे में माता-पिता को सिर्फ आर्थिक सहारा नहीं, ‘कोई मेरा हाल पूछने वाला है’ का भरोसा और सुरक्षा कवच भी चाहिए।
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बुजुर्गों के घर को ‘आसान निशाना’ बनने से ऐसे रोकें
सेवानिवृत्त आइपीएस पुष्पक ज्याेति के अनुसार, घरेलू सहायक, चालक, माली या अन्य कर्मचारी को बिना पुलिस सत्यापन काम पर न रखें। प्लंबर, इलेक्ट्रिशियन अथवा सर्विस कर्मचारी को पहचान सुनिश्चित किए बिना घर में प्रवेश न दें। मुख्य द्वार पर वीडियो डोरबेल अथवा कैमरा और आपातकालीन अलार्म उपयोगी हो सकता है।
घर में अधिक नकदी और जेवर रखने की जानकारी बाहरी व्यक्ति से साझा न करें। अकेले बुजुर्ग के लिए परिवार, विश्वसनीय पड़ोसी और स्थानीय पुलिस के बीच छोटा संपर्क समूह बनाया जा सकता है।
