Uttarakhand News: भूतापीय पर्यटन के साथ कृषि-बागवानी व्यवसाय को बूस्टर डोज, आर्थिक विकास और रोजगार होगा सृजन
उत्तराखंड में भूतापीय ऊर्जा उत्पादन से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और अर्थव्यवस्था को लाभ होगा। सरकार ने निजी निवेशकों को आकर्षित करने के लिए नीति बनाई है। आइसलैंड की वर्किस कंसल्टिंग इंजीनियर्स कंपनी भूतापीय स्थलों का आकलन करेगी। सरकार विद्युत उत्पादन के साथ पर्यटन को भी बढ़ावा देगी और कार्बन उत्सर्जन को कम करने का प्रयास करेगी। निजी विकासकर्ताओं को प्रोत्साहन दिया जाएगा।

रविंद्र बड़थ्वाल, जागरण, देहरादून। उत्तराखंड के उच्च हिमालय में भूतापीय क्षेत्र ऊर्जा उत्पादन के साथ ही पर्यटक स्थल और कृषि व बागवानी व्यवसायों में सहयोगी के रूप में आर्थिकी को चार चांद लगाएंगे। साथ में रोजगार के नए द्वार भी खोलेंगे। बहुआयामी संभावना को ध्यान में रखकर ही प्रदेश सरकार ने अपनी भूतापीय ऊर्जा नीति इस प्रकार तैयार की है कि निजी निवेशक आकर्षित हों। साथ में ऊर्जा उत्पादन से लेकर हीटिंग जैसे कार्यों के लिए कार्बन उत्सर्जन नहीं होने पाए।
प्रदेश सरकार हरित ऊर्जा को हर स्तर पर प्रोत्साहित कर रही है। सौर ऊर्जा की योजनाओं में राज्य की भागीदारी बढ़ी है, अब एक और विकल्प भूतापीय ऊर्जा के लिए भी नीति बनाकर नई राह बनाई गई है। राज्य इनके माध्यम से अपनी बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करेगा ही, साथ में कार्बन उत्सर्जन कम करने के केंद्र की मोदी सरकार के संकल्प को पूरा करने में भी योगदान देगा।
भूतापीय ऊर्जा नीति के पीछे भी डबल इंजन का दम काम कर रहा है। केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के सहयोगी रवैये के कारण ही भूतापीय ऊर्जा के उत्पादन में अग्रणी देश आइसलैंड की कंपनी वर्किस कंसल्टिंग इंजीनियर्स के साथ विगत 17 जनवरी, 2025 को प्रदेश सरकार ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।
भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण ने देशभर में 381 तापीय क्षेत्र चिह्नित किए हैं। इनमें 10,600 मेगावाट ऊर्जा उत्पादन की क्षमता का अनुमान लगाया गया है। प्रारंभिक अध्ययनों में चमोली जिले में बदरीनाथ और तपोवन क्षेत्रों में भूतापीय स्थल मिले हैं।
अब वर्किस कंपनी उत्तराखंड में भूतापीय स्थलों और उनमें ऊर्जा क्षमता का आकलन करेगी। इसके लिए कंपनी की प्रारंभिक रिपोर्ट की प्रतीक्षा की जा रही है। इस रिपोर्ट के आधार पर ही भूतापीय ऊर्जा नीति को क्रियान्वित किया जाएगा।
कार्बन उत्सर्जन से रहेगी राहत
प्रदेश सरकार विद्युत उत्पादन के साथ ही भूतापीय स्थलों को पर्यटन के नए केंद्रों के रूप में विकसित करने के पक्ष में है। गर्म पानी के स्रोतों को ग्रीन हाउस हीटिंग के लिए कृषि व्यवसाय और बागवानी के उत्पादों को सुखाने में उपयोग किया जाएगा।
हीटिंग में चूंकि, कोयले या लकड़ी का ईंधन के रूप में उपयोग नहीं किया जाएगा, ऐसे में कार्बन उत्सर्जन भी नहीं होगा। भूतापीय ऊर्जा स्थलों से मिलने वाली विद्युत से आसपास के क्षेत्रों में आपूर्ति सुचारु रखी जा सकेगी। साथ ही इन क्षेत्रों में ग्रिड के माध्यम से लंबी तार खींचने या केबल बिछाने की आवश्यकता नहीं होगी।
भूतापीय स्थलों की खोज व विकास को उद्योगों की भांति मिलेंगे लाभ
ऊर्जा प्रमुख सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम के अनुसार भूतापीय स्थलों की खोज और उनकी क्षमता विकास पर सरकार पूरा ध्यान देगी। इस क्षेत्र में निजी विकासकर्ताओं को आमंत्रित किया जाएगा। वर्किस कंपनी की रिपोर्ट के आधार पर विकासकर्ताओं को निविदा के माध्यम से स्थलों की खोज और विकास के लिए आमंत्रित किया जा सकेगा।
इस क्षेत्र में निवेश करने वालों को राज्य की सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम नीति, 2023, मेगा औद्योगिक और निवेश नीति, 2021 और अनुकूलित प्रोत्साहन पैकेज दिशा-निर्देश 2023 के अंतर्गत लाभ एवं सुविधाएं दी जाएंगी।
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