Dehradun: प्रशिक्षु महिला क्रिकेटर के यौन उत्पीड़न मामले में कोच की जमानत खारिज कराने हाईकोर्ट जाएगा बाल आयोग
उत्तराखंड बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डाॅ. गीता खन्ना के अनुसार आरोपी कोच को सलाखों के पीछे होना चाहिए था लेकिन उसे जमानत मिल गई है। उन्होंने पुलिस की जांच पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि कहीं न कहीं जांच में चूक हुई है।
देहरादून, जागरण संवाददाता: नाबालिग समेत तीन प्रशिक्षु महिला क्रिकेटर के यौन उत्पीड़न मामले में आरोपी कोच नरेंद्र शाह की जमानत खारिज कराने के लिए उत्तराखंड बाल अधिकार संरक्षण आयोग हाईकोर्ट में याचिका दायर करेगा। आयोग हाईकोर्ट में केस की मजबूत पैरवी के लिए प्रदेश सरकार को भी पत्र भेजेगा।
उत्तराखंड बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डाॅ. गीता खन्ना के अनुसार, आरोपी कोच को सलाखों के पीछे होना चाहिए था, लेकिन उसे जमानत मिल गई है। उन्होंने पुलिस की जांच पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि कहीं न कहीं जांच में चूक हुई है।
प्रदेश सरकार को इस संबंध में पत्र भेजा जाएगा, जिससे हाईकोर्ट में सरकार की ओर से भी मजबूत पैरवी की जा सके। उन्होंने कहा कि तीनों प्रशिक्षु महिला क्रिकेटर में एक नाबालिग भी है। आयोग पूर्व में पीड़िता के बयान दर्ज कर चुका है। इसको लेकर आयोग अपने स्तर से जांच करेगा।
आयोग की पूर्व अध्यक्ष ने केंद्र सरकार को लिखा पत्र
उत्तराखंड बाल अधिकार संरक्षण आयोग की पूर्व अध्यक्ष ऊषा नेगी ने कहा कि आरोपी नरेंद्र शाह को जमानत मिलने के पीछे पुलिस जिम्मेदार है। पोक्सो एक्ट में किसी भी कीमत पर आरोपी को जमानत नहीं मिल सकती है, लेकिन ऐसा इस केस में देखने को मिला है।
नेगी ने कहा कि आरोपी कोच नरेंद्र शाह के साथ प्रकरण में कुछ अन्य नाम भी शामिल हो सकते हैं। ऐसे में सभी के नाम सामने आने चाहिए। ऐसे में उन्होंने मामले की उच्च स्तरीय जांच के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, बीसीसीआई को पत्र भेजा है। उन्होंने कहा कि पर्दे के पीछे के बड़े नामों को भी उजागर किया जाएगा।
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