Delhi-Doon Expressway Accident: घर में गूंजनी थी किलकारी, दीवाली से पहले बुझे चिराग
दीपावली और घर में आने वाले नन्हे मेहमान की खुशियों के बीच देहरादून आ रहे कपूर परिवार के तीन सदस्यों ...और पढ़ें


समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
विजय जोशी, देहरादून। दीपावली का त्योहार नजदीक था। घर में एक नन्हे मेहमान के आने की तैयारियां भी चल रही थीं। परिवार में खुशियों का माहौल था। होने वाले बच्चे के लिए कपड़े और जरूरत का सामान खरीदा जा चुका था।
उम्मीद थी कि दीपावली के साथ ही घर में दोहरी खुशियों की किलकारी गूंजेगी, लेकिन मोहब्बेवाला में हुए भीषण हादसे ने एक झटके में सब कुछ बदल दिया। जिस परिवार को खुशियों के साथ देहरादून पहुंचना था, उसकी जिंदगी का सफर रास्ते में ही थम गया। हादसे में परिवार के तीन सदस्यों की मौत ने सहारनपुर से लेकर देहरादून तक मातम पसार दिया।
सहारनपुर निवासी विश्वेश कपूर अपनी पत्नी, बच्चे और माता के साथ देहरादून आ रहे थे। देहरादून में जीएमएस रोड स्थित एटलांटिस टावर के फ्लैट में रहने वाले उनके भाई दीपेश कपूर रियल एस्टेट कारोबारी हैं। दीपेश के घर में भी खुशियों की तैयारियां थीं। उनकी पत्नी गर्भवती हैं और कुछ दिनों में प्रसव होना है।
इसी खुशी में विश्वेश अपने परिवार के साथ भाई के घर आ रहे थे। उनके साथ आने वाले कपड़े और सामान में उस नन्हे मेहमान के लिए भी ढेर सारी उम्मीदें थीं, जिसका परिवार को बेसब्री से इंतजार था, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। दीपावली से पहले ही परिवार के तीन सदस्यों की जीवन ज्योति बुझ गई। जिस घर में जल्द ही नवजात की किलकारी गूंजनी थी, वहां अब चीख-पुकार और सिसकियां सुनाई दे रही हैं।
चाचा-चाची से था लगाव, अब वही बचे सहारा
भीषण हादसे में कार सवारों में एकमात्र जीवित बचे छह साल के मासूम माहेर को अपने चाचा-चाची से बेहद लगाव था। माहेर अक्सर अपने मम्मी-पापा से देहरादून चाचा के घर आने की जिद करता था। ऐसे में पूरे परिवार ने दीपावली से पहले दून आने का प्लान बनाया।
साथ में खुशियां मानने दून आ रहे परिवार को क्या पता था कि नियति को कुछ और ही मंजूर था। अब माहेर का सहारा सिर्फ चाचा और चाची ही बचे हैं। करीब एक वर्ष पूर्व बीमारी के कारण बच्चे के दादा की मृत्यु हो गई थी, जबकि अब हादसे में उसके मम्मी-पापा और दादी भी इस दुनिया से चले गए हैं।
परिवार ने गवां दिया मुखिया
इस हादसे में वाहन चालक नीरज की भी मौत हो गई। उनके परिवार ने भी अपना मुखिया खो दिया। नीरज भी दीपावली की छुट्टी लेने की बात कर रहे थे। बताया जा रहा है कि देहरादून से लौटने के बाद वह दो दिन छुट्टी लेना चाहते थे और अपने परिवार के साथ त्योहार मनाना चाहते थे
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