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    दैनिक जागरण देहरादून का 25वां स्थापना दिवस : कवियों ने बांधा समां, हास्य पर लगे ठहाके, सामाजिक सरोकारों से जुड़े मुद्दों को भी किया उजागर

    By Nirmala BohraEdited By:
    Updated: Fri, 01 Jul 2022 10:38 AM (IST)

    दैनिक जागरण देहरादून के 25वां स्थापना दिवस पर राजधानी के सर्वे चौक स्थित आइआरडीटी सभागार में आयोजित कवि सम्मेलन में कवियों ने अपनी रचनाओं के जरिये जहां एक ओर युवा पीढ़ी को संस्कारों की सीख दी वहीं राजनीतिक भ्रष्टाचार पर भी जमकर कटाक्ष किया।

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    सामाजिक सरोकारों से जुड़े मुद्दों को भी किया उजागर

    जागरण संवाददाता, देहरादून : दैनिक जागरण (देहरादून संस्करण) के 25वें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित कवि सम्मेलन श्रोताओं को हास्य की फुहारों में भिगो गया। देश के ख्यातिनाम कवियों ने सामाजिक सरोकारों से जुड़े मुद्दों को भी कविताओं के माध्यम से उजागर किया। साथ ही उन्होंने दैनिक जागरण के सामाजिक सरोकारों से जुड़ाव की भी मुक्तकंठ से प्रशंसा की।

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    राजधानी के सर्वे चौक स्थित आइआरडीटी सभागार में आयोजित कवि सम्मेलन में कवियों ने अपनी रचनाओं के जरिये जहां एक ओर युवा पीढ़ी को संस्कारों की सीख दी, वहीं राजनीतिक भ्रष्टाचार पर भी जमकर कटाक्ष किया। बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, पर्यावरण संरक्षण और कोरोना काल की विसंगतियों को भी उन्होंने कविताओं के जरिये धार दी। प्रसिद्ध कवि गजेंद्र सोलंकी ने अपनी रचनाओं से आजादी की लड़ाई में उल्लेखनीय भूमिका निभाने वाले क्रांतिकारियों को याद किया। साथ ही हिंदी और हिंदुस्तान के भविष्य की खुशहाल तस्वीर भी प्रस्तुत की। कवियों ने एक ओर देशभक्ति की रचनाओं से श्रोताओं में जोश भरा, तो दूसरी ओर उन्हें हास्य की फुहारों में भी खूब भिगोया।

    कवि दिलीप दुबे ने देश प्रेम की कविताओं से की शुरुआत

    कवि सम्मेलन की शुरुआत कवि दिलीप दुबे ने देश प्रेम की कविताओं से की । उन्होंने अपनी रचनाओं के जरिये युवा पीढ़ी को संस्कारों से जुड़े रहने और माता-पिता के सम्मान की सीख दी। खुशबू शर्मा ने श्रोताओं को खुद के बेटी होने का एहसास कुछ इस अंदाज में कराया 'ज्ञान की ज्योति जला दो मां सुरों की रानी, अपने सुर मुझे दे दो मां सुरों की रानी'। डा. सुरेश अवस्थी ने परिवार में बुजुर्गों की अहमियत समझाते हुए कहा, 'भूलकर भी बेटी-बेटे में फर्क मत करना, अपनी ख्वाहिश के परिंदों पर निशाना रखना। जिंदगी का सफर सुहावना रखना, दिल के महलों में बुजुर्गों का ठिकाना रखना।' अध्यक्षता हरियाणवी कवि अरुण जेमिनी और संचालन गजेंद्र सोलंकी ने किया।

    इससे पूर्व, कवि सम्मेलन का उद्घाटन मुख्य अतिथि तकनीकी शिक्षा व वन मंत्री सुबोध उनियाल, विशिष्ट अतिथि महापौर सुनील उनियाल गामा और दून डिफेंस ड्रीमर्स प्राइवेट लि. के निदेशक हरिओम चौधरी ने दीप जलाकर किया। दोनों अतिथियों को दैनिक जागरण देहरादून के महाप्रबंधक अनुराग गुप्ता ने पुष्प गुच्छ भेंट किए। जबकि, कवि सम्मेलन के मुख्य प्रायोजक दून डिफेंस ड्रीमर्स प्राइवेट लि. के निदेशक हरिओम चौधरी को दैनिक जागरण देहरादून के वरिष्ठ प्रबंधक मार्केटिंग मयंक श्रीवास्तव ने पुष्प गुच्छ देकर सम्मानित किया।

    इस दौरान श्री गुरुराम राय विवि के कुलसचिव डा. दीपक साहनी, होटल सैफरोन लीफ के फ्रंट आफिस मैनेजर यश चौहान, दून-वन कामर्शियल काम्प्लेक्स एंड होटल के सत्यम अग्रवाल को भी पुष्प गुच्छ देकर सम्मानित किया गया।

    जागरण ने गुणवत्ता से कभी समझौता नहीं किया: सुबोध

    वन मंत्री सुबोध उनियाल ने अपने संबोधन में दैनिक जागरण की प्रखरता और गतिशीलता की प्रशंसा की। कहा कि जागरण ने गुणवत्ता और खबरों के चयन में कभी समझौता नहीं किया। स्वयं उनकी सुबह की शुरुआत दैनिक जागरण पढऩे से होती है। कहा कि जागरण ने मानवीय मूल्यों और जन सरोकार को सदैव प्रमुखता दी है। पत्र ने उत्तराखंड राज्य आंदोलन और राज्य बनने के बाद उसके विकास में पथ-प्रदर्शक की भूमिका निभाई है।

    पत्र ने न सिर्फ कुरीति व विसंगतियों पर चोट की, बल्कि सरकार को भी समसामयिक विषयों पर रास्ता दिखाने का काम किया। पत्र ने शिक्षा, पर्यावरण, स्वास्थ्य जैसे अहम मुद्दों पर जनभागीदारी की अलख जगाने का भी काम किया। उन्होंने जागरण को उत्तराखंड में अपने 25 वर्ष के सुनहरे सफर के लिए बधाई दी और उम्मीद जताई कि वह आगे भी सरकार और समाज के बीच सेतु का कार्य करता रहेगा।

    सुबोध ने किया कवियों का सम्मान

    मुख्य अतिथि वन मंत्री सुबोध उनियाल और विशिष्ट अतिथि महापौर सुनील उनियाल गामा ने कवि बलराम श्रीवास्तव, गजेंद्र सोलंकी, अरुण जेमिनी, पापुलर मेरठी, डा. सुरेश अवस्थी, खुशबू शर्मा व दिलीप दुबे को अंगवस्त्र और पुष्प गुच्छ देकर सम्मानित किया।

    दिलीप दुबे

    'वह वृक्ष हमेशा हरे रहते हैं, जो जड़ों से जुड़े रहते हैं। यह सच है दोस्तों, मां-बाप भगवान होते हैं।'

    खुशबू शर्मा

    'सोने और चांदी के गहने नहीं देखती हूं मैं, इस कदर कीमती कपड़े भी नहीं देखती हूं मैं। अपने मां-बाप की आंखों से उड़ा दूं नीदें, इतने उलझे हुए सपने भी नहीं देखती हूं मैं।'

    बलराम श्रीवास्तव

    'दर्द दिल का किसी से कहें या न कहें, नैन से अश्क वो बहें या न बहें।' कुछ भी प्यारा नहीं है वतन के सिवाय, यह तिरंगा रहे, हम रहें या न रहें।

    पापुलर मेरठी

    'जयराम तुम भी आओ, सुलेमान तुम भी आओ, जोधर चर्चा के साथ अमरकांत तुम भी आओ। यशवीर को पुकारकर बलराम तुम भी आओ, तुम हम से क्यों अलग हो श्रीमान तुम भी आओ। ऐसा कोई कह न सके हम सब में फूट है, हम सब हैं भाई-भाई, यह रिश्ता अटूट है।'

    अरुण जेमिनी

    'नोटबंदी से तालाबंदी तक मोदीजी ने इसे नई ऊंचाई दी। मैंने एक भक्त से पूछा आठ का रहस्य क्या है। भक्त ने बड़ी कुटिलता से मुस्कराकर जवाब दिया, मोदीजी हर काम सोच-समझकर करते हैं। जब-जब आप आठ को सात (सत्ता) से गुणा करोगे तो उत्तर मिलेगा छप्पन।

    डा. सुरेश अवस्थी

    'खास से भी खास में, वह खास रहते हैं, उनके होने के सदा एहसास रहते हैं। नाम लेते हैं उनका, आती है देश की खुशबू, वह दूर रहकर भी हमेशा पास रहते हैं।'

    गजेंद्र सोलंकी

    'लाल किले की प्राचीर से आती है आवाज रही, 75 सालों की आजादी का दिलों में सम्मान रहे। हम सबके प्यारे भारत की जग में ऊंची शान रहे, भारत की गौरवगाथा का जन गण मन को ध्यान रहे।'