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    फर्जी लोन एप स्कैम साइबर ठग दिल्ली एयरपोर्ट पर गिरफ्तार, चीन से जुड़े तार; पूछताछ में सनसनीखेज खुलासा

    Updated: Sun, 06 Jul 2025 12:26 PM (IST)

    उत्तराखंड एसटीएफ ने फर्जी लोन एप से साइबर ठगी करने वाले अभिषेक अग्रवाल को दिल्ली एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया। वह चीन से जुड़े गिरोह के लिए काम करता था और उसने 35-40 शेल कंपनियां बनाईं जिनमें से कई उसकी पत्नी के नाम पर थीं। इन कंपनियों के माध्यम से 750 करोड़ से अधिक की संदिग्ध धनराशि का लेन-देन किया गया।

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    उत्तराखंड पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स ने इंदिरा गांधी इंटरनेशनल हवाई अड्डे से गिरफ्तार किया। Concept Photo

    जासं, देहारदून। फर्जी लोन एप से साइबर ठगी की घटनाओं को अंजाम देने वाले साइबर ठग को उत्तराखंड पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स ने इंदिरा गांधी इंटरनेशनल हवाई अड्डे से गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपित की पहचान अभिषेक अग्रवाल निवासी अशोक विहार जिला नार्थ वेस्ट दिल्ली के रूप में हुई है।

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    साइबर ठग के तार चीन से जुड़े हैं। पूछताछ में उसने कुछ चीनी नागरिकों के नाम भी साझा किए हैं। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एसटीएफ नवनीत भुल्लर ने बताया कि विभिन्न फर्जी लोन एप के माध्यम से भारत के नागरिकों के साथ धोखाधड़ी व जबरन मोटी धनराशि वसूलने के मामले में वर्ष 2022 में मुकदमा दर्ज किया गया था।

    गिरोह उत्तराखंड के अलावा देश के विभिन्न राज्यों में संपर्क कर फर्जी लोन एप के जरिए पीड़ितों को कम दस्तावेजों में तत्काल लोन देने का लालच देकर एप इंस्टाल कराते हैं। इसके बाद पीड़ितों के मोबाइल डिवाइस का एक्सेस प्राप्त कर उसकी गैलरी से निजी डेटा चुरा लेते हैं। इसके बाद पीड़ित को अधिक ब्याज भरने के धमकी भरे मैसेज भेजते हैं। अधिक ब्याज जमा न करने वालों की फोटो को अश्लील बनाकर इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित करते हैं।

    बदनामी के डर से पीड़ित अधिक ब्याज भरने को मजबूर हो जाते हैं। ऐसे में गिरोह पीड़ितों से करोड़ों रुपये लेकर विदेश ट्रांसफर कर देते हैं। विवेचना में फर्जी लोन एप चलाने वाले मास्टरमाइंड अभिषेक अग्रवाल के बारे में जानकारी मिली। आरोपित विदेश में छिपा हुआ था, ऐसे में उसके खिलाफ लुक आउट सर्कूलर जारी किया गया था। शनिवार को एसटीएफ को सूचना मिली कि आरोपित दिल्ली एयरपोर्ट पर पहुंचने वाला है, जिसे तत्काल गिरफ्तार किया गया।

    प्रारंभिक पूछताछ में आरोपित ने बताया कि वह चीनी नागरिकों का गिरोह के संपर्क में था और उसने चीनी मास्टरमाइंडों के लिए फर्जी शेल कंपनियां बनाईं, जिन पर बैंक खाते खोले गए। आरोपित पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट है, ऐसे में उसने करीब 35-40 शेल कंपनियां बनाई।

    इनमें से 13 कंपनियां उसके खुद के नाम पर और 28 कंपनियां उसकी पत्नी के नाम पर रजिस्टर्ड पाई गईं । कई कंपनियों में सह-निर्देशक चीनी नागरिक हैं। आरोपित ने कंपनियां चीनी गिरोह के लिए बनाई गईं, जिनके माध्यम से लगभग 750 करोड़ से अधिक की संदिग्ध धनराशि के ट्रांजेक्शन प्रकाश में आई जिसकी विवेचना की जा रही है।

    आरोपित पूर्व में कई बार विदेशी यात्रा कर चुका है। चीन, हांगकांग आदि देशों से संचालित फर्जी लोन एप्स के माध्यम से भारतीय नागरिकों को टारगेट किया जाता था और करोडों रूपयों का लेन-देन किया जाता था। जांच में यह भी प्रकाश में आया है कि आरोपित के विरुद्ध देश के कई राज्यों में शिकायतें दर्ज हैं।

    आरोपित ने कुछ चीनी नागरिकों की जानकारी दी है, जिसके संबंध में जानकारी के लिए अन्य राज्यों की पुलिस के साथ संपर्क किया जा रहा है व भारत सरकार और इंटरपोल के माध्यम से पत्राचार किया जा रहा है।