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    ऋषिकेश एम्‍स में मरीज को बिना बेहोश किए प्रत्यारोपित की सीआरटी-डी

    हृदय की समस्या से जूझ रहे एक व्यक्ति के उपचार में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ऋषिकेश के चिकित्सकों ने मरीज को बिना बेहोश किए सफलतापूर्वक सीआरटी-डी (कार्डियक रीङ्क्षसक्रोनाइजेशन थैरेपी डिफिब्रिलेटजिन) मशीन प्रत्यारोपित की है। मरीज अब पूरी तरह से स्वस्थ है ।

    By Sumit KumarEdited By: Updated: Sun, 28 Feb 2021 03:37 PM (IST)
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    एम्स ऋषिकेश के चिकित्सकों ने मरीज को बिना बेहोश किए सफलतापूर्वक सीआरटी-डी (कार्डियक रीङ्क्षसक्रोनाइजेशन थैरेपी डिफिब्रिलेटजिन) मशीन प्रत्यारोपित की है।

    जागरण संवाददाता, ऋषिकेश : हृदय की समस्या से जूझ रहे एक व्यक्ति के उपचार में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ऋषिकेश के चिकित्सकों ने मरीज को बिना बेहोश किए सफलतापूर्वक सीआरटी-डी (कार्डियक रीङ्क्षसक्रोनाइजेशन थैरेपी डिफिब्रिलेटजिन) मशीन प्रत्यारोपित की है। मरीज अब पूरी तरह से स्वस्थ है और उसे एम्स अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। 

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    पुलिस लाइन, नैनीताल निवासी 62 वर्षीय मोहम्मद हासिम पिछले एक साल से हृदय की समस्या से ग्रसित थे। रोगी को सांस फूलने और हृदय की पङ्क्षम्पग एक समान नहीं होने से उसे अक्सर बेहोशी आने की शिकायत थी। यहां तक कि कभी-कभी उसके दिल की धड़कन भी कुछ समय के लिए रुक जाती थी। एम्स के कॉर्डियोलॉजी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. वरुण कुमार ने बताया कि रोगी का जीवन बचाने के लिए उसके शरीर में पेसमेकर की तरह कार्य करने वाली एक सीआरटी-डी डिवाइस लगाई जानी बेहद जरूरी थी। रोगी को लंबे समय से बार-बार सांस फूलने की तकलीफ भी थी। जांच में पाया गया कि उसका हार्ट फंक्शन सही ढंग से कार्य नहीं कर रहा है और हार्ट का साइज भी बड़ा हो चुका है। उन्होंने बताया कि सीआरटी-डी डिवाइस लगाने की प्रक्रिया में ढाई घंटे का समय लगा है। डॉ. वरुण ने बताया कि डिवाइस लगाने की यह प्रक्रिया उच्च तकनीक के आधार पर मरीज को बिना बेहोश किए संपन्न कराई गई है। उन्होंने बताया कि मरीज अब पूरी तरह से स्वस्थ है और उसे अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया है। सीआरटी-डी प्रत्यारोपित करने वाले चिकित्सकों की टीम में डॉ. वरुण के अलावा सीनियर रेजिडेंट डॉ. शिशिर, स्टाफ नर्सिंग ऑफिसर हंसराज, इन्दू, विपिन, हरिमोहन, अंकित आदि शामिल थे। 

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    मरीज 62 वर्षीय मोहम्मद हासिम आयुष्मान भारत योजना के तहत एम्स में भर्ती हुए थे। आयुष्मान भारत योजना के उत्तराखंड राज्य समन्वयक अतुल जोशी ने बताया कि गोल्डन कार्ड धारक किसी भी व्यक्ति के उपचार में पांच लाख से अधिक धनराशि का सहयोग सरकार की ओर से दिया जाता है। मगर, मोहम्मद हासिम के उपचार में छह लाख रुपये का खर्च आया, जिसे योजना के अंतर्गत ही वहन किया गया है। उन्होंने बताया कि गोल्डन कार्ड पर छह लाख रुपए का लाभ देने वाला यह राज्य में पहला मामला है। 

    क्या है हार्ट फेलियर 

    हार्ट फेलियर (दिल की विफलता) एक गंभीर बीमारी है। डॉ. बरुण ने बताया कि कुछ लोगों का हृदय शरीर के अन्य अंगों का सहयोग करने के लिए पर्याप्त स्तर पर पम्प नहीं करता है। ऐसे में हृदय की मांसपेशियां कठोर हो जाने के कारण हृदय से रक्त का प्रवाह कम या अवरुद्ध हो जाता है। यदि मरीज का समय पर इलाज नहीं हुआ तो उसके जीवन को क्षति पहुंच सकती है। 

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