जागरण संवाददाता, देहरादून। राज्य परिवहन विभाग में दो दिन पहले हुए तीन आरटीओ के तबादले पर विवाद गहरा गया है। आरोप है कि 'सांठगांठ' में अधिकारियों निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देश तक ताक पर रख डाले। सबसे ज्यादा उंगली देहरादून के आरटीओ पद पर साढ़े तीन साल से डटे दिनेश चंद्र पठोई पर उठ रही। शासन ने जो तबादले किए, उनमें सभी तीन साल से कम तैनाती वाले हैं, जबकि नियमानुसार तबादले में दून आरटीओ का नंबर सबसे पहले होना चाहिए था। सूत्रों की मानें तो इस मामले में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी नाराज दिख रहे। उन्होंने तबादले के आदेश से संबंधित फाइल तलब कर ली है।

राज्य में फरवरी-मार्च में विधानसभा के चुनाव होने हैं। ऐसे में निर्वाचन आयोग के स्पष्ट दिशा-निर्देश हैं कि निर्वाचन कार्य से जुड़े विभाग में कोई विभागाध्यक्ष तीन साल से अधिक की तैनाती वाला न हो। साथ ही जिन अधिकारियों ने पिछले चुनाव में नोडल अधिकारी की जिम्मेदारी निभाई हो, आयोग ने उनके भी तबादले के आदेश दिए हुए हैं। इसकी जद में दून के आरटीओ (प्रशासन) दिनेश चंद्र पठोई सबसे पहले आ रहे। ऐसे में उनका तबादला तय माना जा रहा था पर ऐसा नहीं हुआ। पठोई को नौ जुलाई 2018 को दून आरटीओ पद पर तैनात किया गया था। इससे पहले वह पौड़ी में इसी पद पर थे। पिछले लोकसभा चुनाव में वह नोडल अधिकारी परिवहन (देहरादून) भी रह चुके हैं। वहीं, दून आरटीओ (प्रवर्तन) के पद से हटाकर हल्द्वानी में आरटीओ (प्रशासन) के पद पर भेजे गए संदीप सैनी को देहरादून में तैनाती को एक साल ही हुआ था। सैनी को 17 अक्टूबर 2020 को आरटीओ प्रवर्तन के पद पर तैनात किया गया था।

वहीं, पौड़ी संभाग में तैनात रहे आरटीओ (प्रशासन) सुनील शर्मा को शासन ने दून में आरटीओ (प्रवर्तन) के पद पर भेजा है। विभागीय सूत्रों की मानें तो प्रवर्तन पद पर हुई तैनाती से शर्मा भी नाखुश हैं। वरिष्ठता के आधार पर शर्मा को प्रशासन के पद पर भेजा जाना चाहिए था। यही कारण है कि शर्मा ने अभी नई तैनाती पर ज्वाइनिंग नहीं दी है।

सिटी बस महासंघ ने की शिकायत

परिवहन विभाग में तबादलों में हुए 'खेल' को लेकर सिटी बस सेवा महासंघ ने केंद्रीय निर्वाचन आयोग, राज्य निर्वाचन आयोग व मुख्यमंत्री को पत्र भेज शिकायत की है। महासंघ के अध्यक्ष विजय वर्धन डंडरियाल ने आरोप लगाया कि पठोई की तैनाती सिर्फ देहरादून या पौड़ी संभाग में ही रही है। आरोप है कि उनके कार्यकाल में दून आरटीओ कार्यालय में जमकर भ्रष्टाचार हुआ है। विजिलेंस के छापे में कार्मिकों की गिरफ्तारी तक हो चुकी है। महासंघ ने मांग की है कि पठोई को तत्काल सुगम से दुर्गम में भेजा जाए। चेतावनी दी गई कि यदि इस संबंध में सरकार कार्रवाई नहीं करती है तो महासंघ प्रधानमंत्री कार्यालय में भी इसकी शिकायत करेगा।

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Edited By: Raksha Panthri