जागरण संवाददाता, देहरादून। उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय का विवादों से नाता नहीं छूट रहा है। कभी भर्तियां, कभी खरीद और कभी अन्य किसी कारण विश्वविद्यालय चर्चा में आ जाता है। अब यहां उप कुलसचिव डा. शैलेंद्र प्रधान की एक टिप्पणी पर घमासान मचा हुआ है। आयुर्वेद विश्वविद्यालय शिक्षक संघ ने उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई व पद से हटाने की मांग कुलपति से की है।

कुलपति को भेजे पत्र में शिक्षक संघ के अध्यक्ष डा. अवधेश कुमार ने आरोप लगाया है कि उप कुलसचिव विभिन्न बैठक में वरिष्ठ शिक्षकों के प्रति अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते रहे हैं। वह अक्सर अपमानजनक तरीके से बात करते हैं। हाल ही में उन्होंने इंटरनेट मीडिया में भी वरिष्ठ शिक्षकों पर अभद्र टिप्पणी की। जिससे समस्त शिक्षक समुदाय में रोष व्याप्त है। यह मांग की है कि उन्हें उप कुलसचिव पद से हटाकर मूल तैनाती स्थल पर भेजा जाए। इधर, उप कुलसचिव डा. शैलेंद्र प्रधान का कहना है कि उक्त संगठन के पंजीकरण, मान्यता, चुनाव आदि तक की स्थिति स्पष्ट नहीं है। बीती मार्च में संघ से जवाब-तलब किया गया था, जिसका अभी तक कोई जवाब नहीं मिला है। इस विषय में स्थिति स्पष्ट हो तब तो इनकी किसी बात पर प्रतिक्रिया दी जाए। उन्होंने कहा कि मैं एक असिस्टेंट प्रोफेसर हूं और जहां कथित टिप्पणी की बात कही जा रही है वह असिस्टेंट प्रोफेसरों का ही एक ग्रुप है। इस ग्रुप में करियर एडवांसमेंट स्कीम (कैस) के तहत पदोन्नति पर बहस चल रही थी। जिसमें कुछ भी अभद्र नहीं था। बहस का जवाब तर्क सहित दिया जाना चाहिए। इस तरह के दुष्प्रचार से कुछ होने वाला नहीं है।

दीपक चौहान बने महासंघ के अध्यक्ष

समस्त राजकीय विश्वविद्यालयों में उपनल के माध्यम से कार्यरत कर्मचारियों ने उत्तराखंड विश्वविद्यालय आउटसोर्स महासंघ का गठन किया है। महासंघ में एनएनबी गढ़वाल केंद्रीय विवि के कर्मचारी दीपक चौहान को महासंघ का मुख्य संरक्षक, यूटीयू से मनोज गहतोड़ी को सचिव मनोनीत किया। भरसार कृषि विवि से विजय राम खंकरियाल को सह संयोजक, आयुर्वेद विवि से डा. भावना पांडे को सहसचिव व दून विवि के रमेश रावत को मीडिया प्रभारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। महासंघ कर्मचारियों की समस्याओं व नियमितीकरण की मांगों को सरकार के समक्ष उठाएगा

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Edited By: Raksha Panthri