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    उत्‍तराखंड : वन विभाग की अनुमति के बिना रेस्क्यू के नाम पर हेमकुंड साहिब में हो रहा था हेलीपैड का निर्माण, रुकवाया

    हेमकुंड साहिब में हेलीपैड निर्माण को लेकर कार्ययोजना लंबे समय से विवादों में है। यहां पर वर्ष 2013 में आई आपदा के बाद हेलीपैड निर्माण का प्रयास हुआ। लोनिवि का कहना है कि इस हेलीपैड को रेस्क्यू कार्य के लिए उपयोग में लाया जाएगा।

    By Nirmala BohraEdited By: Updated: Sun, 26 Jun 2022 10:12 AM (IST)
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    रेस्क्यू के नाम पर हेलीपैड का निर्माण कराया जा रहा था, प्र‍तीकात्‍मक तस्‍वीर

    संवाद सहयोगी, गोपेश्वर: हेमकुंड साहिब में बिना अनुमति के हेलीपैड निर्माण का मामला एक बार फिर गरमा गया है। लोनिवि की ओर से यहां रेस्क्यू के नाम पर हेलीपैड का निर्माण कराया जा रहा था, जिस पर वन विभाग ने रोक लगा दी है।

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    हेलीपैड निर्माण को लेकर कार्ययोजना लंबे समय से विवादों में

    हेमकुंड साहिब में हेलीपैड निर्माण को लेकर कार्ययोजना लंबे समय से विवादों में है। यहां पर वर्ष 2013 में आई आपदा के बाद हेलीपैड निर्माण का प्रयास हुआ। लेकिन, तब स्थानीय निवासियों के प्रबल विरोध के कारण मामला आगे नहीं बढ़ पाया। स्थानीय निवासियों का कहना था कि हेलीपैड बनने के बाद तीर्थ यात्री गोविंदघाट से सीधे हेमकुंड साहिब पहुंच जाएंगे। जबकि, अभी वह हेलीकाप्टर से हेमकुंड साहिब के बेस कैंप घांघरिया पहुंचकर वहां विश्राम के लिए रुकते हैं।

    वन भूमि स्थानांतरण अथवा वन भूमि स्वीकृति का कोई दस्तावेज ही नहीं

    बताया गया कि लोनिवि की ओर से हेमकुंड के पास अटलाकोटी में पिछले चार दिन से हेलीपैड का निर्माण करवाया जा रहा है। लोनिवि का कहना है कि इस हेलीपैड को रेस्क्यू कार्य के लिए उपयोग में लाया जाएगा। उधर, स्थानीय निवासियों की शिकायत पर वन विभाग ने मौके का निरीक्षण किया तो पता चला कि लोनिवि के पास वन भूमि स्थानांतरण अथवा वन भूमि स्वीकृति का कोई दस्तावेज ही नहीं है।

    जबकि, फूलों की घाटी राष्ट्रीय पार्क से लगा यह क्षेत्र वन विभाग के बफर जोन में आता है। वन क्षेत्राधिकारी बृजमोहन भारती ने बताया कि बिना स्वीकृति व वन भूमि स्थानांतरण के कार्य करने पर जुर्माना लगाया जा रहा है। साथ ही निर्माण कार्य भी रोक दिया गया है।

    बदरीनाथ मास्टर प्लान कार्यों का किया निरीक्षण

    प्रधानमंत्री कार्यालय के उप सचिव मंगेश घिल्डियाल ने शनिवार को बदरीनाथ धाम पहुंचकर मास्टर प्लान के तहत संचालित कार्यों का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों व कार्यदायी संस्थाओं को पहले चरण के तहत संचालित निर्माण कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सितंबर तक पहले चरण के कार्यों को पूरा किया जाए।

    उप सचिव मंगेश घिल्डियाल शनिवार दोपहर साढ़े 12 बजे बदरीनाथ धाम पहुंचे। उन्होंने लूप रोड, बीआरओ बाईपास निर्माण, झीलों का सुंदरीकरण, रिवर फ्रंट डेवलपमेंट आदि कार्यों को देखा। उन्होंने कहा कि शेष नेत्र झील और बदरीश झील में पानी की वैकल्पिक व्यवस्था भी रखी जाए।