देहरादून, जेएनएन। राजकीय बालिका निकेतन में किशोरी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत मामले में राज्य मंत्री रेखा आर्य के जांच के आदेश पर अपर सचिव योगेंद्र यादव ने दो सदस्यीय कमेटी का गठन कर दिया है। अपर सचिव ने कमेटी में मुख्य प्रोबेशन अधिकारी मोहित चौधरी व जिला प्रोबेशन अधिकारी मीना बिष्ट को शामिल किया है। कमेटी ने मामले की जांच शुरू करते हुए कई अहम दस्तावेज एकत्र किए।

किशोरी की आत्महत्या के तरीके पर संदेह जताते हुए राज्यमंत्री रेखा आर्य ने तत्काल जांच के आदेश दिए थे। इसके बाद शुक्रवार को अपर सचिव एवं निदेशक महिला कल्याण योगेंद्र यादव भी खासे सक्रिय नजर आए। उन्होंने दो सदस्यीय जांच कमेटी में सदस्यों का चयन कर उनके साथ जांच को लेकर बैठक की। स्पष्ट कहा गया कि जांच में हर पहलू की गंभीरता से जांच की जाए। इसमें किशोरी की आत्महत्या के तरीके व अस्पताल ले जाने में हुई देरी समेत कई अन्य बिंदुओं को शामिल किया गया है। 

बता दें कि राज्यमंत्री रेखा आर्य ने गुरुवार को बालिका निकेतन का निरीक्षण किया था। इस दौरान रेखा आर्य ने किशोरी के आत्महत्या करने की तरीके पर संदेह जताया था। उनका कहना था कि बाथरूम के हत्थे पर फंदा लगाकर आत्महत्या करना थोड़ा समझ से परे है। इसके लिए उन्होंने अपर सचिव की अध्यक्षता में दो सदस्यीय कमेटी से जांच कराने के आदेश दिए थे।

यह है मामला 

बुधवार शाम को मां की हत्या में आरोपित हरिद्वार निवासी एक किशोरी की बालिका निकेतन में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। पुलिस पूछताछ में बालिका निकेतन में मौजूद स्टॉफ ने बताया था कि किशोरी काफी समय से डिप्रेशन में थी। शाम के समय वह क्लास से बाथरूम गई थी। काफी देर बाद भी जब वह वापस नहीं आई तो उसकी खोजबीन शुरू की गई। 

स्टॉफ कहना था कि जब बाथरूम का दरवाजा खटखटाया गया तो वह अंदर से बंद था। जिसके बाद एक बच्ची को खिड़की से अंदर भेजा गया तो वहां किशोरी दरवाजे के हत्थे से चुन्नी के सहारे लटकी हुई थी। इसलिए उनका दावा था कि किशोरी ने डिप्रेशन में आकर आत्महत्या कर ली। 

बालिका निकेतन में नहीं रहना चाहती थी किशोरी

राजकीय बालिका निकेतन प्रकरण में लगातार नए तथ्य सामने आ रहे हैं। अब यह सामने आया है कि किशोरी बालिका निकेतन में रहना नहीं चाहती थी। जब उसे नारी निकेतन से बालिका निकेतन में शिफ्ट किया गया तो उसका शुरू से ही मन नहीं लग रहा था। वो बार-बार नारी निकेतन में रखने की गुहार लगाती रही। इसी बीच उसकी एक बार तबीयत भी खराब हुई। 

यह भी पता चला कि एंबुलेंस को बालिका निकेतन पहुंचने में एक घंटा 16 मिनट का समय लगा। यदि एंबुलेंस समय पर पहुंचती तो शायद किशोरी को बचाया जा सकता था। यह सब तथ्य राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष विजया बड़थ्वाल ने बालिका निकेतन में निरीक्षण करने के बाद साझा किए। 

शुक्रवार को महिला आयोग अध्यक्ष विजया बड़थ्वाल व सचिव कामिनी गुप्ता के नेतृत्व में टीम केदारपुरम स्थित बालिका निकेतन में निरीक्षण करने पहुंची। विजया बड़थ्वाल ने स्टाफ कर्मचारियों व अन्य किशोरियों से पूछताछ की। उन्होंने किशोरी को नारी निकेतन से बालिका निकेतन में शिफ्ट करने के समय, कारण व यहां उसकी स्थिति के बारे में जानकारी ली। 

निरीक्षण के दौरान आयोग अध्यक्ष बड़थ्वाल ने बालिका निकेतन में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली पर नाराजगी व्यक्त की। पता चला है कि किशोरी को छह बजे बाथरूम में बेहोशी की हालत में पड़ा हुआ देखा गया। इसके बाद सात बजकर 16 मिनट पर एंबुलेंस बालिका निकेतन में पहुंची। कहा कि शिशु व बालिका निकेतन में एंबुलेंस की व्यवस्था न होने से भविष्य में भी बच्चों की जान पर खतरा हो सकता है। इसके लिए आवश्यक निर्देश दिए हैं। 

सुरक्षा में भी लापरवाही 

महिला आयोग की टीम ने निरीक्षण के दौरान सुरक्षा व्यवस्था में भी कई खामियां पाई। विजया बड़थ्वाल ने कहा कि परिसर के समीप की स्ट्रीट लाइटें खराब व टूटी पड़ी हैं। रात के समय पर्याप्त रोशनी न होने के कारण यह सुरक्षा के लिहाज से खतरा माना जा सकता है।

कांग्रेसियों ने किया सरकार के खिलाफ प्रदर्शन

बालिका निकेतन प्रकरण को लेकर प्रदेश कांग्रेस ने राज्य सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। शुक्रवार को कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता गरिमा दसौनी के नेतृत्व में पार्टी कार्यकर्ता बालिका निकेतन पहुंचे। उन्होंने बालिका निकेतन के भीतर जाने की अनुमति मांगी, लेकिन निकेतन प्रशासन ने इसकी अनुमति देने से इन्कार कर दिया। इसके बाद गुस्साए कार्यकर्ताओं ने वहां पर प्रदर्शन शुरू कर दिया।

इस दौरान दसौनी ने कहा कि सरकार बाल गृहों के बच्चों की देखरेख करने में भी नाकाम साबित हो रही है। प्रदर्शन करने वालों में परिणीता बडोनी, रेनु नेगी, मंजू तोमर, अनुराधा तिवाड़ी, सावित्री व कई अन्य शामिल थे।

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Posted By: Bhanu