देहरादून, जेएनएन। बालिका निकेतन में हुई किशोरी की मौत की गुत्थी उलझ गई है। दावा किया जा रहा था कि किशोरी ने बाथरूम के दरवाजे के हैंडल से चुन्नी के सहारे फांसी लगाई है, मगर पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण स्पष्ट नहीं हुआ है। ऐसे में बालिका निकेतन प्रशासन सवालों के घेरे में आ गया है। पुलिस ने किशोरी का बिसरा सुरक्षित करा लिया है। 

बुधवार शाम को मां की हत्या में आरोपित हरिद्वार निवासी एक किशोरी की बालिका निकेतन में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। पुलिस पूछताछ में बालिका निकेतन में मौजूद स्टॉफ ने बताया था कि किशोरी काफी समय से डिप्रेशन में थी। शाम के समय वह क्लास से बाथरूम गई थी। काफी देर बाद भी जब वह वापस नहीं आई तो उसकी खोजबीन शुरू की गई। 

स्टॉफ कहना था कि जब बाथरूम का दरवाजा खटखटाया गया तो वह अंदर से बंद था। जिसके बाद एक बच्ची को खिड़की से अंदर भेजा गया तो वहां किशोरी दरवाजे के हत्थे से चुन्नी के सहारे लटकी हुई थी। इसलिए उनका दावा था कि किशोरी ने डिप्रेशन में आकर आत्महत्या कर ली। 

शुरू से ही किशोरी के बाथरूम के हत्थे से लटककर आत्महत्या करने की बात किसी को पच नहीं रही थी। अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी मौत का कारण स्पष्ट न होने के कारण गुत्थी उलझ गई है। किशोरी के साथ बालिका निकेतन में कोई अनहोनी तो नहीं हुई, जिसे छिपाया जा रहा है और घटना को आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की जा रही है। 

तो पहले की थी आत्महत्या की कोशिश

अंदेशा जताया जा रहा है किशोरी ने पूर्व में भी जान देने की कोशिश की थी। कोर्ट के आदेश पर किशोरी को तीन मई को बालिका निकेतन में शिफ्ट किया गया था। इससे पहले वह अक्टूबर से नारी निकेतन में रह रही थी। बताया जा रहा है कि किशोरी के बाएं हाथ की कलाई में काफी गहरा घाव था, जो ज्यादा पुराना नहीं था। ऐसे में संभव है कि नारी निकेतन में रहने के दौरान उसने कलाई काटकर जान देने की कोशिश की थी। मगर इस बात की जानकारी पुलिस की पूछताछ में स्टाफ ने नहीं दी।   

पुलिस ने भी शुरू की जांच

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण स्पष्ट न होने के कारण पुलिस ने भी मामले में जांच शुरू कर दी है। एसएसपी निवेदिता कुकरेती ने बताया कि सीओ डालनवाला जया बलूनी घटना की जांच करेंगी। जल्द ही बालिका निकेतन में मौजूद बच्चों, स्टाफ आदि से पूछताछ की जाएगी। 

एक अधीक्षक के भरोसे छोड़े थे दो बाल गृह

बालिका निकेतन में किशोरी की खुदकुशी मामले में एक तथ्य सामने आ रहा है। जिस दिन किशोरी की मौत हुई, उस दिन एक ही अधीक्षक के भरोसे दो बाल गृह छोड़े गए थे। दरअसल, बालिका निकेतन की अधीक्षक ट्रेनिंग के लिए बाहर गई हैं। उनकी अनुपस्थिति में शिशु निकेतन की अधीक्षक को ही बालिका निकेतन की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गई थी। जब बाल गृह बेहद संवेदनशील हैं तो दो बाल गृहों को एक अधीक्षक के भरोसे कैसे छोड़ा जा सकता है।  

विभागीय सूत्रों ने बताया कि घटना वाले दिन शिशु निकेतन की अधीक्षक सुनीता सिंह पर ही बालिका निकेतन की जिम्मेदारी थी। बताया कि एक समय पर दो बाल गृहों की निगरानी करना मुश्किल है। क्योंकि आए दिन बाल गृहों में तब भी घटनाएं होती रही हैं, जब बाल गृह में अलग-अलग अधीक्षक तैनात रही हैं। वहीं, बाल गृह की 24 घंटे निगरानी करना अधीक्षक के लिए भी बेहद मुश्किल एवं चुनौतीभरा काम रहता है। 

एक अधीक्षक के भरोसे दो बाल गृहों को छोड़ना सुरक्षा की दृष्टि से बेहद गंभीर है। हालांकि, जिला प्रोबेशन अधिकारी मीना बिष्ट ने इन संभावनाओं से इन्कार किया है। उन्होंने कहा कि अतिरिक्त अधीक्षक न होने के कारण अवकाश की स्थिति में एक अधीक्षक को दो चार्ज संभालने की व्यवस्था है। स्टाफ की कमी उच्च स्तर का मामला है। 

बाल गृहों में स्टाफ की कमी

स्टाफ की कमी सिर्फ देहरादून के बाल गृह में ही नहीं, बल्कि प्रदेशभर में है। प्रदेशभर के बाल गृ़हों में करीब 138 कर्मचारियों की कमी है। हालांकि, अब राज्यमंत्री रेखा आर्य ने इन पदों को भरने का आश्वासन दिया है। 

रिक्त पदों को शीघ्र भरेगी सरकार 

महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास राज्यमंत्री रेखा आर्य का कहना है कि प्रदेशभर में राजकीय बाल गृहों में अधीक्षक व कर्मचारियों की कमी है। सरकार इन रिक्त 138 पदों को शीघ्र भरेगी, ताकि बच्चों की सुरक्षा में कोई कमी न रहे।

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Posted By: Bhanu

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