जागरण संवाददाता, देहरादून: चीन के साथ सीमा पर चल रही तनातनी का असर इस बार दीपावली के बाजार में भी देखने को मिल रहा है। पिछले साल तक दीपावली पर बाजार में चौतरफा चीन की झालरों व अन्य सजावटी सामान का कब्जा नजर आता था। लेकिन, इस बार तस्वीर काफी हद तक बदल गई है। दुकानदारों ने आमजन में चीन के प्रति आक्रोश को देखते हुए देश में बनी झालर व सजावटी सामान को दुकान में अधिक जगह दी है।

दीपावली के लिए दून के बाजार पूरी तरह तैयार हो चुके हैैं। इस खास मौके पर आपके घर-आंगन को रोशनी से जगमगाने के लिए दुकानदार तरह-तरह के बल्ब और झालर लेकर आए हैं। अच्छी बात यह है कि इस दफा देश प्रेम और जनता की भावनाओं को भांपते हुए दुकानदारों ने भारत में निर्मित रोप लाइट, फूलबत्ती, लीची लाइट, दीपक लाइट, झालर और सजावटी सामान को अधिक तवज्जो दी है। दुकानों में थोड़ा-बहुत चाइनीज सामान भी दिख रहा है, मगर दुकानदारों का कहना है कि यह पिछले साल का बचा हुआ माल है। इस बार उन्होंने चाइनीज लाइट मंगाई ही नहीं है। उनका कहना है कि चीन को सबक सिखाने का यही तरीका है कि उनके उत्पादों का बहिष्कार किया जाए। झालरों के थोक विक्रेता जेके एंड संस के संचालक सुभम जैन की धामावाला में दुकान है। उनका कहना है कि इस बार दुकान में सिर्फ देश में बनी झालर को ही बिक्री के लिए रखा गया है। चाइनीज के मुकाबले 50 फीसद तक महंगी होने के बावजूद आमजन देश में बनी झालर ही मांग रहे हैं।

यह है दाम में अंतर

चीन और देश में बनी झालर के दाम में 50 से 60 फीसद का अंतर है। बाजार में होलसेल में 15 मीटर की देश में बनी झालर 130 रुपये की मिल रही है। इतनी ही लंबाई की चाइनीज झालर की कीमत 50 से 60 रुपये है। हालांकि, फुटकर में इनके दाम में ज्यादा अंतर नहीं है। 12 मीटर की देश में बनी झालर जहां 110 रुपये की मिल रही है, वहीं 10 मीटर की चाइनीज झालर की कीमत 100 रुपये है।

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हनुमान चौक के फुटकर व्‍यापारी शैलेश कुमार गुप्ता का कहना है कि आमजन की भावनाओं का सम्मान करते हुए इस बार चाइनीज झालर नहीं मंगाई। देश में बनी झालर की ही बिक्री कर रहे हैं, जिन्हें लोग खूब पसंद भी कर रहे हैं। धामावाला फुटकर व्‍यापारी नितिन चंदो बताते हैं कि सीमा पर चीन के साथ चल रही तनातनी का असर व्यापार में भी दिख रहा है। आमजन चाइनीज उत्पादों को पसंद नहीं कर रहे। इसीलिए इस बार देश में बनी झालर का स्टाक ही रखा गया है।

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Edited By: Sumit Kumar