हेलीकॉप्टर हादसाः पापा, पहले बद्रीनाथ दर्शन कर लौटूंगा, फिर परिवार को साथ ले जाऊंगा, लेकिन, हमेशा के लिए बिछड़ गए अरुण
बद्रीनाथ हेलीकॉप्टर हादसे में मारे गए छह लोगों के शव एम्स ऋषिकेश पहुंचे, जहां परिजनों की चीख-पुकार मच गई। बेंगलुरु ...और पढ़ें
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एम्स ऋषिकेश में पोस्टमार्टम के बाद डैडबॉडी लेने के लिए पहुंचे मृतकों के स्वजन
HighLights
एम्स ऋषिकेश में परिजनों की चीख-पुकार मच गई।
इंस्पेक्टर अरुण सालुंके अनाथ बच्चों से करते थे प्यार।
पायलट हिमांशु सबरवाल सेना से सेवानिवृत्त अनुभवी थे।
मनोज राणा जागरण, ऋषिकेश। बीते 30 अक्टूबर को बद्रीनाथ से देहरादून आ रहा हेलीकाप्टर चाई गांव के समीप क्रैश हो गया था। हादसे पायलट समेत छह लोगों की मौत हो गई थी। रविवार सुबह मृतकों के शव पोस्टमार्टम के लिए एम्स ऋषिकेश पहुंचे। जैसे ही मृतकों के शव एम्स के मोर्चरी घर में पहुंचे, शव का इंतजार कर रहे स्वजनों में चीख-पुकार मच गई।
हादसे में मृतक कनार्टक में बंगलुरू सेंट्रल क्राइम ब्रांच में इंस्पेक्टर रहे अरुण सालुंके (43) के पिता मनोहर अपने बेटे के शव को देखकर खुद को संभाल नहीं पाए और भावुक हो गए। बूढ़े पिता के कांपते कंधे और आंसुओं से भरी आंखों को देख वहां मौजूद हर कोई आंखों से आंसू रोक न सका।
भावुक पिता ने कहा मैंने सपने में भी नहीं सोचा था कि इस बुढ़ापे में इन बूढ़े कंधों पर अपने जवान बेटे की अर्थी को कंधा देना पड़ेगा। बेटे की मौत की खबर सुनते ही पैरों तले से जमीन खिसक गई। एक पिता के लिए इससे बड़ा दुख क्या हो सकता है कि वह अपने ही बेटे की मौत देखें।
मनोहर ने बताया कि उनका बेटा अरुण दयालु और परोपकारी स्वभाव का था। बद्रीनाथ धाम की यात्रा पर जाने से पहले वह बेंगलुरु में अनाथ बच्चों के साथ अपना 43 वां जन्मदिन मना कर गया था। बेटे ने तब उनसे फोन पर कहा था कि पिताजी, हम लोगों को तो पूछने वाले बहुत हैं, लेकिन इन अनाथ बच्चों को कोई नहीं पूछता।
इनका इस दुनिया में कोई नहीं है, इसलिए अपना जन्मदिन इन बच्चों के साथ ही मनाऊंगा। पिता ने सिसकते हुए कहा कि कुदरत का कैसा खेल है, जिस बेटे ने अनाथ बच्चों के साथ जन्मदिन मनाया, आज वही बेटा खुद अपने दो बच्चों को अनाथ करके चला गया।
उन्होंने बताया कि अरुण का बड़ा बेटा कक्षा 9 और छोटी बेटी कक्षा दो में पढ़ती है। पिता ने बताया कि अरुण दशहरे के त्योहार पर अपने परिवार को गांव छोड़ने आया था। परिवार को गांव में छोड़ते हुए उसने कहा था पापा, मैं पहले बद्रीनाथ जी के दर्शन कर लौटूंगा, फिर परिवार को साथ लेकर बंगलुरु जाऊंगा।
लेकिन किसे पता था कि बद्रीनाथ की यह यात्रा उसकी जिंदगी की आखिरी यात्रा बन जाएगी। बद्रीनाथ दर्शन की बात कहते-कहते मनोहर की आंखों से आंसू छलक पड़े और एम्स की मोर्चरी के बाहर खड़े परिजनों की आंखें भी नम हो गईं।
काश, भाई की फोटो देखते ही बात कर लेता, तो आवाज हमेशा के लिए बंद न होती
बद्रीनाथ धाम की यात्रा पर गए बेंगलुरु, कर्नाटक निवासी प्रताप बच्चिहल्ली निंगराजन (41 वर्ष) के छोटे भाई वरुण अपने बड़े भाई को याद कर भावुक हो गए। भावुक होते हुए उन्होंने बताया कि काश जैसे ही भाई ने बद्रीनाथ की फोटो भेजी थी, वैसे ही बात कर लेता, तो आज उनकी अंतिम आवाज हमारे दिलों में हमेशा के लिए जिंदा रहती।
वरुण ने बताया कि उनके भाई की खुद की कंस्ट्रक्शन कंपनी है। कंपनी के ही कुछ दोस्तों ने बद्रीनाथ धाम जाने की योजना बनाई थी। सब अपने-अपने कामों में व्यस्त रहते हैं, इसलिए किसी ने भाई से यह भी नहीं पूछा कि वापस कब आओगे।
उन्होंने बताया कि 30 अक्टूबर से एक दिन पहले 29 अक्टूबर को भाई ने बद्रीनाथ धाम से अपनी एक फोटो भेजी थी। फोटो देखकर ही परिवार को पता चला कि भाई बद्रीनाथ घूमने गए हैं। फोटो देखकर मन में तसल्ली हुई कि चलो एक-दो दिन में घर वापस आ जाएंगे।
लेकिन किसे पता था कि घर वापसी की जगह अगले ही दिन उनकी मौत की मनहूस खबर आएगी। इतना कहते ही छोटा भाई वरुण भावुक हो गया।
पायलट हिमांशु ने दो साल पहले लिया था सेना से वीआरएस
बद्रीनाथ धाम में हुए हादसे में जान गंवाने वाले दिल्ली के पायलट हिमांशु सबरवाल 48 वर्ष का कनेक्शन ऋषिकेश से भी निकला है। हिमांशु हरिद्वार रोड स्थित आकाशगंगा के मालिक मदन गोपाल के दामाद के भाई थे।
मदन गोपाल ने बताया कि हिमांशु ने करीब 2 साल पहले ही आर्मी से वीआरएस ले लिया था। आर्मी में रहते हुए वह श्रीनगर में सीईओ के पद पर तैनात थे। सेना से वीआरएस लेने के बाद उन्होंने एक निजी एविएशन कंपनी ज्वाइन कर ली थी और उसमें पायलट के तौर पर सेवाएं दे रहे थे।
मदन ने बताया कि हिमांशु एक बेहद कुशल और अनुभवी पायलट थे। उन्होंने कहा कि यह बेहद दुखद हादसा है, किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। होनहार पायलट की असमय मौत से पूरे परिवार में मातम पसरा हुआ है।
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