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    जल्द बनेगा ऋषिकेश-नीलकंठ महादेव रोप-वे, जमीन की अड़चन हुई दूर; लंबे समय से उठती रही है मांग

    Updated: Mon, 30 Sep 2024 06:32 PM (IST)

    Rishikesh-Neelkanth Mahadev Ropeway सोमवार को ऋषिकेश विधायक व शहरी विकास मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल ने बताया कि ऋषिकेश-नीलकंठ महादेव रोप-वे परियोजना के निर्माण के लिए भूमि का चयन कर लिया गया है। इस भूमि को आवास विभाग के पक्ष में हस्तांतरण की स्वीकृति दे दी गई है। यह भूमि एक रुपये प्रति वार्षिक दर से 99 वर्ष के पट्टे पर दिये जाने के प्रस्ताव पर उन्होंने अनुमोदन किया है।

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    ऋषिकेश-नीलकंठ महादेव रोप-वे परियोजना निर्माण का रास्ता साफ (प्रतीकात्मक फोटो)

    जागरण संवाददाता, ऋषिकेश। प्रसिद्ध नीलकंठ महादेव के दर्शन के लिए महत्वाकांक्षी ऋषिकेश-नीलकंठ महादेव रोप-वे परियोजना में भूमि संबंधी बाधा अब दूर होती नजर आ रही है।

    प्रदेश सरकार ने इस परियोजना के लिए भूमि का चयन कर आवास विकास विभाग के पक्ष में भूमि हस्तांतरण की स्वीकृति प्रदान कर दी है। इससे परियोजना निर्माण का रास्ता साफ हो गया है।

    सोमवार को ऋषिकेश विधायक व शहरी विकास मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल ने बताया कि ऋषिकेश-नीलकंठ महादेव रोप-वे परियोजना के निर्माण के लिए ग्राम पुंडरासू उदयपुर तल्ला, तहसील-यमकेश्वर व ग्राम तोली, पट्टी उदयपुर तल्ला-एक, तहसील यमकेश्वर में भूमि का चयन किया गया है। इस भूमि को आवास विभाग के पक्ष में हस्तांतरण की स्वीकृति दे दी गई है।

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    कई वर्षों से थी इस परियोजना की जरूरत

    अग्रवाल ने बताया कि यह भूमि एक रुपये प्रति वार्षिक दर से 99 वर्ष के पट्टे पर दिये जाने के प्रस्ताव पर उन्होंने अनुमोदन किया है। कहा कि यह बहुप्रतीक्षित परियोजना है, जिसकी आवश्यकता कई वर्षों से महसूस की जा रही थी।

    कहा कि रोप-वे सुविधा मिलने से यातायात जाम व पर्यावरण प्रदूषण की समस्या से काफी हद तक निजात मिलेगी। इससे श्रद्धालुओं को सुविधाजनक आवागमन व समय बचेगा। रोप-वे से स्थानीय पर्यटन व स्वरोजगार को भी बढ़ावा मिलेगा।

    सावन में जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं 5 लाख से अधिक शिवभक्त

    बता दें कि पौड़ी जिले के यमकेश्वर ब्लाक में मणिकूट पर्वत की तलहटी पर स्थित नीलकंठ महादेव मंदिर का विशेष महत्व है। यहां हर वर्ष लाखों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। विशेषकर श्रावण मास में यहां पांच लाख से अधिक शिव भक्त जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं।

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