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'हरक सिंह ने मेरी जिंदगी बर्बाद कर दी, दुष्कर्म के बाद 10 पागलों संग रखा'... 23 साल बाद जेनी ने खोली जुबान

By Ashwani TripathiEdited By: Nirmala Bohra
Published: Sat, 07 Nov 2026 01:15 PM (IST)Updated: Sat, 07 Nov 2026 02:07 PM (IST)

जेनी ने पूर्व मंत्री डा. हरक सिंह रावत पर दुष्कर्म, यौन शोषण, मानसिक प्रताड़ना और जबरन हस्ताक्षर कराने जैसे गंभीर ...और पढ़ें

HighLights

  1. 23 साल पुराने जेनी दुष्कर्म प्रकरण में नया मोड़

राज्य ब्यूरो, जागरण, देहरादून। करीब 23 साल पुराने जेनी दुष्कर्म प्रकरण में शनिवार को नया मोड़ आ गया।

अब तक राजनीतिक बयानबाजी और बच्चे के पितृत्व की डीएनए जांच के सवालों के बीच घिरी रहीं जेनी ने पहली बार अपने साथ हुई कथित घटनाओं का सिलसिलेवार ब्योरा देते हुए पूर्व मंत्री डा. हरक सिंह रावत पर दुष्कर्म, यौन शोषण, मानसिक प्रताड़ना और जबरन हस्ताक्षर कराने जैसे गंभीर आरोप लगाए।

रोते हुए अपनी आपबीती सुनाने वाली जेनी ने दावा किया कि जब उनके साथ यह सब हुआ, तब उनकी उम्र महज 16 साल थी। उन्होंने कहा कि उनके साथ ऐसा शोषण हुआ, जैसा शायद किसी के साथ नहीं हुआ होगा।

पागलखाने में रखवाया

जेनी ने आरोप लगाया कि वह मॉडलिंग के लिए देहरादून आई थीं। काम नहीं मिलने पर एक एसटीडी बूथ पर काम करने लगीं। इसी दौरान एक कांग्रेस नेता ने उन्हें हरक सिंह रावत के घर पर काम दिलाया था।

जेनी के मुताबिक, हरक सिंह रावत ने उन्हें अपने घर पर ही रहने और वहीं काम करने के लिए कहा। इसके बाद उन्हें नौकरी के सिलसिले में कई जगह ले जाया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि इसी दौरान उनके साथ दुष्कर्म किया गया।

जेनी का दावा है कि जब उन्होंने अपने बच्चे को पिता का नाम देने की बात उठाई तो उनका शोषण जारी रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि दुष्कर्म के बाद उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया और पागलखाने में रखवा दिया गया। उन्हें दस पागलों के साथ रख दिया गया था, वहां उनसे जबरन हस्ताक्षर कराए गए।

उनका कहना है कि जब सीबीआई की टीम उनसे मिलने पहुंची, तब वह पूरी तरह मानसिक रूप से विक्षिप्त हो चुकी थीं। सीबीआई की टीम केवल एक बार उनसे मिलने आई थी। ऐसे में वह उस समय अपनी बात ठीक से नहीं रख पाईं।

बेटे को पिता का नाम चाहिए, 23 साल से बिना पिता के रह रहा

जेनी ने भावुक होते हुए कहा कि उनका बेटा 23 साल का हो चुका है और अब तक बिना पिता के रह रहा है। उन्होंने कहा कि बेटे को उसका नाम और पहचान मिलनी चाहिए। इसके लिए उन्होंने बेटे का दोबारा डीएनए टेस्ट कराने की मांग की। उनका आरोप है कि पहले हुई डीएनए जांच में गड़बड़ी हुई है। उन्होंने नार्को टेस्ट कराने की मांग भी उठाई।

जेनी ने कहा कि हरक सिंह रावत ने कभी उनके और उनके बेटे के खर्च की जिम्मेदारी नहीं उठाई। उन्होंने सवाल उठाया कि उनके बेटे के भविष्य और पहचान को लेकर अब तक किसी ने गंभीरता क्यों नहीं दिखाई।

उनका कहना है कि वह पहली बार देहरादून आई थीं तो उनके साथ दुष्कर्म हुआ, दूसरी बार बच्चे का जन्म प्रमाणपत्र लेने आईं और अब तीसरी बार अपने साथ हुए कथित अन्याय की आवाज उठाने पहुंची हैं।

महेंद्र भट्ट के डीएनए टेस्ट की मांग पर जताई नाराजगी

जेनी ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट के डीएनए टेस्ट को लेकर भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि वह महेंद्र भट्ट को जानती तक नहीं हैं। ऐसे में उनका डीएनए टेस्ट कराने की बात क्यों की जा रही है। उन्होंने कहा कि उनका सवाल महेंद्र भट्ट से नहीं, बल्कि अपने और अपने बेटे के साथ हुए कथित अन्याय को लेकर है।

जेनी ने यह भी कहा कि वह अब तक हरक सिंह रावत की पत्नी को देखकर चुप रही थीं। उन्होंने मुख्यमंत्री का धन्यवाद करते हुए कहा कि उन्होंने उनका मुद्दा उठाया और उनकी आवाज को सामने लाने का प्रयास किया।

डीजीपी से मिलीं, सुरक्षा और निष्पक्ष जांच की मांग

जेनी ने शनिवार को पुलिस महानिदेशक से मुलाकात कर अपना शिकायती पत्र सौंपा। उन्होंने अपने लिए पुलिस सुरक्षा की मांग की है। साथ ही पूरे मामले की दोबारा निष्पक्ष जांच कराने, बेटे का डीएनए टेस्ट कराने और नार्को टेस्ट कराने की मांग उठाई है।

जेनी के इन आरोपों के बाद 23 साल पुराने मामले में अब सिर्फ बच्चे के पितृत्व का सवाल नहीं रह गया है, बल्कि उस समय उनके साथ कथित तौर पर हुए यौन शोषण, मानसिक प्रताड़ना और जांच की प्रक्रिया को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

हालांकि, जेनी के शनिवार को लगाए गए नए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और उन पर संबंधित पक्ष का जवाब सामने आना बाकी है। वर्ष 2003 की सीबीआई जांच में डीएनए नमूनों का मिलान नहीं होने की बात सामने आई थी। ऐसे में नए आरोपों के बाद पुलिस और जांच एजेंसियों की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है।

क्या है 23 साल पुराना जेनी प्रकरण?

उत्तराखंड की राजनीति में जेनी प्रकरण वर्ष 2003 का सबसे चर्चित विवाद रहा है। इस मामले के केंद्र में असम से देहरादून आईं इंदिरा देवड़ी उर्फ जेनी थीं। यह मामला विधानसभा से सीबीआई जांच तक पहुंचा था। डीएनए रिपोर्ट के बाद हरक को राहत मिली थी। 

  • दिसंबर 2002 : जेनी के देहरादून आने का उल्लेख पुराने घटनाक्रम में मिलता है। वह यहां काम की तलाश में आई थीं।
  • 15 जून 2003 : जेनी ने देहरादून के सरकारी अस्पताल में एक बच्चे को जन्म दिया। उन्होंने तत्कालीन राजस्व मंत्री हरक सिंह रावत को बच्चे का पिता बताया।
  • 18 जून 2003 : मामला उत्तरांचल विधानसभा में गूंजा। विपक्ष ने इस प्रकरण को उठाकर सरकार को घेरा। विवाद बढ़ने के बाद हरक सिंह रावत ने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया।
  • जून-जुलाई 2003 : तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी ने मामले की सीबीआई जांच की संस्तुति की। सीबीआई ने 12 जुलाई को प्रारंभिक जांच शुरू की।
  • 25 जुलाई 2003 : सीबीआई ने जेनी के बयान के आधार पर हरक सिंह रावत के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 376 के तहत दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज किया। जेनी ने आरोप लगाया था कि नौकरी का आश्वासन देकर उनके साथ उनकी इच्छा के विरुद्ध शारीरिक संबंध बनाए गए।
  • डीएनए जांच : जांच के दौरान बच्चे और हरक सिंह रावत के डीएनए नमूने लिए गए। जांच में नमूनों का मिलान नहीं होने की बात सामने आई। इसके बाद हरक सिंह रावत को मामले में क्लीन चिट मिली।
  • 29 जुलाई 2016 : दिल्ली में हरक सिंह रावत के खिलाफ फिर एफआईआर दर्ज होने की खबर सामने आई। बाद में जेनी ने शिकायत वापस लेते हुए हरक को क्लीन चिट दी और राजनीतिक साजिश के आरोप लगाए। इसके बाद उनके खिलाफ भी कुछ धाराओं में मामला दर्ज होने की जानकारी सामने आई।
  • नवंबर 2026 : लगभग 23 साल बाद जेनी फिर सार्वजनिक रूप से सामने आईं। पहले उन्होंने सबूतों के साथ सच बताने की बात कही। अब उन्होंने हरक सिंह रावत पर दुष्कर्म, यौन शोषण और मानसिक प्रताड़ना के नए आरोप लगाते हुए दोबारा जांच, डीएनए और नार्को टेस्ट की मांग की है।

इस तरह 2003 में बच्चे के पितृत्व से शुरू हुआ विवाद अब जेनी के नए आरोपों के बाद कथित यौन शोषण, जांच की निष्पक्षता और 23 साल से बेटे की पहचान के सवाल तक पहुंच गया है।

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