Updated: Sun, 31 Aug 2025 05:14 AM (IST)
देहरादून में बिंदाल नदी के किनारे अवैध निर्माणों पर जल्द ही कार्रवाई होने की संभावना है। उच्च न्यायालय के निर्देशानुसार नगर निगम ने 310 निर्माणों को अवैध घोषित किया है और अब कोर्ट में विस्तृत रिपोर्ट पेश करेगा। मानसून के बाद इन अवैध निर्माणों पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू हो सकती है। मानवीय दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए वर्षा ऋतु में किसी भी परिवार को बेदखल नहीं किया जाएगा।
जागरण संवाददाता, देहरादून। बिंदाल नदी किनारे किए गए अवैध निर्माणों पर जल्द कार्रवाई तय की जा सकती है। उच्च न्यायालय के निर्देश के बाद निगम ने विस्तृत सर्वेक्षण कर 310 निर्माणों को अंतिम रूप से अवैध घोषित किया है। अब आठ सितंबर को निगम को कोर्ट में अतिक्रमित भूमि की विस्तृत रिपोर्ट उपलब्ध करानी है।
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जिसके बाद चिह्नित निर्माण पर अग्रिम कार्रवाई को लेकर तस्वीर साथ होगी। मानसून के बाद इन पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू होने के आसार हैं। इस मामले की सुनवाई बीते 25 अगस्त को उच्च न्यायालय में हुई थी। अदालत ने नगर निगम को बिंदाल नदी के किनारे अतिक्रमणों की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। निगम ने इसके लिए कुछ समय मांगा, जिस पर अदालत ने अब आठ सितंबर की तारीख तय की है।
इस दौरान निगम को अतिक्रमणों की प्रकृति, अतिक्रमित भूमि, निर्माण की अवधि, नदी भूमि की स्थिति और फ्लड प्लेन जोन की विस्तृत जानकारी के साथ रिपोर्ट तैयार करनी होगी। पूर्व में कोर्ट के आदेश पर नगर निगम की ओर से कराए गए विस्तृत सर्वेक्षण में बिंदाल नदी किनारे 864 निर्माण अवैध पाए गए थे। नोटिस जारी होने के बाद 620 आपत्तियां प्राप्त हुईं। जनसुनवाई के बाद इनमें से 310 निर्माणों को अंतिम रूप से अवैध घोषित किया गया है।
निगम अब इन पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई को लेकर कोर्ट के दिशा-निर्देशों का इंतजार कर रहा है। मानवीय दृष्टिकोण से मानसून में नहीं होगा ध्वस्तीकरण सहायक नगर आयुक्त वीपी चौहान ने बताया कि मानवीय दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए वर्षा ऋतु में किसी भी परिवार को बेदखल नहीं किया जाएगा।
सभी प्रभावित परिवारों को नोटिस जारी कर स्वयं स्थानांतरित होने की सलाह दी गई है। वर्ष 2016 के बाद हुए निर्माण अवैध उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार, वर्ष 2016 के बाद बिंदाल नदी किनारे किए गए निर्माणों को अवैध माना गया है।
वहीं, वर्ष 2016 से पूर्व की बस्तियों को सरकार द्वारा विशेष अध्यादेश के तहत वैधता प्रदान की जा चुकी है। राजपुर से मोथरोवाला नौका तक हुई सर्वे प्रक्रिया इन्हीं मानकों के आधार पर पूरी की गई है।
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