उत्तराखंड विधानसभा चुनाव से पहले, छात्रसंघों में जीत से जेन-जी से ABVP और सत्तापक्ष को मिली नई ऊर्जा
उत्तराखंड छात्रसंघ चुनावों में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने अधिकांश छात्रसंघों पर अपनी मजबूत पकड़ बनाई, जिससे सत्ताधारी भाजपा को नई ऊर्जा मिली है।
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राज्य ब्यूरो, जागरण, देहरादून। उत्तराखंड में छात्रसंघ चुनावों में जेन-जी के रुझान ने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) का मनोबल तो बढ़ाया ही, सत्ताधारी दल भाजपा को भी नई ऊर्जा दी है। युवाओं खासतौर पर नवयुवाओं पर सत्ताधारी संगठन की पकड़ बनी हुई है।
चंद महीनों बाद होने जा रहे अगले विधानसभा चुनाव से ठीक पहले युवाओं ने छात्रसंघों के माध्यम से जिस तरह अपनी पसंद-नापसंद सामने रखी है, उसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
एबीवीपी और समर्थित प्रत्याशियों ने प्रदेशभर में एक बार फिर वर्चस्व साबित करते हुए अध्यक्ष एवं महासचिव-सचिव के अधिकतर पदों पर कब्जा जमाया है। वहीं कांग्रेस की छात्र इकाई एनएसयूआइ ने अपनी स्थिति में सुधार तो किया, लेकिन विद्यार्थी परिषद का दबदबा तोड़ नहीं सकी है।
अगले विधानसभा चुनाव के दृष्टिगत नैरेटिव वार में युवाओं की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है। यही कारण है कि तमाम राजनीतिक दल युवाशक्ति को लुभाने के लिए ताकत झोंके हुए हैं।
युवाओं में एंटी इनकंबेंसी को उभारने के विपक्ष के प्रयासों को छात्रसंघ चुनाव ने आईना तो दिखाया ही, साथ में इन चुनाव परिणामों ने यह भी जता दिया है कि युवा अब अपनी दृष्टि और दृष्टिकोण के आधार पर फैसला ले रहे हैं।
एबीवीपी के विरुद्ध सत्ताविरोधी रुझान के एजेंडे को भी इन चुनाव परिणाम ने झटका दिया है। छात्रसंख्या की दृष्टि से प्रदेश के सबसे बड़े पीजी कालेज डीएवी में अध्यक्ष पद पर एबीवीपी ने लगातार दूसरी बार कब्जा बरकरार रखा है तो अंतरिम राजधानी के अधिकतर छात्रसंघों पर अपनी पकड़ मजबूत की है।
राज्य के विभिन्न जिलों और उनके मुख्यालयों में एबीवीपी ने जीत का परचम लहराया है। इस जीत में छात्रों के साथ छात्राओं की बड़ी भागीदारी रही है। भाजपा ने 85 प्रतिशत छात्रसंघों पर जीत का दावा किया है।
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उधर, कांग्रेस की इन चुनावों में अधिकतर सीट पर कब्जा जमाने की चाह और उम्मीद, भले ही अधूरी रह गई, लेकिन पार्टी की छात्र इकाई एनएसयूआइ ने अपने प्रदर्शन में सुधार किया है।
इस बार निर्दलीयों को मिली अपेक्षाकृत अधिक सफलता को लेकर राजनीतिक दलों और उनके छात्र संगठनों की ओर से अपने-अपने दावे किए जा रहे हैं।
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