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    Uttarakhand News: भगोड़े बिल्डर दीपक को जारी नहीं हुआ रेड कॉर्नर नोटिस, ब्लू कॉर्नर पर इतिश्री

    Updated: Fri, 23 May 2025 11:16 AM (IST)

    भगोड़े बिल्डर दीपक मित्तल जो 45 करोड़ रुपये लेकर फरार हैं के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी नहीं हुआ है बल्कि ब्लू कॉर्नर नोटिस जारी किया गया है। पुलिस के अनुसार दीपक मित्तल का पहले दुबई में पता चला था लेकिन बाद में वह वहां भी नहीं मिला। उस पर गैंगस्टर एक्ट भी लगाया गया था लेकिन वह अभी तक गिरफ्तार नहीं हो सका है।

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    भगोड़े बिल्डर दीपक को जारी नहीं हुआ रेड कार्नर नोटिस, ब्लू कार्नर पर इतिश्री

    सुमन सेमवाल, देहरादून। पुष्पांजलि इंफ्राटेक की अधर में लटकी आर्किड पार्क (फेज-1 और 2) में फ्लैट बुक कराने वाले व्यक्तियों के 45 करोड़ रुपये लेकर फरार हो चुके बिल्डर दीपक मित्तल के देहरादून आने की चर्चा लंबे समय से चल रही है। 

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    यह बात और है कि तमाम व्यक्तियों से उसकी मुलाकात की चर्चा के बाद भी पुलिस दीपक की दून में उपस्थिति नकारती रही है। पुलिस ने दावा भी किया कि दीपक मित्तल के विरुद्ध रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया हुआ है और ऐसे में अंतरराष्ट्रीय सीमा पार कर उसका भारत या उत्तराखंड आना संभव नहीं है। अब पुलिस के इस दावे की पोल खुल गई है। 

    दरअसल, जिस रेड कॉर्नर नोटिस की बात पुलिस कर रही है, वह कभी दीपक मित्तल को जारी ही नहीं हुआ। दीपक मित्तल का रेड कॉर्नर नोटिस पहले ही चरण में डाउनग्रेड (निम्नीकृत) होकर ब्लू कॉर्नर में तब्दील हो गया था।

    हालांकि, यह सच है कि वर्ष 2023 के आखिर में पुलिस ने पुष्पांजलि इंफ्राटेक के भगोड़े निदेशक दीपक मित्तल के विरुद्ध रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने की कवायद करते हुए सीबीआई के माध्यम से इंटरपोल को रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने का आग्रह भिजवाया गया था। 

    रेड कॉर्नर के लिए आरोपी के ठिकाने के कॉर्डिनेट्स की जानकारी होनी आवश्यक है। तब यह पता चला था कि दीपक मित्तल और उसकी पत्नी राखी मित्तल दुबई के अलमासा में रह रहे हैं। क्योंकि, जब विदेश मंत्रालय ने उसका पासपोर्ट रद किया था, तब उसने पासपोर्ट को बचाने की अर्जी में यही पता लिखवाया था।

    हालांकि, बाद में दीपक इस पते पर भी नहीं पाया गया। लिहाजा, रेड कॉर्नर नोटिस की जगह ब्लू कॉर्नर नोटिस जारी किया गया। इस नोटिस के माध्यम से सिर्फ आरोपी या अपराधी के पते/कॉर्डिनेट्स की खोजबीन की जा सकती है। इसमें रेड कॉर्नर नोटिस की तरह आसानी से गिरफ्तारी संभव नहीं हो पाती है। 

    ऐसे में अब इस बात से इन्कार नहीं किया जा सकता है कि दीपक मित्तल देहरादून न आया हो। बेशक रेड कॉर्नर नोटिस में ऐसा कर पाना आसान नहीं होता, लेकिन ब्लू कॉर्नर में ऐसा किया जा सकता है।

    गैंगस्टर के बाद खोज रही थी पुलिस, साहब से मिलकर चला गया मित्तल

    जब भगोड़े बिल्डर पर पुलिस ने गैंगस्टर एक्ट लगाया था, तब उसकी गिरफ्तारी के लिए भी प्रयास तेज किए गए थे। उसी दौरान यह बात सामने आई कि दीपक मित्तल पुलिस विभाग के बड़े अफसर से मिलकर गया है। 

    अगले दिन एक शिकायतकर्ता दौड़े-दौड़े बड़े साहब के पास पहुंचे तो उन्होंने तपाक से जवाब दे दिया कि वह तो फरार है। बताया जा रहा है कि बड़े साहब ने मित्तल की परियोजना में मोटा पैसा लगाया था और अपने एक अधीनस्थ को भी निवेश के लिए तैयार किया था। 

    कहा यह भी जा रहा है कि गिरफ्तारी से बचाने की एवज में साहब की रकम लौटा दी गई है, लेकिन अधीनस्थ की रकम का क्या हुआ, कुछ नहीं पता।

    मित्तल का मूल पासपोर्ट निरस्त, दूसरे देश का पासपोर्ट होना संभव

    बिल्डर दीपक मंत्रालय की फरारी के बाद उस पर विदेश मंत्रालय ने भी कार्रवाई की है। उसका मूल पासपोर्ट अब निरस्त कर दिया गया है। पहले पासपोर्ट पर सिर्फ रोक लगाई गई थी। 

    ऐसे में इस बात की भी प्रबल आशंका व्यक्त की जा रही है कि मित्तल के पास दूसरे देश की नागरिकता हो सकती है और वह नाम में कुछ परिवर्तन कर वहां के पासपोर्ट पर भारत आया हो। मित्तल के वाया नेपाल सड़क मार्ग से उत्तराखंड में प्रवेश किए जाने की चर्चा को भी बल मिल रहा है।

    पुष्पांजलि इंफ्राटेक से जुड़ी अहम बातें

    • बिल्डर दीपक मित्तल और उसकी पत्नी राखी मित्तल वर्ष 2020 से ही फरार हैं।
    • परियोजनाओं का निर्माण वर्ष 2018 से ही बंद चल रहा है और खरीदारों के करीब 45 करोड़ रुपये फंस गए हैं।
    • बिल्डर पर कुल नौ मुकदमे दर्ज हैं और 64 से अधिक शिकायतें रेरा में की गई हैं।
    • पुष्पांजलि की आर्किड पार्क (फेज एक व दो) समेत एमिनेंट हाइट्स परियोजना के 90 के करीब फ्लैट खरीदार कब्जे के लिए भटक रहे हैं।

    परियोजना के निर्माण के लिए पीएनबी की इंदिरा नगर शाखा से लिया गया 21 करोड़ रुपये का ऋण एनपीए घोषित हो चुका है, हालांकि, खरीदारों के हित को देखते हुए सरफेसी एक्ट के तहत नीलामी पर रेरा की रोक है।

    प्रकरण में मनी लांड्रिंग को देखते हुए ईडी मार्च 2022 में परियोजना व निदेशकों के फ्लैट अटैच कर चुका है।

    फ्लैट खरीदारों ने एनसीएलटी का रुख किया है, जिसके माध्यम से अन्य बिल्डर ने अधूरी परियोजना को पूरा करने की प्रक्रिया गतिमान है।

    क्यों जारी होता है रेड कॉर्नर नोटिस

    रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने के लिए आरोपी के ठिकाने के कॉर्डिनेट्स की जानकारी होना आवश्यक है। यह नोटिस जारी होने के बाद अपराधी की गिरफ्तारी संभव हो जाती है, जबकि ब्लू कॉर्नर नोटिस के माध्यम से आरोपी या अपराधी के पते या कॉर्डिनेट्स की खोजबीन की जा सकती है। इसमें रेड कॉर्नर नोटिस की तरह आसानी से गिरफ्तारी संभव नहीं हो पाती है।