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    उत्तराखंड: परिवहन विभाग को 47 फीसद राजस्व घाटा, टैक्स का हुआ सबसे ज्यादा नुकसान

    By Raksha PanthariEdited By:
    Updated: Sun, 18 Oct 2020 07:47 AM (IST)

    परिवहन विभाग को इस वर्ष सितंबर तक बीते वर्ष की तुलना में 47.16 फीसद राजस्व का नुकसान हुआ है। इसमें भी विभाग को सबसे अधिक नुकसान टैक्स का हुआ है। कारण यह कि कोरोना के कारण प्रदेश सरकार ने वाहनों के टैक्स में सितंबर तक की छूट दी है।

    परिवहन विभाग को 47 फीसद राजस्व घाटा।

    देहरादून, राज्य ब्यूरो। परिवहन विभाग को इस वर्ष सितंबर तक बीते वर्ष की तुलना में 47.16 फीसद राजस्व का नुकसान हुआ है। इसमें भी विभाग को सबसे अधिक नुकसान टैक्स का हुआ है। कारण यह कि कोरोना के कारण प्रदेश सरकार ने वाहनों के टैक्स में सितंबर तक की छूट दी है। इसके अलावा वाहनों की बिक्री से मिलने वाला राजस्व भी प्रभावित हुआ है। 

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    परिवहन विभाग को टैक्स, रजिस्ट्रेशन, वाहनों के रजिस्ट्रेशन, रिन्युअल, लाइसेंस फीस और ग्रीन सेस आदि से राजस्व मिलता है। इस राजस्व से कर्मचारियों का वेतन देने के साथ ही सड़क सुरक्षा कार्य भी कराए जाते हैं। इस वर्ष विभाग के राजस्व की स्थति बहुत अच्छी नहीं है। दरअसल, कोरोना के कारण लगे लॉकडाउन के बाद परिवहन विभाग का काम भी बुरी तरह प्रभावित हुआ। जून अंत में जब विभाग खुलने शुरू हुए तो भी परिवहन विभाग में बहुत कम काम हुआ। अब जब सारी चीजें खुल चुकी हैं तो परिवहन विभाग ने अभी तक के राजस्व का डाटा निकाला। 

    इसमें यह बात सामने आई कि विभाग को बीते वर्ष सितंबर और इस वर्ष सितंबर तक मिले राजस्व में तकरीबन 200 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। इसमें सबसे अधिक 117 करोड़ रुपये का नुकसान विभिन्न वाहनों से मिलने वाले टैक्स से हुआ है। कोरोनाकाल के दौरान वाहनों का संचालन बहुत कम हुआ। ऐसे में व्यावसायिक वाहन चालकों की आॢथक हालात को देखते हुए सरकार ने टैक्स माफ कर दिया है।

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    इसके अलावा विभाग को विभिन्न माध्यमों से मिलने वाली फीस में 36 करोड़ और ड्राइविंग लाइसेंस से मिलने वाली फीस में भी 10 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। वहीं विभाग का मानना है कि धीरे-धीरे यह अंतर कम हो जाएगा।उप आयुक्त परिवहन एसके सिंह का कहना है कि अब विभाग में सारा काम शुरू हो चुका है। वाहनों की बिक्री शुरू हो चुकी है, वाहनों के रजिस्ट्रेशन हो रहे हैं। लाइसेंस बनने शुरू हो चुके हैं। ऐसे में विभाग का राजस्व बढ़ना तय है।

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