राज्य ब्यूरो, देहरादून। Vatsalya Yojna कोरोना महामारी व अन्य बीमारियों के कारण माता-पिता और संरक्षक खो चुके बच्चों को 'वात्सल्य' मिला है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ऐसे बच्चों को संरक्षण प्रदान करने के मकसद से सोमवार को मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना लांच की। इस मौके पर 1062 बच्चों को जुलाई माह की तीन-तीन हजार रुपये की आर्थिक सहायता डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के जरिये बैंक खातों में हस्तांतरित की गई। योजना के तहत ऐसे बच्चों को 21 वर्ष की आयु तक हर माह तीन हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने के साथ ही उनकी शिक्षा, पोषण व संरक्षण का भी प्रविधान किया गया है। वर्तमान में ऐेसे 2347 बच्चे चिह्नित किए गए हैं।

मुख्यमंत्री आवास के जनता दर्शन हाल में आयोजित कार्यक्रम में यह योजना लांच करते हुए मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि कोरोनाकाल में जिन बच्चों ने माता-पिता व संरक्षक को खोया है, उनकी भरपाई मुमकिन नहीं है। अलबत्ता, प्रदेश सरकार ऐसे बच्चों का अभिभावक की तरह हमेशा ख्याल रखेगी। जिलों में डीएम इनके सह अभिभावक के रूप में काम करेंगे। अनाथ बच्चों के लिए सरकारी नौकरियों में पांच फीसद क्षैतिज आरक्षण की व्यवस्था की गई है और ऐसा करने करने वाला उत्तराखंड देश का पहला राज्य है। सरकार इन बच्चों के कौशल विकास पर भी ध्यान देगी।

महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्य ने कहा कि यह योजना सरकार के मानवीय चेहरे को प्रदर्शित करती है। यह योजना अपने माता-पिता को खोने वाले बच्चों को सामाजिक, आर्थिक व मानसिक तौर पर सशक्त करेगी। कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी की अध्यक्षता में हुए कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने इंटर की परीक्षा में प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण बालिका निकेतन की दो बालिकाओं तारा व स्मृति को सम्मानित किया। इन बालिकाओं ने भी मुख्यमंत्री और अतिथियों को स्वनिर्मित पेंटिंग भेंट की। विधानसभा अध्यक्ष प्र्रेमचंद अग्रवाल, पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, विधायक मुन्ना सिंह चौहान, सहदेव पुंडीर, रामसिंह कैड़ा, दीवान सिंह बिष्ट आदि कार्यक्रम से वर्चुअली जुड़े।

यह भी पढ़ें- Vatsalya Yojna: दून में 123 बच्चों को मिलेगा वात्सल्य का लाभ, जानें- कौन कर सकता है योजना के लिए आवेदन 

Edited By: Raksha Panthri