ऋषिकेश, जेएनएन। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ऋषिकेश के न्यूरोलॉजी विभाग ने लगातार बढ़ रहे ब्रेन स्ट्रोक के मामलों को देखते हुए एडवाइजरी जारी की है। विशेषज्ञों का मानना है कि सही खानपान और तनावमुक्त जीवनशैली अपनाकर ब्रेन स्ट्रोक के खतरे से बचा जा सकता है। एम्स के न्यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो. नीरज कुमार ने बताया कि बोलने पर यदि चेहरा अचानक एक तरफ झुक जाए या आपके शारीरिक अंगों में अचानक कमजोरी महसूस होने लगे तो यह लक्षण ब्रेन स्ट्रोक के हो सकते हैं। इन हालातों में आप कभी भी लकवा का शिकार हो सकते हैं।

इंडियन काउंसिल फॉर मेडिकल रिसर्च का हवाला देते हुए प्रो. नीरज ने बताया कि भारत में हर तीन सेकंड में एक व्यक्ति को ब्रेन स्ट्रोक होता है, जबकि प्रत्येक चार मिनट में ब्रेन स्ट्रोक के कारण एक मरीज की मौत हो जाती है। इस बीमारी की तत्काल पहचान आवश्यक है क्योंकि ब्रेन स्ट्रोक के प्रत्येक मरीज में सेकेंड दर सेकेंड मस्तिष्क आघात का खतरा बढ़ जाता है और उससे मस्तिष्क को ज्यादा क्षति होने की संभावना रहती है। प्रो. नीरज ने बताया कि कुछ समय पहले तक इस बीमारी की चपेट में ज्यादातर बुजुर्ग लोग आते थे, लेकिन अब अनियंत्रित मधुमेह, उच्च रक्तचाप, अत्यधिक धूमपान और नशीली दवाओं के सेवन, मोटापे और हृदय संबंधी समस्याओं की वजह से युवा भी इसकी चपेट में आ रहे हैं।
समझें, क्या है स्ट्रोक 
स्ट्रोक, जिसे मस्तिष्क का दौरा भी कहा जाता है, यह मस्तिष्क में रक्त संचार की आपूर्ति में अचानक रुकावट होने के कारण होता है। मस्तिष्क पर्याप्त रक्त की आपूर्ति के बिना कुछ सेकंड से अधिक समय तक अपनी कार्य क्षमता बनाए रखने में असमर्थ होता है। जिसके परिणामस्वरूप मस्तिष्क की कोशिकाओं की मृत्यु हो जाती है। इस बीमारी का निदान और शरीर में आने वाली विकलांगता का स्तर, स्ट्रोक के प्रकार, प्रभावित मस्तिष्क के हिस्से और क्षतिग्रस्त क्षेत्र के आकार के अनुसार अलग-अलग होता है। ब्रेन स्ट्रोक सामान्य प्रकार के मस्तिष्क में रक्त की आपूर्ति करने वाली धमनियों की रुकावट से होता है। स्ट्रोक में धमनियों के टूटने के कारण मस्तिष्क के अंदर रक्तस्त्राव भी हो सकता है, यह दोनों मामले अति गंभीर हैं।
सावधानियां और बचाव के उपाय जरूरी 
डॉ. नीरज कुमार ने बताया कि स्ट्रोक पर नियंत्रण के लिए जरूरी है आप स्वस्थ आहार लें। नियमित व्यायाम करें और धूमपान और अन्य व्यसनों से दूर रहें और तनावमुक्त जीवनशैली अपनाएं। इस बीमारी से बचाव के लिए मधुमेह, उच्च रक्तचाप और अन्य लक्षणों वाले व्यक्ति की नियमित चिकित्सा जांच और उन लक्षणों पर पर्याप्त नियंत्रण इस बीमारी को रोकने में सहायक होता है।
एम्स में जल्द खुलेगा तंत्रिका विज्ञान केंद्र 
एम्स निदेशक पद्मश्री प्रो. रवि कांत ने बताया कि ब्रेन स्ट्रोक के मरीजों के उपचार के लिए ऋषिकेश एम्स में आधुनिक सुविधाओं से युक्त ब्रेन स्ट्रोक यूनिट स्थापित है। उन्होंने बताया कि धमनियों की रुकावट की वजह से होने वाले स्ट्रोक के उपचार के लिए पहले चार से पांच घंटे अति महत्वपूर्ण होते हैं। यदि इस समयावधि के भीतर रोगी अस्पताल पहुंच जाता है तो इलाज के दौरान मस्तिष्क में जमा रक्त के थक्के-फोड़ने (थ्रोम्बोलाइटिक) वाली दवाओं का उपयोग किया जाता है। उन्होंने बताया कि एम्स में एक वृहद स्तर तंत्रिका विज्ञान केंद्र स्थापित करने की योजना पर भी कार्य चल रहा है।

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