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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 19, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

व्यक्तिगत स्वच्छता से ही बनता है स्वच्छ समाज

By JagranEdited By:
Published: Tue, 19 Sep 2017 07:16 PM (IST)

संवाद सहयोगी, विकासनगर: सरकारी विद्यालयों में मनाए जा रहे स्वच्छता पखवाड़े के तहत मंगलवार को हाई स्कू

व्यक्तिगत स्वच्छता से ही बनता है स्वच्छ समाज
व्यक्तिगत स्वच्छता से ही बनता है स्वच्छ समाज

संवाद सहयोगी, विकासनगर: सरकारी विद्यालयों में मनाए जा रहे स्वच्छता पखवाड़े के तहत मंगलवार को हाई स्कूल बिरसनी में छात्र-छात्राओं को शरीर को स्वच्छ रखने की जानकारी दी गई। जबकि छात्र-छात्राओं ने विद्यालय परिसर व सेवित बस्ती में स्वच्छता अभियान चलाया। विद्यालय के प्रधानाचार्य बाबूराम सरन ने कहा कि व्यक्तिगत स्वच्छता से ही स्वच्छ समाज का निर्माण होता है। स्वच्छ समाज में सामाजिक विकृतियां पैदा नहीं होती, जिससे समाज का स्वस्थ विकास होता है। छात्र-छात्राओं को शरीर की स्वच्छता बनाए रखने की जानकारी देते हुए कहा हमारी सेहत को बेहतर बनाए रखना बेहद आसान है बशर्ते हम शरीर की आवश्यकताओं को बेहतर तरीके से समझ पाएं और हमारे परिवेश को स्वच्छ रखने की कोशिश करें। आमतौर पर बाजार में सेहत दुरुस्ती के लिए मिलने वाली दवाएं हमारे लक्षणों को ठीक करती हैं, रोगकारकों को नहीं।

प्रधानाचार्य ने बताया कि रोगकारकों को ठीक करने का सबसे बड़ा जिम्मा किसी डॉक्टर या वैद्य के पास नहीं बल्कि हमारे पास है। हमारा शरीर स्वस्थ रहेगा, हमारा परिवेश साफ सुधरा रहेगा तो रोगकारक हमसे दूर रहेंगे, शरीर की अस्वच्छता और हमारे आस-पड़ोस की गंदगी रोगकारकों का एटीएम है। नाखूनों को समय-समय पर काटकर उनकी साफ सफाई का खास ख्याल रखें। नाखूनों के भीतर सूक्ष्म कीटाणुओं का वास होता है, भोजन ग्रहण करने के दौरान नाखूनों में बसे सूक्ष्म कीटाणु हमारे शरीर के भीतर पहुंच जाते हैं और संक्रामक रोगों को जन्म देते हैं। छात्र-छात्राओं ने सेवित बस्ती में स्वच्छता अभियान चलाकर ग्रामीणों को जागरूक किया। इस दौरान मंसाराम सती, रमेश रावत, प्रकाश बिष्ट, विपिन कुमार, पायल, शिवानी, आंचल, गौरव, रोहित, आशीष आदि मौजूद रहे।