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चमोली हेलीकॉप्टर दुर्घटना: 24 घंटे बाद पहुंची रेस्क्यू टीम, चांई गांव के रास्ते लाए जा रहे शव

Published: Sun, 01 Nov 2026 09:54 AM (IST)

हेलीकॉप्टर दुर्घटना के 24 घंटे बाद बचाव दल घटनास्थल पर पहुंचा, जहां दुर्गम रास्ते के कारण शवों को लाने का मार्ग बदलना पड़ा।

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संवाद सहयोगी, गोपेश्वर। बदरीनाथ में हेलीकाप्टर हादसे में जान गंवाने वाले पायलट और पांच यात्रियों के शव शनिवार को बरामद कर लिए गए। सभी शव क्षत-विक्षत हैं। शवों को ज्योतिर्मठ के रास्ते ऋषिकेश लाया जा रहा है। दुर्गम रास्ते के कारण सेना, आइटीबीपी, एसडीआरएफ, जिला प्रशासन, पुलिस, एनडीआरएफ और वन विभाग की टीमें 24 घंटे बाद दुर्घटनास्थल पर पहुंच पाईं।

नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) और विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो की टीम ने भी घटनास्थल का हवाई निरीक्षण किया। टीम ने बदरीनाथ जाकर हेलीपैड की जांच कर कर्मचारियों के बयान भी लिए हैं। शुक्रवार को चमोली के पांडुकेश्वर में बदरीनाथ धाम से देहरादून लौट रहा हेलीकाप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। दुर्घटना में दिल्ली निवासी पायलट व कर्नाटक के सभी पांच यात्रियों की मौत हो गई थी। 

दुर्घटना के बाद आईटीबीपी, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पुलिस की टीम पांडुकेश्वर से मौके के लिए भेजी गई थी, लेकिन रात होने के चलते व पांडुकेश्वर के जंगलों में भालू की मौजूदगी से टीम वापस लौट आई थी। शनिवार पांच बजे टीमें घटनास्थल पर रवाना हु़ई।

टीम को पड़ी कड़ी मशक्कत करनी

बताया गया कि दुर्गम रास्ते में नाला पार करने में टीम को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी इस दौरान घटना स्थल तक पहुंचने के लिए रस्सियों के सहारे उतरना पड़ा। यही नहीं 100 मीटर क्षेत्र में पगडंडी भी खोदनी पड़ी रेस्क्यू टीम लगभग एक बजे मौके पर पहुंची तब तक सेना सिंगनल कौर के जवान पहले से मौके पर मौजूद थे।

बताया गया कि रेस्क्यू टीम ने मौके पर शवों को कब्जे में लेकर वापस पांडुकेश्वर लाने की रणनीति बनाई, लेकिन पांडुकेश्वर के रास्ते से शव का रेस्क्यू किया जाना खतरनाक होने के चलते चांई के रास्ते का विकल्प चुना गया। सेना आईटीबीपी के साथ एसडीआरएफ ने पांचों शवों को रेस्क्यू कर जोशीमठ लाया जा रहा है।

एक शव चांई गांव पहुंच चुका है जबकि रेस्क्यू टीम अभी रास्ते में है। आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदकिशोर जोशी ने बताया कि शवों को ज्योतिर्मठ से ऋषिकेश एम्स भेजा जाएगा। जहां शवों का पोस्टमार्टम कराए जाने पर विचार चल रहा है। मृतकों के परिजन देहरादून पहुंच चुके हैं। ऐसे में उन्हें ऋषिकेश ही रुकने को कहा गया है।

जिलाधिकारी गौरव कुमार ने कहा कि शवों का रेस्क्यू कर जोशीमठ लाया जा रहा है कहा कि पांडुकेश्वर के रास्ते शवों को लाने के लिए सुरक्षित मार्ग उपलब्ध नहीं था। लिहाजा चांई गांव के जंगलों से शवों को लाया गया है। कहा कि शव पूरी तरह से क्षत विक्षत हैं।

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