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    Uttarakhand Cloudburst: उत्‍तराखंड के चमोली में फटा बादल, दंपती की मौत और कई घायल

    Updated: Fri, 29 Aug 2025 12:31 PM (IST)

    चमोली के देवाल के मोपाटा में बादल फटने से एक दंपती की मृत्यु हो गई और दो लोग घायल हो गए। बादल फटने से कई घर और गोशाला मलबे में दब गए जिसमें 15-20 जानवरों के दबे होने की आशंका है। प्रशासन डीडीआरएफ और स्वास्थ्य विभाग की टीमें मौके पर पहुंचकर राहत और बचाव कार्य में जुटी हैं। बारिश के कारण बाधित सड़कों को खोलने का कार्य भी जारी है।

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    आवास के साथ गोशाला भी मलबे में दब गई। File

    संवाद सूत्र, जागरण देवाल। चमोली सीमांत जनपद चमोली के कुमाऊं सीमा से लगे देवाल विकासखंड में गुरूवार रात बारह बजे बाद अतिवृष्टि के चलते पहाड़ी से आए मलबे में दो मकान मलबे में दब गए जिससे खेती और पशुपालन व्यवसाय करने वाली दंपत्ति पति-पत्नी की मौत हो गई।

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    गुरूवार मध्य रात्रि तेज बारिश और आसमानी बिजली चमकने के बाद पहाड़ी से आए सैलाब की भनक जब तक समीप के ग्रामीण सो रहे पति-पत्नी को दे सकते तब तक देर हो चुकी थी। मलबे में दबने से हुई मौत की खबर ग्रामीणों द्वारा प्रशासन को दी गई लेकिन थराली-देवाल-खेता मोटर मार्ग के बनातोक और बोरागाड में मलबा आने से बंद होने से शुक्रवार सुबह दस बजे बाद एसढीआरएफ और प्रशासन की टीम घटनास्थल पर पहुंची लेकिन ग्रामीणों द्वारा खोजबीन कर शवों को सुबह नौ बजे क्षतिग्रस्त आवासीय भवन में दबे मलबे से दोनों शवों को निकाल लिया था।

    देवाल के मोपाटा गांव के टनवा तोक में साढ़े बारह बजे रात्रि बादल फटने से दो मकान जमींदोज होने से उसमें रहे दो लोग मलबे में दब कर मौत हो गई। जबकि इससे लगे अन्य मकान में बंधे 22 से अधिक पालतू जानवर मकान सहित दफन हो गए हैं।

    घटना की सूचना पर समीप रहने वाले दो परिवारों ने खोजबीन की जिससे दो लोगों की अफरा तफरी में सर पर चोट पहुंची जिनका प्राथमिक उपचार किया जा रहा है। सड़क जगह जगह बंद होने से पुलिस प्रशासन , डीडीआरएफ व बचाव राहत की टीम शुक्रवार दस बजे बाद मौके पर पहुंची तब राहत व बचाव कार्य से शुरू हुए। दोनों मृतको का पोस्टमार्टम गांव में कर शवों को परिजनों को सौंप दिए गए हैं।

    ग्रामीण कमल सिह कहते है बरसात पिंडर घाटी में कहर बन कर आई है। थराली चेपडो गांव के बाद मोपाटा के टनवा तोक में गुरुवार की रात्रि को फटे बादलों से एक परिवार पूरी तरह तबाह हो गया। मकान के करीब 100 मीटर ऊपर से आए भूस्खलन के मलबे के साथ पेड़ पौधे बड़ी मात्रा बोल्डर नीचे मकान में आ गया मकान रह रहे मोपाटा निवासी तारा सिंह कुंवर 58 वर्ष पुत्र भगवान सिंह व उनकी धर्म पत्नी कमला देवी 52 वर्ष इस हादसे में दब कर लापता हो गए।

    रात में खोजबीन बारिश और अंधेरा होने से नही हो सका और सुबह जब ग्रामीणों ने ढूंढ खोज कि तो मकान के आंगन में मलबे में दबे शव मिले । मकान में बंधे दो बैल,एक भैस, दो गाय,दो कुत्ते, 15 बकरियां सहित दो मकान मलबे दफन हो गई है। गांव के विरेन्द्र सिंह व उनकी पत्नी दुर्गा देवी को भगदड़ में रात्रि सर पर चोट आने से घायल है। उनकी गौशाला भी क्षतिग्रस्त हो गई ।

    ग्रामीण कलम सिंह कहते है भूस्खलन की भनक लगते ही उन्होंने मोबाइल से उन्होंने समीप रहने वालों को सूचना दी। घटना की सूचना प्रधान रूपचन्द्र सिंह व काम सिंह ने शासन प्रशासन को दी। लगातार हो रही बारिश से थराली -देवाल - खेता मोटर मार्ग बनाडोन से आगे , बोरागाड सड़क पर मलबा आने से दस बजे तक बंद रहने से पुलिस प्रशासन व राहत बचाव की टीम उसके बाद घटना स्थल पर पहुंचे और जानकारी ली।

    क्षेत्र प्रमुख तेजपाल रावत ने मौके पर पहुंच कर पीड़ित परिवारों का हालचाल जाना और प्रदेश सरकार से 50 लाख पीड़ित परिवार को सहायता देने की मांग की है। वहीं मुख्यमंत्री के कोऑर्डिनेटर दलबीर दानू, छात्र नेता दयाल सिंह भाजपा महामंत्री नरेश सिंह बागड़ी, क्षेत्र पंचायत सदस्य उर्बी जोशी, तहसील दार अक्षय पंकज आदि ने दैविक आपदा के पीड़ितों से मुलाकात कर हर सम्भव सहायता का आश्वासन दिया।

    उप जिलाधिकारी थराली पंकज भट्ट ने कहा दो लोग जो लापता हुए थे उनके शव मिल गए हैं। दोनों मृतकों का पोस्टमार्टम गांव में पंचनामा भर कर किया गया है। बचाव राहत कार्य युद्ध स्तर पर चलाया जा रहा है।

    घायल दुर्गा देवी को देवाल एयरलिफ्ट किया जाएगा

    देवाल मोपाटा में गुरूवार आई आपदा में गांव में रहने वाले पति-पत्नी की मौत के दौरान मची अफरा-तफरी में गांव की दुर्गा देवी और उनके पति विक्रम सिह घायल हो गए थे। घायल विक्रम सिह को सामान्य चोट आई जबकि दुर्गा देवी को प्राथमिक उपचार प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में करने के बाद हायर सेंटर रेफर किया गया है।

    तहसीलदार अक्षय पंकज ने कहा कि मोपाटा गांव निवासी दैविक आपदा में रात्रि घायल दुर्गा देवी को गांव में प्राथमिक उपचार के देने के बाद देवाल लाया जा रहा है वहां से हेलीकॉप्टर से एयरलिफ्ट कर ऋषिकेश एम्स में इलाज भेजा जा रहा है।

    बारिश के चलते पिंडरघाटी बेहद संवेदनशील बनी है और लाइफ लाइन कही जाने वाले सड़कों पर आए मलबे से राहत एवं बचाव कार्य समय पर नही पहुंचने से लोग डरे-सहमे है।