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    Uttarakhand Disaster: धराली, थराली और अब पौंसारी में भारी तबाही, खतरे में जद में कई मकान

    Updated: Fri, 29 Aug 2025 08:49 PM (IST)

    बागेश्वर जिले में धराली थराली के बाद अब पौंसारी में अतिवृष्टि से भारी तबाही हुई है। दो लोगों की मौत हो गई है और तीन लापता हैं। सड़क बिजली और पानी की आपूर्ति बाधित है। साल 2019 में सुमगढ़ में बादल फटने से 18 बच्चों की दर्दनाक मौत की यादें ताजा हो गई। कपकोट तहसील आपदा से सबसे अधिक प्रभावित है।

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    दो परिवारों के दो लोगों की मलबे में दबकर मौत. Jagran

    जागरण संवाददाता, बागेश्वर । धराली के बाद थराली और अब पौंसारी में अतिवृष्टि से भारी तबाही मची हैं। दो परिवारों के दो लोगों की मलबे में दबकर मौत हो गई है, जबकि लापता तीन लोगों के भी जीवित होने की उम्मीद खत्म होती जा रही है।

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    सड़क, रास्ते, बिजली, पानी, संचार सेवाएं पूरी तरह धराशायी हो गईं हैं। पुल बह गया है। बिजली का ट्रांसफार्मर के साथ ही पोल भी बह गए हैं। खेती दब गई है। कई मकान खतरे में जद में हैं।

    वहीं बैसानी गांव में 13 बकरियां भी भूस्खलन में जिंदा जमींदोज हो गईं हैं। गांव मे चारों तरफ तबाही के निशान दिखाई दे रहे हैं। अब ग्रामीण दहशत भरी नजरों से प्रशासन से मिलने वाली राहत पर टकटकी लगाए हुए हैं।

    वर्ष 2019 में सुमगढ़ में जिंदा दफन हो गए थे 18 बच्चे

    जिला भूस्खलन तथा भूकंप की दृष्टि से जोन पांच में आता है। हिमालयी गांवों में वर्षाकाल काफी दुखदायी रहा है। 18 अगस्त 2019 में बादल फटने के बाद सुमगढ़ सरस्वती शिशु मंदिर स्कूल की छत पर भारी मात्रा में मलबा गिर गया था। जिसमें 18 बच्चे जिंदा दफन हो गए थे। जिसमें नौ छात्र तथा नौ छात्राएं शामिल थीं। जबकि घटना में छह अन्य बच्चे मलबे से जीवित निकाले गए थे।

    वर्ष 1983 कर्मी गांव में अतिवृष्टि 37 लोगों को लील गई

    वर्ष 1983 में कर्मी के भयात तोक में भूस्खलन में 37 लोग मारे गए थे। वहीं जिले की कपकोट तहसील आपदा से सबसे अधिक प्रभावित हैं। सूपी, सेरी, दोबाड़, बडैत, हरसिंग्याबगढ़, बूरमोला, बामनखेत, नौकुड़ी, शीरी, शामा, रमाड़ी, कनौली, नामतीचेटाबगढ़, खेती किसमिला, भनार, माजखेत, चुचेर, लाथी, लीती, हमटीकापड़ी, रातिरकेठी, मल्खाडुंगर्चा, गोगिना, रिठकुला, झूनी, खलझूनी, बघर, सरण, बदियाकोट, खर्ककानातोली, लोहारखेत, सनगाड़, खाती, बड़ी पन्याली, रीमा, बाछम आदि गांव भूस्खलन की दृष्टि से अति संवेदनशील हैं।

    गरुड़, कपकोट तथा बागेश्वर के ये गांव खतरे में

    गरुड़ विकासखंड में जिनखोला, मटेना, कौसानी, पय्यां व कुलांऊ, जबकि बागेश्वर ब्लाक में आने वाली कांडा तहसील के पूरे खनन क्षेत्र को खतरनाक वाले क्षेत्र में शामिल किया गया है। कपकोट ब्लाक के फरसाली, दुलम, सूडिंग, सौंग, फुलवारी, गुलेर, सलिंग, हरसीला, उत्तरौड़ा, गुलम परगड़, झोपड़ा, माजखेत, रैंथल, बस्कूना, असौं और बागेश्वर ब्लाक के कफलखेत, ठाकुरद्वारा, कठायतबाड़ा को मध्यम खतरे वाले क्षेत्रों में शामिल हैं।

    विकास के नाम पर जिस तरह से प्राकृतिक संसाधनों का दोहन हो रहा है। उससे प्राकृतिक आपदाओं में भी बढ़ोतरी हो रही है। डर है कि कहीं विकास की अंधी दौड़ में प्रकृति मानव जाति के लिए खतरा न बन जाए। - रमेश पांडे कृषक, इतिहासकार, बागेश्वर