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    पहाड़ की गांधी राधा बहन ने Uttarakhand के सुधार में खपा दिया जीवन, मिला पद्मश्री पुरस्कार

    Updated: Wed, 28 May 2025 04:41 PM (IST)

    पर्यावरण संरक्षण और महिला सशक्तिकरण के लिए समर्पित कौसानी लक्ष्मी आश्रम की राधा बहन भट्ट को पद्मश्री मिला है। पहाड़ की गांधी के नाम से मशहूर उन्होंने गांधीवादी मूल्यों से समाज में बदलाव लाए। उन्होंने बालिका शिक्षा को बढ़ावा दिया और नदियों को बचाने के लिए कई आंदोलन किए। राधा बहन को पहले भी कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है।

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    पहाड़ की गांधी राधा बहन भट्ट। जागरण

    घनश्याम जोशी, जागरण बागेश्वर। पर्यावरण संरक्षण, महिला सशक्तिकरण, शराब, नदी बचाओ जैसे तमाम अभियान को संचालित करने वाली कौसानी लक्ष्मी आश्रम की मुखिया राधा बहन भट्ट को पद्मश्री पुरस्कार मिला है।

    उन्होंने बागेश्वर समेत राज्य तथा देश में के लिए मिसाल कायम की है। उन्हें पहाड़ की गांधी की भी उपाधि प्राप्त है। गांधीवादी मूल्यों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण, बालिका शिक्षा तथा महिला सशक्तिकरण को मजबूत बनाने में राधा बहन की भूमिका अहम रही है।

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    राधा बहन भट्ट सरला बहन की शिष्या रही हैं। लगभग 60 वर्षों से वह पहाड़ तथा पर्यावरण बचाने के अपने जुनून को आगे बढ़ती आ रही हैं। 17 अक्टूबर 1933 को अल्मोड़ा जिले के धुरका गांव में उनका जन्म हुआ था। उन्होंने 12वीं तक की पढ़ाई की। पिता कमलापति भट्ट तथा माता रेवती भट्ट की आजीवन सेवा की।

    वह गांधीवादी विचारधारा से जुड़ीं। वर्ष 1951 में कौसानी स्थित लक्ष्मी आश्रम की शिक्षिका बनीं। वर्ष 1957 में भूदान आंदोलन में शामिल हुईं। उत्तराखंड में पदयात्रा निकाली। विनोबा भावे के साथ दो लंबी पदयात्राएं भी कीं। जिसमें एक उत्तर प्रदेश तथा दूसरी असम में की थी।

    महिलाओं के लिए किया बेहतर काम

    वर्ष 1961 से 1965 तक राधा बहन ग्राम स्वराज, शराब विरोधी आंदोलन, वन संरक्षण, महिला सशक्तिकरण तथा गाय-बकरी चराने वाली किशोरियों के उत्थान जैसे मुद्दों पर काम करती रहीं। पहाड़ के दूरस्थ तथा वंचित क्षेत्रों में 25 बाल मंदिरों की स्थापना की।

    लगभग 15,000 जरूरतमंद बच्चों को शिक्षा से जोड़ा। अल्मोड़ा तथा पिथौरागढ़ जिलों में करीब 1,60,000 पौधे रोपे। वर्ष 1975 में 75 दिनों की लंबी पैदल यात्रा निकाली। वन संरक्षण, चिपको आंदोलन, शराब विरोधी आंदोलन तथा ग्राम स्वराज की स्थापना के लिए लोगों को जागरूक करने का अभियान शामिल था।

    नदियों के सर्वेक्षण से जुड़ीं

    वर्ष 2006 से 2010 तक राधा बहन ने उत्तराखंड के हिमालय तथा नदियों के सर्वेक्षण का काम किया। इस दौरान नदियों पर बनने वाली हाइड्रो पावर परियोजनाओं का विरोध भी किया। हिमालय की बेटियां पुस्तक भी लिखी है। जिसे जर्मन तथा डेनिस में प्रकाशित किया गया है। अभी वह नौला यानी जलस्रोत बचाव अभियान चला रही हैं। उनका उद्देश्य कौसानी के आसपास के नालों को पुनर्जीवित करना है।

    ये सम्मान भी बहन के नाम

    राधा बहन को गांधीवादी विचारधारा के प्रसार तथा उन्हें साकार करने में योगदान के लिए जमनालाल बजाज पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। इसके अलावा गोदावरी गौरव, इंदिरा प्रियदर्शिनी पर्यावरण पुरस्कार, मुनि सतबल पुरस्कार तथा कुमाऊं गौरव पुरस्कार से भी सम्मानित हैं। उन्हें शांति के लिए प्रतिष्ठित नोबल पुरस्कार के लिए भी नामांकित किया जा चुका है।

    अवस्थ होने व गर्मी अधिक पड़ने के कारण मैं दिल्ली जाने में असमर्थ हूं। यदि मुझे पद्मभूषण देना है तो कौसानी आकर दिया जाए। - राधा बहन भट्ट