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    Bageshwar Disaster: बादल फटने से सबकुछ हो गया तबाह, 100 करोड़ रुपये के नुकसान का आकलन

    Updated: Sat, 30 Aug 2025 06:51 PM (IST)

    कपकोट के पौंसारी में अतिवृष्टि से लगभग 100 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। बादल फटने जैसी घटना से कनलगढ़ घाटी में कृषि मत्स्य तालाब और संचार सेवाएं तबाह हो गई हैं। सड़क बिजली और पानी की आपूर्ति बाधित है जिसे ठीक करने के प्रयास जारी हैं। विधायक सुरेश गढ़िया ने पीड़ितों को ढांढ़स बंधाया और राहत सामग्री वितरित की। प्रभावितों के पुनर्वास के प्रयास किए जा रहे हैं।

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    बादल फटने जैसी घटना से कनलगढ़ घाटी में सबकुछ हो गया तबाह. Jagran

    जागरण संवाददाता, बागेश्वर । कपकोट के पौंसारी में आई आपदा से लगभग 100 करोड़ के नुकसान का आकलन किया गया है। यह बढ़ भी सकता है। बादल फटने जैसी घटना ने कनलगढ़ घाटी में सबकुछ तबाह कर दिया है। कृषि से लेकर मत्स्य तालाब बह गए हैं।

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    सड़क, बिजली, पानी, संचार सेवाएं पूरी तरह पटरी से उतरीं हैं। हालांकि बिजली तथा पानी के अधिकारी सेवाओं को पटरी में लाने में जुटे हुए हैं। जिलाधिकारी ने कहा कि वह एक दो दिन में व्यवस्थाओं को सुचारू करने में कामयाब होंगे।

    राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बैसानी राहत कैंप में जिलाधिकारी आशीष भटगांई बने हुए हैँ। उन्होंने कहा कि लगभग 100 करोड रुपये के नुकसान का आकलन किया गया है। दैवीय आपदा से क्षेत्र को भारी नुकसान हुआ है। अधिकारी पूरी लगन से लोगों को राहत दिलाने में जुटे हुए हैं।

    आपदा से 20 मत्स्य तालाब बह गए हैं। जिससे लगभग एक करोड़ का नुकसान मत्स्य पालकों को हुआ है। उद्यान विभाग के दो पालीहाउस बहे हैं। जिसमें पौधे आदि लगाकर पांच लाख रुपये का नुकसान हुआ। कृषि विभाग के अनुसार आठ हेक्टेयर भूमि बह गई है। इसके अलावा फसलों को लगभग 10 लाख रुपये का नुकसान हुआ है। इसके अलावा भूकटाव भी हुआ है।

    सिंचाई विभाग के अनुसार दो करोड़ की पंपिंग योजना भी बही है। बाढ़ सुरक्षा दीवार भी ध्वस्त है। पशुपालन विभाग के अनुसार 82 बकरियां, तीन भैंस, पांच गाय भी लापता चल रहीं हैँ। उरेडा विभाग का माइक्रो हाइडिल भी बहा है।15 पैदल पुलिया बहने से कन्यालीकोट, बैसानी, जगथाना, पौसारी में आवागमन प्रभावित है। ऊर्जा निगम को 60 लाख रुपये का नुकसान हुआ है। 52 पोल तथा 1000 मीटर वायर बह गया है।

    विधायक ने पौंसारी गांव में जाकर लोगों को बंधाया ढांढ़स

    जासं, बागेश्वर : विधायक सुरेश गढ़िया पौंसारी में जमे हुए हैँ। उन्होंने शनिवार को गांव में जाकर आपदा प्रभावितों को ढांढ़स बंधाया। गांव के 170 परिवारों को उजाले के लिए 20 सोलर लाइटें प्रदान कीं। कहा कि 100 करोड़ रुपये का नुकसान कनलगढ़ घाटी में हुआ है। आपदा प्रभावितों के पुनर्वास के लिए वह लगातार काम कर रहे हैं।

    विधायक गढ़िया ने कहा कि पेयजल, सड़क तथा बिजली की समस्या है। उसका समाधान किया जा रहा है। प्राथमिक विद्यालय पौंसारी में मलबा आ गया था। उसे भी हटा दिया गया है। वहां भी राहत शिविर लगाया गया है। जहां लगभग 400 लोगों को भोजन तैयार हो रहा है। लोगों के रहने की भी वहां व्यवस्था की गई है।

    एनडीआरएफ की दो, एसडीआरएफ की एक, पुलिस, राजस्व आदि टीमों वहां डटीं हुईं हैं। भोजन समेत अन्य सुविधाओं को जुटाने के लिए 120 मजदूर लगाए गए हैं। सुमटी, बैसानी, नान कन्यालीकोट, जगथाना, बैसानी, घनयामनगरी आदि प्रभावितों गांवों में 300 राशन किट भी बांटे गए हैं।

    मेन राहत शिविर राउमावि बैसानी को बनाया गया है। जहां 800 लोगों के रहने तथा भोजन की व्यवस्था है। रात में गांव के 25 लोग यहां रह रहे हैं। वर्षा होने पर यह संख्या बढ़ेगी। रजाई, गद्दा आदि की पूरी व्यवस्था है। रात में जिलाधिकारी तथा पुलिस अधीक्षक भी राहत कैंप में रहे।

    सुबह छह बजे सभी ने पौंसारी का विजिट किया। शुकवार की रात में राहत बचाव के लिए प्लान तैयार किया गया। जिस पर काम चल रहा है। सात लोगों के मकान ध्वस्त हुए हैं। उन्हें पांच-पांच लाख यानी 35 लाख रुपये के चेक वितरित किए गए हैं। तीन मृतकों के स्वजन को पांच-पांच लाख रुपये के चेक दिए हैं। जगथाना सड़क को भी लोनिवि को खोलने के निर्देश दिए गए हैं। आपदा प्रभावितों के पुनर्वास के भी प्रयास शुरू कर दिए गए हैं।

    घायल से भर्ती शुल्क लेने पर भड़के पूर्व विधायक फर्स्वाण

    पूर्व विधायक ललित फर्स्वाण भी आपदाग्रस्त गांव में डटे हैं। उन्होंने कहा कि आपदा में घायल 15 वर्षीय पवन जोशी के उपचार को भर्ती शुल्क 50 रुपये लिए गए हैं। यह कतई अन्याय है। जिलाधिकारी तथा विधायक जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई करें। घायल को हरसंभव उपचार दिया जाना चाहिए। कहा कि लोग पीने के पानी के लिए तरस रहे हैं।

    उन्हें पेयजल मुहैया कराया जाए। आपदाग्रस्त गांव पौंसारी के ग्रामीणों को तत्काल पुनर्वासित किया जाए। उन्होंने घटनास्थल खाईजर में एसडीआरएफ तथा अन्य जवानों का हौंसला भी बढ़ाया। उन्होंने नदी के पानी को दलदल की तरफ मोड़ने को कहा। जिसके बाद पानी में टिन तथा बिस्तर दिखाई देने लगा। टिन हटाते ही रमेश जोशी का शव घटना स्थल से महज 200 मीटर की दूरी में बरामद कर लिया। फर्स्वाण ने कहा कि खोजबचाव दल जोखिम के साथ काम कर रहा है।