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बागेश्वर वकील हत्याकांड: सरयू-गोमती संगम पर धीरेंद्र परिहार को नम आंखों से विदाई, परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

Published: Thu, 05 Nov 2026 11:12 AM (IST)

17 दिन से लापता अधिवक्ता धीरेंद्र परिहार का शव मिलने के बाद बुधवार को सरयू-गोमती संगम पर नम आंखों से ...और पढ़ें

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जागरण संवाददाता, बागेश्वर । 17 दिन से लापता अधिवक्ता धीरेंद्र परिहार का शव मिलने के बाद बुधवार को उनके परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। सरयू-गोमती संगम पर अंतिम संस्कार के दौरान हर आंख नम थी। मां नंदी देवी और पिता गोविंद सिंह बेटे को खोने के गम में बेसुध नजर आए। भाई पंकज परिहार और बहन दीक्षा का भी रो-रोकर बुरा हाल रहा।

पोस्टमार्टम के बाद पुलिस ने बुधवार दोपहर करीब 12 बजे शव स्वजन को सौंपा। घर पहुंचने के बाद अंतिम यात्रा निकाली गई। संगम पर स्वजन, रिश्तेदारों, परिचितों और साथियों ने धीरेंद्र को अंतिम विदाई दी। घर में सुबह से लोगों का आना-जाना लगा रहा और सभी परिवार को ढांढस बंधाते रहे। उनके निधन की खबर से परिचितों और साथियों में शोक की लहर रही।

इंटरनेट मीडिया पर भी लोगों ने दुख व्यक्त किया। धीरेंद्र सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय थे। भाजपा समर्थक के रूप में उनकी पहचान थी। सांसद प्रतिनिधि होने के साथ भारतीय जनता युवा मोर्चा में भी उनकी अहम भूमिका रही।

वह पूर्व सभासद भी थे। उनके निधन पर पूर्व मंत्री बलवंत भौर्याल, विधायक पार्वती दास, भाजपा प्रदेश महामंत्री कुंदन परिहार, सांसद अजय टम्टा, दर्जा राज्य मंत्री शिव सिंह बिष्ट सहित व्यापारियों और विभिन्न संगठनों से जुड़े लोगों ने शोक व्यक्त किया।

जिला बार भवन में अधिवक्ताओं ने दी श्रद्धांजलि

जिला बार भवन में जिलाध्यक्ष राजेश रौतेला के नेतृत्व में शोकसभा हुई। धीरेंद्र बार एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष भी थे। साथी अधिवक्ताओं ने उनके साथ बिताए समय को याद किया और परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।

मुश्किल समय में साथ खड़ी रही महिला मित्र

करीबी लोगों के अनुसार, धीरेंद्र को लीवर संबंधी परेशानी भी थी। एक महिला मित्र ने उनके उपचार में सहयोग किया था। परिचितों के बीच दोनों के विवाह की चर्चा भी रही थी। धीरेंद्र के निधन से वह बेहद दुखी हैं।

पोस्टमार्टम हाउस के आसपास दुर्गंध से परेशान रहे लोग

जिला अस्पताल परिसर में इमरजेंसी के पास पोस्टमार्टम हाउस स्थित है। धीरेंद्र का शव पोस्टमार्टम के लिए वहां रखा गया था। शव की स्थिति के कारण आसपास दुर्गंध फैल गई, जिससे मरीजों, तीमारदारों और वहां से गुजरने वाले लोगों को परेशानी हुई।

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