Bageshwar Cloudburst: 'जाको राखे साइयां, मार सके न कोई', पवन ने जलप्रलय से जीती जंग, सुनाई काली रात की आपबीती
बागेश्वर में पवन जोशी नामक एक लड़का रात 11 बजे से सुबह 3 बजे तक आसमानी आफत में फंसा रहा। नींद में उसने अपने माता-पिता और भाई को पुकारा। एक बकरी और जंगली सूअरों के झुंड के बीच उसने खुद को बचाया। मकान बह गया पर पवन सुरक्षित रहा। सुबह गांव वालों ने उसे बचाया पर बकरी बह गई। पवन अब सरकार से पुनर्वास की उम्मीद कर रहा है।

जासंं, बागेश्वर। घुप्प अंधेरा, ऊपर से आसमानी आफत, नींद में माता-पिता तथा भाई को खोजती आंखें तथा एक बकरी का सहारा, जंगली सूअरों का झुंड ने भी परेशान किया। लेकिन पवन ने इंद्रदेव के प्रकोप से जीवन की जंग जीत ली।
रात 11 बजे से वह सुबह तीन बजे यानी पूरे चार घंटे तक नींद में गांव वालों को आवाज लगाते रहा। गांव के लोग आए तो रात भर साथ रही बकरी भी उसे छोड़कर गधेरे में उसकी आंखों के सामने बह गई। पवन के साथ जाको राखे साइयां, मार सके न कोई कहावत चरितार्थ हुई है।
कनलगढ़ घाटी के पौंसरी ग्राम पंचायत के खाईगैर में अपने माता-पिता तथा छोटे भाई के साथ रह रहे पवन जोशी के लिए गुरुवार की रात खौफभरी रही। वह भोजन करने के बाद लगभग 10 बजे अपने छोटे भाई गिरीश जोशी के साथ सो गया। उन्हें नींद भी आ गई।
एकाएक उनका मकान पानी में बहने लगा। मकान की छत की टिन के ऊपर वह कब आया तथा टिन सहित वह गधेरे के तेज बहाव से छिटक कर लगभग 300 मीटर ऊपर की तरफ अपने खेत में पहुंच गए। उनके साथ एक बकरी भी थी। वह नींद में ही माता-पिता तथा भाई को आवाज देते रहा। लेकिन दूसरी तरफ घुप्प अंधेरा था। मरघट जैसा शोर था।
पौंसारी गधेरा तेजी से बह रहा था। आसमान से बिजली कड़क रही थी। वर्षा ने उसके तन तथा मन को पूरी तरह भिगो दिया था। भयभीत तथा डरवाना मंजर उसकी आंखों के सामने कौंद रहा था। उसकी समझ में पहले कुछ नहीं आया। वह आसमान ताकते रहा। समझा कि उसके घर की छत टपक रही है। जब उसने होश संभाला तो सूअरों के झुंड ने उस पर हमला करने की कोशिश की। उसने बकरी को भी बचा लिया तथा स्वयं भी बच गया। सुबह लगभग तीन बजे तक वह आपदा से जंग लड़ता रहा।
सबकुछ हो गया बर्बाद, पुनर्वास की आस
जिला अस्पताल में भर्ती 15 वर्षीय पवन राइंका बैसानी में कक्षा सातवीं में पढ़ता है। वह प्रकृति के प्रकोप को हराकर लौटा है। उसकी पांच बहनें हैं। दया, रीमा, खष्टी, आशा, गुंजा सभी अपने मांयके में हैं। बड़ा भाई गणेश जोशी दिल्ली में नौकरी करता है।
लापता छोटा भाई गिरीश जोशी कक्षा पांचवीं का छात्र है। उसके पिता रमेश चंद्र जोशी खेती तथा मजदूरी जबकि माता बसंती देवी गृहणी हैं। वह कहता है कि उसका सबकुछ बर्बाद हो गया है। उसे सरकार से नौकरी तथा पुनर्वास की आस है।
मानीगैर के सुरेश सिंह सबसे पहले आए
शुकवार की सुबह तीन बजे मानीगैर के सुरेश सिंह ने उसकी आवाज सुनी। वह सबसे पहले वहां पहुंचा। तब उसे पता चला कि उनका सब कुछ बर्बाद हो गया है।
गंगा के आने के बाद पौंसारी गांव के लोग भी बड़ी संख्या मे पहुंच गए। उसे अपने साथ ले गई। लेकिन बकरी नदी की तरफ चली गई और बह गई। पवन कहता है कि उनके पास 30 बकरियां थीं। एक गाय, दो बैल तथा दो बछिया थीं। इसके अलावा एक कुत्ता भी उनके परिवार का हिस्सा था।
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