IIM काशीपुर में शीतलाखेत की बेटियों का बजा डंका, भीमल से बनाया हर्बल शैंपू
राजकीय महाविद्यालय शीतलाखेत की दो छात्राओं, रश्मि आर्या और सुहानी आर्या ने भीमल से हर्बल शैंपू बनाकर आईआईएम काशीपुर में आयोजित उद्यमिता कार्यक्रम में अपनी पहचान बनाई।

शीतलाखेत की बेटियों ने भीमल से बनाया हर्बल शैंपू।
HighLights
शीतलाखेत की छात्राओं ने भीमल से हर्बल शैंपू बनाया।
आईआईएम काशीपुर में नवाचार को मिली सराहना।
स्थानीय संसाधनों से स्वरोजगार को मिलेगा बढ़ावा।
संवाद सहयोगी, अल्मोड़ा। पहाड़ के पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक उद्यमिता से जोड़कर शीतलाखेत की दो छात्राओं ने नई मिसाल पेश की है। राजकीय महाविद्यालय शीतलाखेत की रश्मि आर्या और सुहानी आर्या ने भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) काशीपुर में आयोजित छह दिवसीय उद्यमिता विकास कार्यक्रम में अपने नवाचार से सभी का ध्यान आकर्षित किया।
देवभूमि उद्यमिता योजना के तहत आयोजित बूटकैंप में छात्राओं ने स्थानीय वनस्पति भीमल से तैयार हर्बल शैम्पू का प्रस्तुतीकरण किया। इसमें भीमल के अर्क के साथ रीठा, आंवला और रोजमेरी का इस्तेमाल किया गया है।
छात्राओं ने इसके निर्माण, प्राकृतिक घटकों, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और बाजार में विपणन की संभावनाओं की जानकारी विशेषज्ञों को दी। उनके इस पर्यावरण अनुकूल नवाचार की प्रशिक्षकों और विशेषज्ञों ने सराहना की।
महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. एलपी वर्मा ने छात्राओं की उपलब्धि पर खुशी जताई। योजना की नोडल अधिकारी डा. वसुंधरा लस्पाल ने इसे स्थानीय संसाधनों से स्वरोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।
30 से 32 पेड़ों से जुटा रहीं भीमल
छात्राओं की ओर से शुरुआत 10 अप्रैल 2026 को शीतलाखेत महाविद्यालय में आयोजित देवभूमि उद्यमिता योजना के ओरिएंटेशन शिविर से हुई। इसके बाद हवालबाग में अगस्त में प्रथम और 25 से 31 अक्टूबर तक आईआईएम काशीपुर में दूसरे बूटकैंप में छात्राओं ने प्रशिक्षण लिया। छात्राएं घर के आसपास मौजूद 30 से 32 भीमल के पेड़ों से छाल और पत्तियों का अर्क जुटाती हैं। इसमें रीठा, आंवला और रोजमेरी मिलाकर शैम्पू तैयार किया जाता है।
छात्राओं का दावा है कि छह माह तक उपयोग योग्य इस उत्पाद की 50 और 100 मिलीलीटर की पैकिंग तैयार की गई है। शुरुआती परीक्षण में बालों की बनावट और झड़ने की समस्या में सकारात्मक अनुभव मिलने के बाद इसे विकसित किया गया।