विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 23, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Parakram Diwas: कुमाऊं रेजीमेंट के दो जांबाजों की याद में द्वीपों के नाम, एक ने अकेले मारे थे 1300 चीनी सैनिक

By deep boraEdited By: Nirmala Bohra
Published: Mon, 23 Jan 2023 03:07 PM (IST)

Parakram Diwas नेताजी सुभाष चंद्र बोस जयंती 23 जनवरी को हर साल पराक्रम दिवस के रूप में मनाई जाती है। ...और पढ़ें

Parakram Diwas: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अंडमान और निकोबार के 21 बड़े अनाम द्वीपों का नाम रखा गया।
Parakram Diwas: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अंडमान और निकोबार के 21 बड़े अनाम द्वीपों का नाम रखा गया।

टीम जागरण, रानीखेत: Parakram Diwas: पराक्रम दिवस के अवसर पर सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अंडमान और निकोबार के 21 बड़े अनाम द्वीपों का नाम रखा गया।

इन द्वीपों का नाम परमवीर चक्र पुरस्कार विजेताओं के नाम पर रखा गया है। जिनमें कुमाऊं रेजीमेंट के दो जांबाज सैन्‍य अफसरों ने नाम भी शामिल हैं। बता दें कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस जयंती 23 जनवरी को हर साल 'पराक्रम दिवस' के रूप में मनाई जाती है।

मेजर सोमनाथ शर्मा आजाद भारत के पहले परमवीर चक्र विजेता

कुमाऊं रेजीमेंट के मेजर सोमनाथ शर्मा आजाद भारत के पहले परमवीर चक्र विजेता रहे। खास बात यह है कि 22 फरवरी 1942 को मां भारती के इस वीर सपूत ने कुमाऊं रेजीमेंटल सेंटर (केआरसी) मुख्यालय रानीखेत से कमीशन प्राप्त किया था। डाढ़ गांव (हिमाचल प्रदेश) में जन्मे जांबाज सोमनाथ का उत्तराखंड से गहरा नाता रहा।

इनकी प्रारंभिक पढ़ाई नैनीताल से हुई। प्रिंस आफ वेल्स रायल मिलिट्री कालेज देहरादून से उच्च शिक्षा प्राप्त कर वह सेना में भर्ती हुए थे। 1942 में उन्हें केआरसी में कमीशन मिला। देश के लिए मर मिटने का जज्बा पाले मेजर सोमनाथ का हाथ चोटिल होने के बावजूद उन्होंने 1947 में पाकिस्तान के साथ युद्ध में अदम्य साहस का प्रदर्शन किया।

उन्‍होंने तीन नवंबर 1947 को दुश्मन सेना को पीछे हटने के लिए मजबूर किया। उन्‍होंने जम्मू कश्मीर के बडगाम में महज 24 साल की उम्र में मातृभूमि की आन, बान व शान की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया। रानीखेत का ऐतिहासिक सोमनाथ मैदान कुमाऊं रेजीमेंट के इसी जांबाज फौजी अफसर के नाम पर है। अब देश के एक द्वीप का नाम मेजर सोमनाथ शर्मा के नाम पर रखा गया है।

जांबाज मेजर शैतान सिंह ने अकेले मार गिराए थे 1300 चीनी सैनिक

इसके साथ ही कुमाऊं रेजीमेंट के एक और परमवीर चक्र विजेता मेजर शैतान सिंह की याद में भी द्वीप का नाम रखा गया है। 13 कुमाऊं के इस जांबाज ने 1962 की जंग में अदम्य साहस का परिचय देते हुए रेजांगला में मोर्चा संभाला था। अपनी टुकड़ी के साथ खुद के दम पर 1300 चीनी सैनिकों को मार गिराया था।

कहा जाता है कि मशीनगन को रस्सी से पैरों में बांधकर इस वीर सपूत ने दुश्मन सेना से लोहा लिया। जोधरपुर (राजस्थान) में एक दिसंबर 1924 को जन्मे शैतान सिंह के पिता हेम सिंह भाटी भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट कर्नल थे। पिता से विरासत में मिली बहादुरी और देशप्रेम का जज्बा ही था कि जोधरपुर स्टेट फोर्स के इस जांबाज ने एक अगस्त 1949 में कुमाऊं रेजीमेंट में तैनाती ली।

यह भी पढ़ें : Parakram Diwas 2023: PM मोदी ने 21 परमवीर पुरस्कार विजेताओं पर द्वीपों के रखे नाम, वीर सावरकर को भी किया याद

1962 में शैतान सिंह पदोन्नत होकर मेजर नियुक्त किए गए। कुछ ही दिनों बाद 18 नवंबर को भारत और चीन में जंग छिड़ गई थी। लद्दाख की चुशुल घाटी में 13 कुमाऊं रेजीमेंट के लगभग 120 जवनों की टुकड़ी की अगुवाई करते हुए मेजर शैतान सिंह ने चीनी सेना को मुंहतोड़ जवाब दिया। आखिर में अपना सर्वोच्च बलिदान देकर हमेशा के लिए अमर हो गए।