वाराणसी, जेएनएन। बनारस में मारुतिनगर के इलाके में शनिवार को सुबह करीब साढ़े नौ बजे पीली वर्षा हुई। करीब तीन मिनट तक हुई इस बारिश से कई घरों के छत पर पीले-पीले धब्बे बन गए। मारुतिनंदन के एक रहवासी शिवानंद दुबे जब सुबह अपनी छत पर थे तभी यह बारिश हुई और बारिश बंद होने के बाद देखा तो पीले रंग के बूंद के आकार के कई धब्बे बने थे जो हल्दी की तरह से लग रहे थे।

इसी दौरान बालकनी के ग्रिल और गलियों में भी ऐसी ही पीली बूंदे दिखीं, यही नहीं आसपास जितने भी मकान थे उन छतों पर भी ऐसा ही कुछ दृश्य था। बीएचयू के वैज्ञानिकों से जब इसका कारण पूछा गया तो उनके लिए यह घटना एक पहेली बन गई। काफी देर विश्लेषण के बाद भी कोई ठोस कारण नहीं स्पष्ट हुआ। 

बीएचयू के मौसम विज्ञानी प्रो. मनोज श्रीवास्तव के अनुसार यह बारिश से हुआ है ऐसा कहना जल्दबाजी होगी। हालांकि, उन्होंने बताया कि उनके भी कार पर इस तरह की बूंदे दिखाई दी हैं। वहीं आइआइटी- बीएचयू के सिरामिक इंजीनियरिंग विभाग के डॉ. प्रीतम सिंह ने कहा कि प्रथम दृष्टया तो यह एसिड रेन नहीं लग रही है। वहीं बीएचयू में वनस्पति विज्ञान विभाग के वैज्ञानिक प्रो. रविंद्र नाथ खरवार ने बताया कि हो सकता है कि बारिश से ही हुआ हो। जब वायुमंडल में सल्फर आदि की सघनता बढ़ जाती है तो इस तरह के बारिश की स्थिति देखी जा सकती है। आसपास के इलाकों में फैक्ट्री या फिर चिमनी से निकले धुंए के कारण वायुमंडल में ऐसी स्थिति बना सकते हैं।

इससे पूर्व वाराणसी या आसपास कहीं भी पीले रंग की बारिश का न तो कहीं मामला आया और न ही कहींं ऐसा केस सुना गया। ऐसे में बारिश की इन जमने वाली पीली बूंदों के पीछे क्‍या राज है यह जानकारी जांच के बाद ही सामने आ सकती है। वहीं पीली बारिश की वजह से क्षेत्र के लोगों में भी इसको लेकर चर्चा का बाजार गर्म है।