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    Maha Shivratri 2024: आठ मार्च को है महाशिवरात्रि, जानें पूजा करने की सही विधि; शिव योग में सफल होते हैं ये कार्य

    Updated: Fri, 01 Mar 2024 05:34 PM (IST)

    शिवरात्रि का पर्व भगवान् शिव के दिव्य अवतरण का मंगलसूचक है। उनके निराकार से साकार रूप में अवतरण की रात्रि ही महाशिवरात्रि कहलाती है। वे हमें काम क्रोध लोभ मोह मत्सरादि विकारों से मुक्त करके परम सुख शान्ति ऐश्वर्यादि प्रदान करते हैं। यह महाशिवरात्रि का व्रत व्रतराज के नाम से विख्यात है। यह शिवरात्रि यमराज के शासन को मिटाने वाली है और शिवलोक को देने वाली है।

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    महाशिवरात्रि आठ को, इससे बड़ा कोई परमतत्व नहीं

    जागरण संवाददाता, वाराणसी। महाशिवरात्रि व्रत फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को किया जाता है। इस व्रत को अर्धरात्रिव्यापिनी चतुर्दशी तिथि में करना चाहिए। इस वर्ष 2024 में यह शुक्रवार आठ मार्च को है क्योंकि इस वर्ष चतुर्दशी शुक्रवार आठ मार्च को सायं काल 7:38 बजे से लग रही है जो शनिवार नौ मार्च को सायं 5 बजकर 20 मिनट तक रहेगी। अतः आठ मार्च को ही अर्धरात्रि व्यापिनी होने से यह इस वर्ष आठ मार्च को ही महाशिवरात्रि मनाई जाएगी।

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    संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय, बीएचयू के ज्योतिष विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. विनय कुमार पांडेय बताते हैं कि ज्योतिष शास्त्र के अनुसार प्रतिपदा आदि सोलह तिथियों के स्वामी अग्नि आदि देवता होते हैं, अतः जिस तिथि का जो देवता स्वामी होता है, उस देवता का उस तिथि में व्रत पूजन करने से उस देवता की विशेष कृपा उपासक को प्राप्त होती है।

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    चतुर्दशी तिथि के स्वामी शिव हैं अर्थात् शिव की तिथि चतुर्दशी है। इसीलिए प्रत्येक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी में शिवरात्रि व्रत होता है, जो मास का शिवरात्रि व्रत कहलाता है। शिवभक्त प्रत्येक चतुर्दशी का व्रत करते हैं, परन्तु फाल्गुन कृष्णपक्ष चतुर्दशी को अर्धरात्रि में....

    फाल्गुनकृष्णचतुर्दश्यामादिदेवो महानिशि ।

    शिवलिङ्गतयोद्भूतः कोटिसूर्यसमप्रभ।।

    ईशान संहिता के इस वाक्य के अनुसार ज्योतिर्लिंग का प्रादुर्भाव होने से यह पर्व महाशिवरात्रि के नाम से विख्यात है। इस व्रत को सभी कर सकते हैं। इसे न करने से दोष भी लगता है। अतः सभी शिव भक्तों के इसे अवश्य करना चाहिए।

    ज्योतिष शास्त्र के अनुसार फाल्गुन कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि में चन्द्रमा सूर्य के समीप रहता है। अतः वही समय जीवन रूपी चन्द्रमा का शिवरूपी सूर्य के साथ योग- मिलन होता है। अतः इस चतुर्दशी को शिवपूजा करने से जीव को अभीष्टतम कार्य में सफलता प्राप्त होती है। यही महाशिवरात्रि का रहस्य है।

    शिवरात्रि का पर्व भगवान् शिव के दिव्य अवतरण का मंगलसूचक है। उनके निराकार से साकार रूप में अवतरण की रात्रि ही महाशिवरात्रि कहलाती है। वे हमें काम, क्रोध, लोभ, मोह, मत्सरादि विकारों से मुक्त करके परम सुख, शान्ति ऐश्वर्यादि प्रदान करते हैं।

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    यह महाशिवरात्रि का व्रत ''व्रतराज'' के नाम से विख्यात है। यह शिवरात्रि यमराज के शासन को मिटाने वाली है और शिवलोक को देने वाली है। शास्त्रोक्त विधि से जो इसका जागरण सहित उपवास करेंगे उन्हे मोक्ष की प्राप्ति होगी। शिवरात्रि के समान पाप और भय मिटाने वाला दूसरा व्रत नही है। इसके करने मात्र से सब पापों का क्षय हो जाता है।

    इस वर्ष शिवरात्रि में शिव योग का संयोग भी प्राप्त हो रहा है को प्राणी मात्र के लिए कल्याण कारक है। यह सफलतादायक योग होता है। शिव का अर्थ वेद होता है। कहा भी गया है ''वेद: शिव: शिवो वेद:''

    वेद शिव हैं और शिव वेद हैं अर्थात् शिव वेदस्वरूप हैं। अस्तु ; यह योग वेदाध्ययन, आध्यात्मिक चिन्तन आदि प्रारम्भ करने के लिए उत्कृष्ट होता है। जितने भी बौद्धिक कार्य हैं ; वे सभी शिव योग में उत्तम माने गयें हैं। परोपकार, दयालुता एवं लोककल्याण के कार्य इस योग में बहुत ही सफलतादायक माना गया है। शिव योग में पूजन, जागरण और उपवास करने वाले मनुष्य का पुनर्जन्म नहीं होता।