वाराणसी, जेएनएन। संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में वेद विज्ञान अनुसंधान केंद्र खुलेगा। वेद विभाग में अनुसंधान केंद्र खोलने की कार्यपरिषद ने भी हरी झंडी दे दी है। विस्तृत प्रारूप बनाने के लिए जल्द उच्च स्तरीय समिति के गठन का निर्णय लिया गया है ताकि यूसीजी को प्रस्ताव भेजा जा सके। कुलपति प्रो. राजाराम शुक्ल ने कहा, वेद दुनिया का सबसे प्राचीनतम व सनातन ग्रंथ है। आज का विज्ञान हमारे वेदों में निहित हैं। यूनेस्को ने भी वेद को प्राचीनतम धरोहर की मान्यता दी है। इसके बावजूद वैज्ञानिक दृष्टिकोण से वैदिक ज्ञान अब भी उपेक्षित है। इसे देखते हुए विश्वविद्यालय में अनुसंधान केंद्र की स्थापना की पहल की गई है।

इसका मुख्य उद्देश्य वैदिक ज्ञान व विज्ञान के समन्वित स्वरूप से विकास का नया मॉडल तैयार करना है। साथ ही वैदिक ज्ञान-विज्ञान का वैज्ञानिक दृष्टि से अनुसंधान कर वेद की महत्ता बताना है। कहा कि अनुसंधान केंद्र खुलने से वेद विभाग और समृद्ध होगा। केंद्र में भौतिकी, परमाणु विज्ञान, आधुनिक विज्ञान पर भी उच्चस्तरीय अनुसंधान हो सकेगा। विस्तृत प्रारूप बनाने के लिए उच्च स्तरीय समिति गठित होगी। नए पद होंगे सृजित वेद विज्ञान अनुसंधान केंद्र में अध्यापकों के नए पद भी सृजित करने का प्रस्ताव है।

कुलपति ने बताया कि यूजीसी को भेजे जाने वाले प्रस्ताव में अध्यापकों के नए पद भी शामिल किए जाएंगे। वेद विभाग एक शिक्षक के भरोसे संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में शिक्षकों के 112 पदों में 76 पद रिक्त हैं। वेद विभाग में अध्यापकों के छह पदों के सापेक्ष महज एक अध्यापक ही हैं। कुलपति ने बताया कि रिक्त पदों पर अध्यापकों की जल्द नियुक्ति की जाएगी।

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