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    Varanasi News: झूला, सर्कस, डिस्को के लिए भी जीएसटी पंजीयन आवश्यक, मनोरंजन प्रभारी अर्पिता राय ने दी जानकारी

    Updated: Tue, 24 Jun 2025 11:37 AM (IST)

    मनोरंजन कर अब जीएसटी विभाग के अंतर्गत आता है। झूला, स्टेज शो, प्रदर्शनी जैसे अस्थायी मनोरंजन आयोजनों के लिए 'कैजुअल टैक्स पेयर' को कार्यक्रम से कम से कम पांच दिन पहले जीएसटी पंजीकरण कराना होगा और जिला प्रशासन से भी अनुमति लेनी होगी। ऐसा न करने पर जुर्माना और दंड का प्रावधान है। सरकार बंद सिनेमाघरों को फिर से खोलने और नए मल्टीप्लेक्स बनाने के लिए प्रोत्साहन दे रही है। 

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    मुकेश चंद्र श्रीवास्तव, वाराणसी। मनोरंजन कर खत्म होने के बाद इस विभाग की गतिविधियां भी जीएसटी विभाग से संबद्ध कर दी गई हैं। अब सिनेमा हाल के साथ ही मनोरंजन के अन्य साधनों झूले, सर्कस, स्टेज शो, प्रदर्शनी आदि के लिए जीएसटी पंजीयन दिया जा रहा है। 

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    अस्थायी आयोजनों के लिए कैजुअल टैक्स पेयर को आयोजन के कम से कम पांच दिन पहले ही पंजीयन लेना जरूरी है। हालांकि सबसे पहले जिला प्रशासन का अनुमति पत्र भी जरूरी होता है। ऐसा नहीं करने पर जुर्माना व दंड का भी प्रावधान है।

    जिले में थे पहले 35 सिनेमा हाल, उसमें से अब मात्र चार ही संचालित

    काशी में पहले लगभग 35 सिनेमा हाल थे, हालांकि इसमें से अधिकतर बंद हो गई है। यहां पर सिंगल स्क्रीन के सिनेमा हाल मात्र चार रही रह गए हैं। इसमें आनंद मंदिर, गंगा पैलेस पिशाचमोचन, भागवानी कछावारोड व सिनेमा क्लब बरेका शामिल हैं। 

    वहीं, चार मल्टीप्लेक्स आईपी सिगरा, आईपी विजया, पीडीआर व जेएचवी है। इसके अलावा यहां पर दो ट्रैवलिंग सिनेमा भी है। दोनों ही एक ही ग्रुप छोटू महाराज के मढ़ौली व बाबतपुर में है।

    नए हाल खोलने व पुराने को फिर से चलाने के लिए प्रोत्साहन

    राज्य विभाग की सहायक आयुक्त व मनाेरंजन प्रभारी अर्पिता राय बताती हैं कि शहर में बंद सिनेमाघरों को पुन: संचालित करने व मल्टी प्लेक्स सिनेमा हाल खोलने के लिए सरकार की प्रोत्साहन योजना भी चलाई जा रही है।
    इस क्षेत्र में संभावना तलाशने वाले व्यापारी आगे आएं तो उनकी सरकार की योजनाओं के तहत हर संभव मदद प्रदान की जाएगी। साथ ही उन्होंने कहा है कि झूले, स्टेज शो, प्रदर्शनी, डिस्को आदि के लिए टेंपरेरी जीएसटी पंजीयन दिया जा रहा है। 

    इसके लिए एडवांस में मामूली टैक्स जमा करना पड़ता है, जिसका प्रोग्राम समाप्त होने के बाद आईटीसी लिया जा सकता है। अवैध रूप से संचालन पर 20 हजार रुपये जुर्माने व दंड का भी प्रावधान है। ऐसे में लोगों से अपील है कि वे टेंपरेरी जीएसटी पंजीकरण लेकर ही इस तरह के कारोबार करें।