विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 29, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

वाराणसी में बाढ़ के खतरों का ज‍िला प्रशासन थ्री-डी डिजिटल ल‍िडार तकनीक से कर रहा आकलन

Published: Fri, 29 Aug 2025 12:06 PM (IST)

वाराणसी में बाढ़ की तैयारी के लिए 3-डी अर्बन स्पेशियल डिजिटल ट्विन तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। 6 ...और पढ़ें

लिडार तकनीक से बाढ़ के खतरों का आकलन कर रहा प्रशासन
लिडार तकनीक से बाढ़ के खतरों का आकलन कर रहा प्रशासन

HighLights

  1. बाढ़ से बचाव के लिए काशी का डिजिटल प्रतिरूप |
  2. 3-डी तकनीक से खतरे का सटीक अनुमान |
  3. राहत कार्यों के लिए पहले से तैयारी |
  4. प्रभावित क्षेत्रों का पहले से सटीक जानकारी लेकर बचाव और राहत कार्य।
  5. ट्विन प्रोजेक्ट के तहत काशी का तैयार हुआ है डिजिटल प्रतिरूप।

जागरण संवाददाता, वाराणसी। बाढ़ की विभीषिका से निपटने के लिए काशी में अभिनव तकनीकी उपाय किए जा रहे हैं। "3-डी अर्बन स्पेशियल डिजिटल ट्विन" (लिडार) के तहत काशी का डिजिटल प्रतिरूप तैयार किया गया है, जो बाढ़ के खतरे का सटीक अनुमान लगाने में सहायक है। इससे बचाव और राहत कार्यों को अधिक प्रभावी बनाया जा रहा है।

स्मार्ट सिटी के मुख्य महाप्रबंधक अमरेंद्र तिवारी ने बताया कि इस प्रोजेक्ट की लागत 6 करोड़ रुपये है और इसे 9 महीने में पूरा किया गया है। इसमें एयरक्राफ्ट का भी उपयोग किया गया है। काशी के 160 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र की थ्री-डी मैपिंग की गई है। इस प्रोजेक्ट में 75 से अधिक थीमैटिक लेयर शामिल हैं, जो विकास की योजना बनाने से लेकर आपातकालीन स्थितियों से निपटने तक की सुविधाएं प्रदान करती हैं। यह प्रोजेक्ट रियल टाइम जानकारी उपलब्ध कराता है, जिससे बाढ़ के दौरान जलस्तर बढ़ने पर प्रभावित क्षेत्रों की सटीक जानकारी मिलती है।

यह भी पढ़ें सोते समय धारदार हथ‍ियार से हमला, एंबुलेंस को क‍िया फोन लेक‍िन नहीं पहुंच सकी, तोड़ द‍िया दम

इस मॉडल के माध्यम से बाढ़ में पानी से डूबने वाले क्षेत्रों, स्थानों और प्रभावित घरों की संख्या की पहचान पहले से की जा रही है। कई विभागों को इस प्रोजेक्ट के संदर्भ में प्रशिक्षण दिया गया है, जिसमें इसकी उपयोगिता और प्रयोग करने का तरीका सिखाया गया है।

लाइट एयरक्राफ्ट का उपयोग करते हुए वाराणसी की गलियों और सड़कों की थ्री-डी जीआईएस मैपिंग की गई है। यह तकनीक बाढ़ के दौरान योजना बनाने में काफी मददगार साबित हो रही है। इसके आधार पर प्रशासन पहले से ही राहत और बचाव के लिए रणनीति तैयार कर रहा है, जिससे लोगों को समय पर सहायता मिल सके।

जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने कहा कि इस प्रोजेक्ट के माध्यम से बाढ़ की विभीषिका से निपटने के लिए प्रशासन की तैयारी मजबूत हुई है। यह तकनीकी पहल न केवल बाढ़ के दौरान बल्कि अन्य आपातकालीन स्थितियों में भी प्रशासन को बेहतर निर्णय लेने में सहायता करेगी।

यह भी पढ़ें वाराणसी में चेतावनी बिंदु को पार कर गंगा का जलस्तर बढ़ा खतरे के निशान की तरफ

काशी में बाढ़ की विभीषिका से निपटने के लिए उठाए गए कदम न केवल तकनीकी दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि यह नागरिकों की सुरक्षा और राहत कार्यों को भी प्राथमिकता देते हैं। इस पहल से यह स्पष्ट होता है कि प्रशासन ने बाढ़ के खतरे को गंभीरता से लिया है और इसके प्रभावी प्रबंधन के लिए आवश्यक उपाय किए हैं।

बोले डीएम

लाइट एयरक्राफ्ट वाराणसी के गलियों से लेकर सड़कों तक वाहन द्वारा थ्री-डी जीआईएस मैपिंग की गई है।तकनीक से बाढ़ के दौरान प्लानिंग करने में काफी मददगार साबित हो रहा है। इसके आधार पर प्रशासन पहले से ही राहत और बचाव के लिए रणनीति तैयार कर लोगों को राहत पहुंचा रहा है।  - सत्येंद्र कुमार- जिलाधिकारी।

यह भी पढ़ें वाराणसी में दो बच्‍चि‍यों पर कुत्तों के झुंड ने किया हमला, देखकर खड़े हो जाएंगे रोंगटे, देखें वीड‍ियो...