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    वाराणसी बनी शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की पहली सांस्कृतिक और पर्यटन राजधानी, मिलने जा रही यह सुविधा

    By Abhishek SharmaEdited By:
    Updated: Sat, 17 Sep 2022 11:22 AM (IST)

    वाराणसी (Varanasi) शहर को शंघाई सहयोग संगठन (Shanghai Cooperation Organization) की ओर से वर्ष 2022- 23 के लिए पहली सांस्कृतिक और पर्यटन राजधानी एससीओ ( first cultural and tourism capital of Shanghai Cooperation Organization) द्वारा घोषित किया गया है।

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    शंघाई सहयोग संगठन की ओर से वाराणसी को सांस्‍कृतिक और पर्यटन की राजधानी की मान्‍यता मिल गई है।

    वाराणसी, एजेंसी। पूर्व में शंघाई सहयोग संगठन यानी (SCO) की ओर से वाराणसी को सांस्‍कृतिक और पर्यटन की राजधानी घोषित करने की कवायद को अब संगठन ने अधिकृत तौर पर स्‍वीकार्यता दे दी है। इस बाबत शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की उज्‍बेकिस्‍तान में एससीओ शिखर सम्मेलन शुक्रवार को खत्म होने के पूर्व इस आशय का घोषणा पत्र जारी कर वाराणसी को अधिकृत तौर पर वर्ष 2022-23 के लिए बीजिंग स्थित शंघाई सहयोग संगठन यानी (SCO) द्वारा लिए गए फैसले को मान्‍यता दे दी गई। 

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    इस बाबत चीन, रूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, तजाकिस्तान, उज्बेकिस्तान, भारत और पाकिस्तान के समूह शंघाई सहयोग संगठन द्वारा लिए गए फैसले के बारे में शुक्रवार को ही भारत के विदेश सचिव विनय क्वात्रा ने जानकारी साझा करते हुए बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने आगामी 2022-23 वर्ष के दौरान वाराणसी को एससीओ के पर्यटक और सांस्कृतिक राजधानी के रूप में मान्यता देने के लिए सदस्य देशों को धन्यवाद ज्ञापित किया है। पीएम के अनुसार एससीओ का यह फैसला भारत और संबंधित क्षेत्र के बीच सांस्कृतिक और आपसी संबंधों के द्वार भी खोलता है। बताते चलें कि इस सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उज्बेकिस्तान गए हुए थे, जहां बैठक के दौरान उन्‍होंने रूस के राष्‍ट्राध्‍यक्ष ब्‍लादिमीर पुतिन से भी मुलाकात की थी। 

    वाराणसी पीएम नरेन्‍द्र मोदी का संसदीय क्षेत्र होने के साथ ही विश्व में सांस्‍कृतिक राजधानी का भी रुतबा रखती है। पुराणों से भी पुरानी मानी जाने वाली काशी को शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की पहली सांस्कृतिक एवं पर्यटन राजधानी घोषित करने की पूर्व में ही चीन द्वारा जानकारी दी गई थी। इसके तहत एससीओ में शामिल चीन, रूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, तजाकिस्तान, उज्बेकिस्तान, भारत और पाकिस्तान के नेताओं की साझा सहमति से वाराणसी को वर्ष 2022-23 के लिए संगठन के पहले पर्यटन और सांस्कृतिक राजधानी के रूप में स्‍वीकार्यता दी गई है। 

    वाराणसी को मिलेगा यह तोहफा : अब शंघाई सहयोग संगठन में वाराणसी को बतौर हेरिटेज शहर के रूप में मान्‍यता मिल गई है। वाराणसी को इसके पूर्व यह रुतबा हासिल नहीं था। अब संगठन के देशों में दूतावासों के जरिए वाराणसी को साल भर प्रमोट करने का भी मौका संबंधित देशों के बीच मिलेगा। इस दौरान काशी में पर्यटन ही नहीं बल्कि काशी का पारंपरिक कारोबार भी संबंधित देशों के बीच चर्चा में आएगा। ऐसे में यहां के कारोबारियों को संबंधित देशों में अपने उत्‍पादों को ले जाने का मौका मिलेगा। 

    वाराणसी की बढ़ेगी साख : एससीओ यानी शंघाई सहयोग संगठन विश्‍व के आठ देशों की सदस्यता वाला एक आर्थिक एवं सुरक्षा गठबंधन है, जिसमें चीन, रूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, तजाकिस्तान, उज्बेकिस्तान, भारत और पाकिस्तान शामिल हैं। यह संगठन सुरक्षा ही नहीं बल्कि आपस में आर्थिक तरक्‍की को बल देने के प्रयासों के लिए भी कार्य करता है। ऐसे में वाराणसी की यह सांस्‍कृति पहचान कारोबार के लिहाज से भी काफी महत्‍वपूर्ण माना जा रहा है। 

    सरकार भी देगी विशेष पैकेज : शंघाई सहयोग संगठन में वाराणसी को शामिल करने से वाराणसी को वैश्विक पहचान तो मिलेगी ही साथ ही भारत सरकार भी विशेष पहल काशी की पहचान को और आगे ले जाने के लिए करने जा रहा है। विदेश सचिव के अनुसार वाराणसी को मिली इस वैश्विक पहचान को सेलिब्रेट करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा केंद्र सरकार के सहयोग से तमाम जगहों पर कई सांस्‍कृतिक और आर्थिक कार्यक्रम को बल देने के लिए भी प्रयास किया जाएगा। एससीओ में इस बार भारत की पहल पर स्टार्टअप और नवोन्मेष के साथ  विशेष कार्य समूह स्थापित करने का जो फैसला लिया है उसका वाराणसी को भी फायदा मिलना तय माना जा रहा है।