यूपी में पूर्वांचल का पहला टेक्सटाइल पार्क: वाराणसी में 75 एकड़ जमीन हस्तांतरित, बुनकरों को मिलेगा नया आयाम
पूर्वांचल के पहले संत कबीर टेक्सटाइल एवं अपैरल पार्क के लिए वाराणसी में 75 एकड़ जमीन हस्तांतरित की गई है। ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए तस्वीर को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।
HighLights
पूर्वांचल के पहले टेक्सटाइल पार्क को 75 एकड़ जमीन हस्तांतरित।
संत कबीर टेक्सटाइल पार्क बनारसी वस्त्र उद्योग को आधुनिक बनाएगा।
पार्क में उत्पादन, भंडारण, विपणन और प्रशिक्षण की सुविधाएँ होंगी।
जागरण संवाददाता, वाराणसी। बनारसी साड़ी और वस्त्र उद्योग को आधुनिक सुविधाओं से जोड़ने की दिशा में संत कबीर टेक्सटाइल एवं अपैरल पार्क (एक विशेष औद्योगिक क्षेत्र या क्लस्टर) की स्थापना की राह सुगम हो गई है। शासन के निर्देश पर राजातालाब क्षेत्र के रमना में प्रस्तावित पूर्वांचल के पहले टेक्सटाइल पार्क के लिए जलकल विभाग के नाम दर्ज 75 एकड़ जमीन हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग विभाग को हस्तांतरित कर दी गई है।
इस परियोजना का उद्देश्य बनारसी वस्त्र उद्योग को आधुनिक सुविधाओं से जोड़ने के साथ बुनकरों और उद्यमियों को उत्पादन से लेकर विपणन तक एकीकृत व्यवस्था उपलब्ध कराना है। काशी के वस्त्र उद्योग को इसकी काफी दिनों से आवश्यकता महसूस की जा रही थी।
निवेश और औद्योगिक गतिविधियों की संभावनाओं को बल
प्रस्तावित पार्क में अब तक 431 कारोबारियों ने अपनी वस्त्र उद्योग इकाइयां स्थापित करने की इच्छा जताई है। उद्योग जगत की इस रुचि से पार्क में निवेश और औद्योगिक गतिविधियों की संभावनाओं को बल मिला है। इससे पारंपरिक वस्त्र उद्योग को बदलते बाजार और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अनुरूप तैयार करने में मदद मिलेगी।
जमीन हस्तांतरण के बाद परियोजना में विश्वस्तरीय सुविधाओं के माध्यम से तेजी आने की उम्मीद है। पार्क की योजना तैयार करते समय वाराणसी एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन और राष्ट्रीय राजमार्ग से संपर्क तथा आवागमन की सुविधा का भी ध्यान रखा गया है।
24 घंटे बिजली-पानी, आधुनिक वेयरहाउस, टेस्टिंग लैब सुविधाएं
औद्योगिक इकाइयों के सुचारु संचालन के लिए 24 घंटे बिजली-पानी की आपूर्ति का प्रविधान होगा। पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण को ध्यान में रखते हुए जीरो लिक्विड डिस्चार्ज आधारित अपशिष्ट जल उपचार संयंत्र स्थापित होगा। पार्क में उत्पादन के साथ उत्पादों की गुणवत्ता, भंडारण और विपणन से जुड़ी सुविधाएं होंगी।
तैयार माल को सुरक्षित रखने के लिए आधुनिक वेयरहाउस, गुणवत्ता परीक्षण के लिए टेस्टिंग लैब और प्रशासनिक भवन का प्रविधान है। बुनकरों के पारंपरिक कौशल को आधुनिक जरूरतों के अनुरूप विकसित करने के लिए प्रशिक्षण व कौशल विकास केंद्र बनेगा। उत्पादों को प्रदर्शित करने, नए बाजारों से जोड़ने के उद्देश्य से प्रदर्शनी केंद्र विकसित होगा।
प्लग एंड प्ले शेड से छोटी इकाइयों को सुविधा
पार्क में छोटे हथकरघा बुनकरों, टेक्सटाइल डिजाइनरों और गारमेंट निर्माण इकाइयों के लिए प्लग एंड प्ले औद्योगिक शेड की व्यवस्था होगी। यहां उद्यमियों को पहले से विकसित औद्योगिक स्थान उपलब्ध होगा। वे कम प्रारंभिक व्यवस्थाओं के साथ उत्पादन शुरू कर सकेंगे। इसके अतिरिक्त विभिन्न आकार के औद्योगिक भूखंड भी होंगे। पार्क में ही कर्मचारियों और उद्यमियों के लिए चिकित्सा, कमर्शियल जोन, खुले पार्क, हरियाली, सुरक्षा के लिए पुलिस और अग्निशमन व्यवस्था का भी व्यवस्था किया गया है।
जमीन हथकरघा व वस्त्रोद्योग विभाग के नाम हस्तांतरित हो गई है। यह पार्क वस्त्र व सिल्क उद्योग को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका होगी। औद्योगिक भूखंडों की मांग लगातार बढ़ रही है। इससे क्षेत्र में निवेश, उत्पादन और रोजगार के नए अवसर मिलेंगे।
-सत्येंद्र कुमार, जिलाधिकारी
वस्त्रोद्योग से जुड़े लोगों की लंबे समय से चली आ रही मांग पूरी होने की दिशा में यह महत्वपूर्ण पहल है। इससे काशी की बुनकारी को वैश्विक वस्त्र उद्योग में अपनी पहचान और मजबूत करने का अवसर मिलेगा। काशी के रेशमी वस्त्र उद्योग को भी संबल मिलेगा।
-कुसुम, उपायुक्त उद्योग (प्रवर्तन), हथकरघा व वस्त्रोद्योग विभाग।
यह भी पढ़ें- गोरखपुर गीडा में उद्योग, व्यापार और आवास के लिए शानदार अवसर, भूखंडों का हो रहा आवंटन
यह भी पढ़ें- उत्तर प्रदेश में लगेगा उद्योगों का महामेला, दीपावली के बाद 8 लाख करोड़ रुपये की निवेश परियोजनाओं का होगा भूमि पूजन
