वाराणसी, जेएनएन। बनारस शहर की कई खबरों ने मंगलवार को सुर्खियां बटोरीं। जिनमें संकट मोचन प्रभु का श्रृंगार Live, 7099 लोगों को किया होम क्वारंटाइन, वन्य जीवों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान, राज्यमंत्री ने विधायक निधि से दिए एक करोड़, भूख मिटाने के लिए धर्मप्रांत भी मैदान में आदि खबरें रहीं। जानिए शाम 6 बजे तक की शहर-ए-बनारस की पांच प्रमुख और चर्चित खबर।

वाराणसी में हनुमान जयंती पर संकट मोचन प्रभु का श्रृंगार Live, संगीत समारोह Facebook पर ऑनलाइन

संकटमोचन मंदिर में हनुमान जयंती और इस उपलक्ष्य में 95 वर्षों से प्रति वर्ष आयोजित किए जाने वाले संकट मोचन संगीत समारोह को अलग तरीके से मनाने का निर्णय लिया गया है। इस बार अंतरराष्ट्रीय संगीत समारोह 12 से शुरू होना था। अब मंदिर प्रशासन की ओर से फेसबुक पर संगीत जगत के कलाकार लाइव प्रस्‍तुत देंगे। इसके साथ ही आठ अप्रैल को संकट मोचन प्रभु का श्रृंगार भी लाइव होगा।

Coronavirus in varanasi : 17099 लोगों को किया गया होम क्वारंटाइन, भेजे जा चुके 301 नमूने

जनपद में कोरोना पॉजिटिव केस बढऩे के साथ ही जिला प्रशासन ने तैयारियां भी बढ़ा दी हैं। बीएचयू अस्पताल को जहां लेवल-थ्री के हास्पिटल में परिवर्तित करने का निर्णय लिया गया, तो वहीं अस्पतालों में वेंटिलेटर, बेड सहित जरूरी उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के भी आदेश दिए गए। सोमवार को सीएमओ डा. वीबी सिंह ने गंगापुर का दौरा कर मृत संक्रमित मरीज के परिवारीजनों के स्वास्थ्य की जानकारी ली। उधर बजरडीहा, मदनपुरा, लोहता सहित गंगापुर क्षेत्र को स्वास्थ्य टीम ने सैनिटाइज किया।

Lockdown in Varanasi सारनाथ में मिनी जू के वन्य जीवों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान

अमेरिका में एक बाघिन को कोरोना वायरस होने के भय से वन विभाग के अधिकारियों ने सारनाथ स्थित मिनी जू के वन्य जीवों के लिए विशेष सुरक्षा व्यवस्था का इंतजाम किया है। जब तक कोरोना वायरस का असर रहेगा तब तक मांसाहारी जीवों का विशेष ध्यान दिया जाएगा।

राज्यमंत्री ने विधायक निधि से एक करोड़ और मार्च का वेतन UP Covid Care Fund को दिया

उप्र पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) ने अपनी विधायक निधि से 01 करोड़ रुपये की धनराशि ‘उप्र कोविड केयर फण्ड’ में दान की है। इसके साथ ही मार्च, 2020 का अपना वेतन ‘मुख्यमंत्री पीड़ित सहायता कोष’ में दान किया है।

Lockdown in varanasi : शहर में असहायों की भूख मिटाने के लिए धर्मप्रांत भी मैदान में

ना मस्जिद को जानते हैं, न शिवाले को जानते हैं। जिनके पेट खाली हैं वो सिर्फ निवाले को जानते हैं।। ये पंक्तियां इन दिनों उन गरीबों, असहायों व बीच रास्ते में कहीं न कहीं ठिकाना बनाए लोगों पर खरी उतरती हैं जो कोरोना महामारी से निबटने के लिए लागू लॉकडाउन में दो वक्त की रोटी के लिए भी मोहताज हैं।

Posted By: Saurabh Chakravarty

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