Tokyo Olympics : स्वतंत्रता दिवस से पहले वाराणसी आ सकते हैं भारतीय हाकी टीम के खिलाड़ी ललित उपाध्याय
ओलिंपिक के चलते ललित विगत छह माह से अपने परिवारीजनों से दूर हैं। टोक्यो रवाना होने से पहले भी उन्होंने बनारस आकर बाबा दरबार के दर्शन की इच्छा जताई थी लेकिन कोविड-19 नियमों के चलते वे ऐसा नहीं कर पाए थे।

जागरण संवाददाता, वाराणसी। टोक्यो ओलिंपिक में कांस्य पदक विजेता भारतीय हाकी टीम नौ अगस्त को टोक्यो से नई दिल्ली पहुंचेगी। 15 अगस्त को प्रधानमंत्री मोदी टीम सदस्यों से मुलाकात करेंगे। वहीं इसके अगले दिन टीम उड़ीसा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक से मुलाकात के लिए भुवनेश्वर रवाना हो जाएगी। इस दौरान 10 से 15 अगस्त के बीच ललित उपाध्याय दिल्ली से अपने गृहजनपद वाराणसी आकर बाबा विश्वनाथ का दर्शन कर सकते हैं।
दरअसल, ओलिंपिक के चलते ललित विगत छह माह से अपने परिवारीजनों से दूर हैं। टोक्यो रवाना होने से पहले भी उन्होंने बनारस आकर बाबा दरबार के दर्शन की इच्छा जताई थी, लेकिन कोविड-19 नियमों के चलते वे ऐसा नहीं कर पाए थे। पिता सतीश उपाध्याय के मुताबिक ललित अपने शहरवासियों से मिलने को लेकर बेहद उत्साहित हैं। स्वतंत्रता दिवस से ठीक पहले यदि संभव हुआ तो वे बनारस में होंगे।
इसी वर्ष परिणय सूत्र में बंधेंगे ललित
पिता सतीश उपाध्याय ने बातचीत में बताया कि फिलहाल ललित के लिए कोई रिश्ता तय नहीं हुआ है। मगर इस वर्ष के अंत तक उसकी शादी कर देने का विचार है। ऐसे में परिवार के सभी सदस्य अच्छे रिश्ते की तलाश कर रहे हैं।
हाकी खेलकर नौकरी पर लग जाए बेटा
ललित के बड़े भाई अमित उपाध्याय भी अच्छे हाकी खिलाड़ी हैं। राष्ट्रीय स्तर पर खेल चुके अमित वर्तमान में अकाउंटेंट जनरल कार्यालय-प्रयागराज में सेवारत हैं। पिता सतीश उपाध्याय की यूपी कालेज के पास छोटी सी दुकान है। बताया, अमित के बाद उन्होंने ललित को हाकी खेलने यूपी कालेज ग्राउंड पर इसलिए भेजा कि शायद उसकी भी नौकरी लग जाए। मगर उन्हें क्या मालूम की उनका सुपुत्र एक दिन ऐसा कारनामा कर गुजरेगा, जो इतिहास बन जाएगा।
रुपये का क्या करना, ललित ही जाने
प्रदेश सरकार की ओर से ललित को एक करोड़ रुपये की धनराशि दिए जाने की घोषणा की गई है। इस पर सतीश उपाध्याय का कहना था कि जब धनराशि मिलेगी तब देखा जाएगा। पैसों का क्या करना है, क्या नहीं, ललित ही जानें।
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