Updated: Tue, 12 Mar 2024 01:44 PM (IST)
1989 से लेकर 2019 तक पांच बार भाजपा व एक बार सहयोगी अपना दल के प्रत्याशी ने लोकसभा में रॉबर्ट्सगंज का प्रतिनिधित्व किया। इस दौरान किसी भी बड़ी पार्टी ने महिला को टिकट नहीं दिया। 2019 में शिवपाल सिंह यादव की प्रगतिशील समाज पार्टी से जरूरी रूबी प्रसाद को लोकसभा चुनाव में उतारा था लेकिन हार का मुंह देखना पड़ा।
डा. अरविंद तिवारी, सोनभद्र। लोकसभा चुनाव का बिगुल बजने वाला है। कभी भी चुनाव के लिए अधिसूचना जारी हो सकती है। अब तक किसी भी पार्टी ने अपना प्रत्याशी घोषित नहीं किया है। बड़ी पार्टियों से चुनाव लड़ने के लिए संभावित दो-तीन नाम जिला कार्यालयों से भेजे गए हैं। हालांकि इसमें कोई नाम महिला का नहीं गया है।
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यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि 1952 से अब तक बड़ी पार्टियों से राबर्ट्सगंज लोकसभा क्षेत्र से कोई महिला उम्मीदवार चुनाव नहीं लड़ी है। लोकसभा क्षेत्र रॉबर्ट्सगंज से 1952 से सात बार कांग्रेस के सांसद चुने गए। उसके बाद भाजपा अपने सहयोगी अपना दल के उम्मीदवारों के साथ छह सांसद लोकसभा में पहुंचा चुकी है।
पिछले लोकसभा के चुनावी पन्ने पलटे जाएं तो वर्ष 1952 से लेकर वर्ष 1984 तक इस सीट से कांग्रेस के प्रत्याशी जीतकर लोकसभा में पहुंचते रहे हैं। बीच में 1977 में बीएलडी के सम्पत ने कांग्रेस के तीन बार के सांसद राम स्वरूप को हरा दिया।
1989 में भाजपा के सूबेदार ने कांग्रेस के दो बार के सांसद राम प्यारे पनिका से सीट छीन ली। भाजपा के रामसकल 1996, 1998 और 1999 में लगातार तीन बार सांसद रहे। 2004 में बसपा के लालचंद ने भाजपा से सीट छीन ली। 2007 में उपचुनाव में भी बसपा के भाई लाल को सफलता मिली।
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इस प्रकार 1989 से लेकर 2019 तक पांच बार भाजपा व एक बार सहयोगी अपना दल के प्रत्याशी ने लोकसभा में रॉबर्ट्सगंज का प्रतिनिधित्व किया। इस दौरान किसी भी बड़ी पार्टी ने महिला को टिकट नहीं दिया। 2019 में शिवपाल सिंह यादव की प्रगतिशील समाज पार्टी से जरूरी रूबी प्रसाद को लोकसभा चुनाव में उतारा था लेकिन हार का मुंह देखना पड़ा।
इससे पहले रूबी प्रसाद कांग्रेस के समर्थन से वर्ष 2012 में दुद्धी से विधायक थीं। इसके बाद उन्होंने सपा की सदस्यता ले ली। अब भाजपा में शामिल होकर रॉबर्ट्सगंज नगर पालिका की अध्यक्ष हैं।
जानकारों की मानें तो इस बार भी बड़ी पार्टियों से किसी महिला प्रत्याशी का नाम जिले स्तर से नहीं भेजा गया है। इस लोकसभा चुनाव में कोई पार्टी महिला को मैदान में उतार दे तो यह अप्रत्याशित ही होगी।
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