वाराणसी, जागरण संवाददाता। भगवान शिव की नगरी काशी में विजय दशमी काफी धूमधाम से मनायी जा रही है। विजय दशमी को लेकर पूर्व की परंपराओं के अनुरूप ही शस्‍त्र पूजन भी किया जा रहा है। घर और प्रतिष्‍ठान से लेकर सामूहिक आयोजनों में लोग अपना शस्‍त्र लेकर उसपर चंदन और कलावा बांधने के साथ ही पुष्‍प और अक्षत के साथ पूजन कर रहे हैं। सुबह से ही पूजन और अनुष्‍ठा का दौर शुरू हुआ तो रात तक आयोजन की कड़‍ियां अनवरत बरकरार रहीं। 

भगवान श्रीराम ने रावण पर विजय प्राप्ति के लिए मां दुर्गा की आराधना की थी और साथ ही शस्त्र का पूजन भी किया था। तभी से सनातन धर्म के लोग क्रोध पर क्षमा, अज्ञानता पर ज्ञान, बुराई पर अच्छाई की विजय और असत्य पर सत्य का विजय पर्व दशहरा का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाते चले आ रहे हैं। उसी परिप्रेक्ष्य में शुक्रवार को विजयादशमी के दिन सन 1954 से चली आ रही परंपरा का निर्वहन स्वर्णकार क्षत्रिय कमेटी परिवार ने किया।

शुक्रवार को दारानगर - महामृत्युंजय रोड स्थित "स्वर्णकार समाज धर्मशाला" में स्वर्णकार क्षत्रिय कमेटी परिवार ने हर्षोल्लास के साथ मां महिषासुर मर्दिनी की विशाल तैल चित्र के समक्ष शस्त्र पूजन किया। प्रारंभ में कमेटी के अध्यक्ष व पूर्व पार्षद किशोर कुमार सेठ ने विधिवत पूजन अर्चन किया। पंडित मिथिलेश शुक्ला बिहारी के आचार्यत्व में मां दुर्गा जी की विशाल तस्वीर के समक्ष, दुर्गा सप्तशती का संपूर्ण पाठ किया गया।

अभ्यागतों का स्वागत महामंत्री श्याम कुमार सर्राफ तथा धन्यवाद प्रकाश कोषाध्यक्ष जनार्दन प्रसाद वर्मा ने किया।

उक्त अवसर पर कमेटी परिवार की ओर से मुख्य रूप से मोतीलाल सेठ, प्रेमचंद्रा जी, सरोज सेठ, विनोद कुमार सेठ, श्याम सुंदर सिंह, रवि सर्राफ, कृष्ण कुमार सेठ, मुरली मनोहर सिंह, डॉ. कैलाश सिंह विकास, रविशंकर सिंह, अशोक वर्मा, नरसिंह दास, कमल कुमार सिंह, सत्यनारायण सेठ, विष्णु दयाल, अनुज गौतम, राजू वर्मा, किशुन लाल सेठ थे।

Edited By: Abhishek Sharma