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    Solar eclipse in Varanasi : सूर्य ग्रहण का स्पर्श शाम 4.42 बजे हुआ, 5.37 बजे सूर्यास्त होने पर मोक्ष

    By pramod kumarEdited By: Saurabh Chakravarty
    Updated: Tue, 25 Oct 2022 05:19 PM (IST)

    Solar eclipse in Varanasi खंड सूर्य ग्रहण का स्पर्श शाम 4.42 बजे हुआ। मध्य 5.14 बजे तो मोक्ष- शाम 6.32 लेकिन 5.37 बजे ही सूर्यास्त होने से मोक्ष मान लिया गया। हालांकि ग्रहण काल में ही 5.37 बजे सूर्यास्त हो गया। इसे ‘ग्रस्ताग्रस्त’ ग्रहण कहते हैं।

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    वाराणसी में सूर्य ग्रहण का नजारा कुछ इस तरह दिखा।

     जागरण संवाददाता, वाराणसीः तिथियों के फेर से इस बार कार्तिक अमावस्या दो दिन पड़ रही है। अमावस्या में पहले दिन 24 अक्टूबर को सनातन धर्मावलंबियों ने दीप ज्योति का मुख्य पर्व दीपावली मनाई तो दूसरे दिन 25 अक्टूबर को सूर्य ग्रहण लगा। मोक्ष- शाम 6.32, लेकिन 5.37 बजे ही सूर्यास्त होने से मोक्ष मान लिया गया।

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    तुला राशि, स्वाति नक्षत्र पर लगने वाले खंड सूर्य ग्रहण का स्पर्श शाम 4.42 बजे हुआ है। मध्य 5.14 बजे तो मोक्ष 6.32 बजे हुआ। हालांकि ग्रहण काल में ही 5.37 बजे सूर्यास्त हो गया। इसे ‘ग्रस्ताग्रस्त’ ग्रहण कहा गया। धर्मशास्त्रीय विधान अनुसार इस स्थिति में ग्रहण से निवृत्ति अगले दिन 26 अक्टूबर को सूर्योदय काल में सुबह 6.02 बजे मानी जाएगी। धर्मशास्त्रीय विधान अनुसार सूर्य ग्रहण से 12 घंटे पहले यानी भोर में 4.42 बजे सूतक लगा। इसमें देव स्पर्श, पूजन, भोग-आरती वर्जित है। इस अवधि में जप-तप आदि का फल कोटि गुना अधिक माना जाता है।

    वास्तव में इस साल वैश्विक पटल पर चार ग्रहणों में से आखिरी के दो ग्रहण भारत में दृश्य हो रहे हैं। इसमें पहला 25 अक्टूबर को खंड सूर्य ग्रहण भारत में ग्रस्तास्त सूर्य ग्रहण के रूप में दृश्य हो रहा तो दूसरा कार्तिक पूर्णिमा आठ नवंबर को खग्रास चंद्रग्रहण भारत में ग्रस्तोदित चंद्रग्रगण के रूप में देखा जाएगा।

    भारत में सिर्फ पूर्व व पूर्वोत्तर अंडमान निकोबार दीप समूह, आइजाल, इम्फाल, कोहिमा, इटानगर, डिब्रूगढ़, शिवसागर, सिलचर में नहीं दिखेगा। भारत के अतिरिक्त इसे यूरोप, मध्य पूर्व उत्तरी अफ्रीका, पश्चिम एशिया, उत्तर हिंंद महासागर, उत्तरी अटलांटिक महासागर में देखा जाएगा। यूनिवर्सल समयानुसार ग्रहण आरंभ दिन में 2.29 बजे, मध्य 4.30 बजे, मोक्ष शाम 6.52 बजे होगा।

    ख्यात ज्योतिषाचार्य पं. ऋषि द्विवेदी के अनुसार ग्रहण का प्रभाव धरती सहित व्यापक संपूर्ण आकाश मंडल में पड़ता है। एक पखवारे के अंदर दो ग्रहण का पड़ना शुभ नहीं माना जाता। महाभारत काल में भी एक पखवारे में दो ग्रहण पड़े थे। एक पखवारे में दो ग्रहण का पड़ना व कार्तिक अमावस्या संग मंगलवार का दुर्योग धरतीवासियों के लिए शुभ नहीं रहने वाला। इसका प्रभाव महायुद्ध, महामारी, प्राकृतिक आपदा, दैवीय आपदा के रूप में देखने को मिलता है।

    दोपहर 3.30 बजे से 15 घंटे बंद रहेगा बाबा दरबार, सुबह छह बजे मंगला आरती

    सूर्य ग्रहण के कारण 25 अक्टूबर को काशी विश्वनाथ मंदिर के पट दोपहर 3.30 से 26 अक्टूबर को सुबह 6.02 बजे सूर्योदय तक बंद रहेंगे। दर्शन-पूजन के साथ ही सप्तर्षि आरती, शृंगार भोग आरती, शयन आरती नहीं होगी।

    वहीं 26 अक्टूबर को सुबह सूर्योदय के पश्चात मोक्ष पूजा व मंगला आरती के साथ मंदिर के कपाट दर्शनार्थियों के लिए खोले जाएंगे। अन्नपूर्णा मंदिर में कपाट दोपहर दो बजे से शाम सात बजे तक बंद रहेंगे। संकट मोचन मंदिर में मंगला आरती के बाद कपाट बंद हो जाएंगे और मंदिर शाम सात बजे खुलेगा।