ध्रुपद कलाकारों के सुरों में थिरके राग
तुलसीघाट पर 48 वें अंतरराष्ट्रीय ध्रुपद मेला की तीसरी निशा में कलाकारों ने विविध रागों को गायन व वादन के माध्यम से सजीव कर दिया। महाराजा बनारस विद्यान्यास व ध्रुपद समिति के तत्वावधान में तुलसीघाट पर आयोजित ध्रुपद मेला में रातभर सुधी श्रोताओं ने राग-सरिता में डुबकी लगाई।

जागरण संवाददाता, वाराणसी: तुलसीघाट पर 48 वें अंतरराष्ट्रीय ध्रुपद मेला की तीसरी निशा में कलाकारों ने विविध रागों को गायन व वादन के माध्यम से सजीव कर दिया। महाराजा बनारस विद्यान्यास व ध्रुपद समिति के तत्वावधान में तुलसीघाट पर आयोजित ध्रुपद मेला में रातभर सुधी श्रोताओं ने राग-सरिता में डुबकी लगाई।
कार्यक्रम का आरंभ ध्रुपद गायन डा. मधुछन्दा ने ध्रुपद गायन से किया। उन्होंने राग श्री में धमार सुनाया। गायन के बोल थे 'आज रंग भीजन लागे'। इसके उपरान्त उन्होंने राग छायानट में सूलताल में निबद्ध ध्रुपद रचना सुनाई। उनके साथ पखावज संगति आदित्य दीप, तानपूरा पर मृणालिनी दास, सात्विक भट्टाचार्य थे।
दूसरी प्रस्तुति में डा. शनीश ज्ञावाली ने बांसुरी पर तान छेड़ी। उन्होंने राग जोग में आलाप जोड़ झाला सुनाया। प्रथम रचना तिवरा ताल व दूसरी रचना सूल ताल में थी। उनके साथ पखवाज पर आदित्य दीप ने संगत की। बांसुरी पर उनके शिष्य
हर्षित मिश्रा, शिवम शर्मा थे। अगली प्रस्तुति पंडित प्रेम कुमार मलिक के गायन की रही। पखावज पर डा. अनिल चौधरी व तानपूरा पर अवनीशव, विधा पाण्डेय ने संगत की। उन्होंने राग शंकरा एवं शिवरंजनी में रचनाएं सुनाईं। चौथी प्रस्तुति मधु भट्ट तैलंग के गायन की रही। उन्होंने राग मधुर गन्धी में गायन प्रस्तुत किया। पखावज पर अंकित पारिख व तानपुरे पर विभा एवं अंजु ने संगत की। संचालन सौरभ चक्रवर्ती ने किया।
वहीं जागरण संवाददाता, वाराणसी: सेठ किशोरीलाल जालान सेवा ट्रस्ट की ओर से आयोजित शिवरात्रि संगीत महोत्सव की दूसरी निशा नारी शक्ति को समर्पित रही। सुर, लय एवं ताल की त्रिगुणबंदी से दुर्गाकुंड स्थित श्री हनुमान प्रसाद पोद्दार अंध विद्यालय झंकृत हो उठा। सोमवार को ख्यातिलब्ध सितार वादक विदुषी डा. सुप्रिया शाह ने पहली प्रस्तुति दी। उन्होंने सबसे पहले राग मारू विहग में अलाप, जोड़ के पश्चात विलंबित द्रुत तीन ताल में बंदिश पेश कर सबके रोम रोम को झंकृत कर दिया। भजन 'जय शिवशंकर, जय गंगाधर' की धुन सुनाकर अपनी प्रस्तुति को विराम दिया। उनके साथ तबले पर पंडित ललित कुमार, तानपुरे पर अरुणिमा मिश्रा, बांसुरी पर हरिप्रसाद पौडियाल तथा मजीरे पर राजश्री नाथ ने संगत की।
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