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पहली महिला लोको पायलट, जिसने चलाई दिल्ली-वाराणसी वंदे भारत; कौन हैं यूपी की श्रीनी श्रीवास्तव?

Published: Wed, 04 Nov 2026 11:59 AM (IST)

सहायक लोको पायलट श्रीनी श्रीवास्तव ने वंदे भारत एक्सप्रेस चलाकर और प्रधानमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होकर देश में अपनी पहचान बनाई है।

पूर्वोत्तर की पहली महिला लोको पायलट श्रीनी श्रीवास्तव।

पूर्वोत्तर की पहली महिला लोको पायलट श्रीनी श्रीवास्तव।

HighLights

  1. श्रीनी श्रीवास्तव ने वंदे भारत एक्सप्रेस सफलतापूर्वक चलाई।

  2. प्रधानमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह में विशिष्ट अतिथि रहीं।

  3. अब बुलेट ट्रेन चलाने की है उनकी प्रबल इच्छा।

जागरण संवाददाता, वाराणसी। लोक निर्माण विभाग में अमीन रहे (अब सेवानिवृत्त) पंकज श्रीवास्तव के सिगरा अंतर्गत छित्तूपुर स्थित आवास पर दीपावली पर्व से पूर्व कई दिनों से खुशियाें ने डेरा डाला है।

उनके घर में ये खुशियां उनकी बेटी व रेलवे में सहायक लोको पायलट ‘श्रीनी श्रीवास्तव’ की बदौलत मिली हैं। साधारण परिवार में जन्मी श्रीनी पहले रेलवे में नौकरी पाईं, फिर ट्रेनिंग प्राप्त कर पहले चेयरकार वंदे भारत फिर स्लीपर वंदे भारत (31 अक्टूबर को रेलमंत्री और मुख्यमंत्री द्वारा उद्घाटित) की ड्राइविंग सीट संभाली और काबिलियत के बल पर पूरे दिश में नई पहचान बनाईं।

वह कहती हैं कि वंदे भारत चलाई तो प्रधानमंत्रीजी ने अपने तीसरे शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने का अवसर दिया था, जिससे मुझे पूरे देश में नई पहचान मिली। अब इच्छा बुलेट ट्रेन की ड्राइविंग सीट संभालने की है, अवसर मिला तो इसे सौभाग्य समझूंगी...।

गाजीपुर जनपद के सरैया छावनी निवासी श्रीनी के नौकरी पाने की राह में आई दुश्वारियां भी कम न रहीं। इसलिए कि पुरुष प्रधान समझी जाने वाली सहायक लोको पायलट की नौकरी का फॉर्म भरना भी आसान नहीं था। चूंकि उन्होंने सुल्तानपुर स्थित राजकीय महिला पॉलिटेक्निक से डिप्लोमा किया था, इसलिए सहायक लोको पायलट की नौकरी हासिल करना उनके लिए मुफीद था।

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सबसे पहले लोको पायलट की मिली नौकरी

पिता पंकज, मां माया, बड़ी बहन सारिका (अध्यापिका), शालिनी, बड़े भाई अभिषेक (निजी कंपनी में वरिष्ठ प्रबंधक) का संबल मिला तो नौकरी के लिए फॉर्म भरने का रास्ता साफ हुआ और 10 अप्रैल 2017 को पूर्वोत्तर रेल के गोरखपुर में सहायक लोको पायलट के पद पर नौकरी मिल गई।

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गोरखपुर से ट्रांसफर लेकर वाराणसी आईं

काबिलियत और कर्तव्यनिष्ठ होने के कारण श्रीनी को अफसरों ने पहचाना और मूलत: गाजीपुर निवासी होने के कारण ट्रांसफर लेकर वाराणसी आ गईं। यहां वंदे भारत एक्सप्रेस चलाने की विशेष ट्रेनिंग का मौका मिला तो आगे बढ़कर जिम्मेदारी उठाई।

गोरखपुर स्थित बहुविषयक पद्धति प्रशिक्षण केंद्र में ट्रेनिंग प्राप्त की। इसी प्रशिक्षण के कारण उन्हें 2023 में उद्घाटित 22415 चेयरकार वंदे भारत एक्सप्रेस की ड्राइविंग सीट संभालने की जिम्मेदारी मिली तो फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा।

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वंदे भारत एक्सप्रेस में ड्राइविंग सीट संभाली

उनकी इसी उपलब्धि के कारण नौ जून 2024 को प्रधानमंत्री के तीसरे शपथ ग्रहण समारोह में विशिष्ठ अतिथि के रूप में शामिल होने के लिए नई दिल्ली जाने का अवसर मिला, जहां से खूब प्रसिद्धि लेकर लौटीं।

श्रीनी कहतीं है कि स्लीपर वंदे भारत के उद्घाटन के दिन ही रेलमंत्री ने बुलेट ट्रेन चलाने की मंजूरी मिलने की जानकारी दी थी, उसी समय से मेरे मन में एक आकांक्षा बलवती हो रही कि कब बुलेट ट्रेन की ड्राइविंग सीट संभालने की जिम्मेदारी मिले और उसे बखूबी संभाल पाऊं।

'सहायक लोको पायलट बनना गर्व की बात, बेटियां आगे आएं'

बकौल श्रीनी, काम करने का जज्बा हो तो बेटियों के लिए रेलवे में नौकरी करने का माहौल अनुकूल है। सहायक लोको पायलट की नौकरी तो मेरी नजर में गर्व है। इसलिए कि हमारे ऊपर यात्रियों को सुरक्षित उनके गंतव्य तक पहुंचाने की जिम्मेदारी होती है।

ड्राइविंग सीट पर बैठने के बाद एकाग्रता की जरूरत होती है। मसलन, हार्न, मीटर, सिग्नल, रफ्तार पर निगरानी रखनी पड़ती है। 26 सेकेंड में वंदे भारत 100 किमी. प्रति घंटा की रफ्तार पकड़ती है, लिहाजा सतर्क रहना पड़ता है।

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'अधिकारी प्रोत्साहित करते हैं, माहौल अनुकूल'

श्रीनी ने बताया कि रेलवे में नौकरी ज्वॉइन किए पूरे 9 साल पूरे हो गए। अभी तक किसी अन्य संस्थान में नौकरी करने की जरूरत महसूस नहीं हुई, इसलिए कि व्यवस्थाएं लगातार बेटियों की सुरक्षा, जरूरत के लिहाज से बदल रहीं हैं।

रेल मंडल प्रशासन के मुखिया (डीआरएम) समेत सभी अधिकारी उत्साह वर्धन करते हैं। कई बार तो रात में ड्यूटी ऑफ करना होता है, ऐसे समय में हमें प्रॉपर पूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।

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