पैसेंजर से लेकर वंदे भारत तक का सफर: हजारीबाग में अब 133 KM दोहरी लाइन से और आसान होगा सफर
हजारीबाग में 2015 में पहली ट्रेन आने के बाद से रेलवे का काफी विकास हुआ है, जिसमें दोहरीकरण और वंदे ...और पढ़ें

वंदे भारत ट्रेन। (फाइल फोटो)
HighLights
1999 में रखी आधारशिला, 2015 में पहली ट्रेन चली।
एक पटरी से अब दोहरीकरण परियोजना को मंजूरी मिली।
वंदे भारत सहित कई ट्रेनों से बढ़ी कनेक्टिविटी, हवाई अड्डा अधूरा।
विनय कुशवाहा, हजारीबाग। कभी हजारीबाग के लोगों को रेल यात्रा के लिए दूसरे शहरों का रुख करना पड़ता था। हवाई जहाज से सफर करना भी जिलेवासियों के लिए सपना था।
बस ही आवागमन का प्रमुख साधन हुआ करती थी। समय के साथ परिवहन की तस्वीर बदली। हजारीबाग में रेलवे स्टेशन बना, यात्री ट्रेनों का परिचालन शुरू हुआ और कोयला कारोबार ने रेलवे को जिले की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बना दिया।
आज यात्री ट्रेनों के साथ प्रतिदिन कोयला लदी मालगाड़ियों की आवाजाही हो रही है। रेलवे के विस्तार के लिए दोहरी रेल लाइन की परियोजना भी आगे बढ़ रही है। दूसरी ओर बस सेवा उपलब्ध होने के बावजूद हवाई अड्डे का सपना वर्षों बाद भी पूरा नहीं हो सका है।
1999 में रखी गई आधारशिला, 2015 में हजारीबाग पहुंची ट्रेनकोडरमा-हजारीबाग-बरकाकाना-रांची रेल परियोजना की आधारशिला 6 मार्च 1999 को तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने रखी थी।
लंबे इंतजार के बाद 20 फरवरी 2015 को हजारीबाग टाउन रेलवे स्टेशन का उद्घाटन हुआ। इसी दिन हजारीबाग से कोडरमा के लिए पहली यात्री ट्रेन रवाना हुई।
सात दिसंबर 2016 को हजारीबाग-बरकाकाना रेलखंड पर भी यात्री परिचालन शुरू हुआ। इससे जिले के लोगों को अपने शहर से रेल यात्रा की सुविधा मिली।
एक पटरी से अब दोहरीकरण की तैयारी
शुरुआत में इस रेलखंड पर एक ही पटरी थी। इसी पर यात्री ट्रेनों और मालगाड़ियों का परिचालन होता था। बढ़ते रेल यातायात और कोयला ढुलाई को देखते हुए अब दूसरी पटरी बिछाने की दिशा में काम आगे बढ़ रहा है।

कोडरमा से हजारीबाग होते हुए बरकाकाना और अरगड्डा तक करीब 133 किलोमीटर रेलखंड के दोहरीकरण की परियोजना को मंजूरी मिली है।
इससे ट्रेनों की आवाजाही की क्षमता बढ़ेगी। क्रॉसिंग के लिए इंतजार कम होगा और यात्री ट्रेनों के साथ मालगाड़ियों का परिचालन भी सुगम होगा।
पैसेंजर से वंदे भारत तक, मिली रेल कनेक्टिविटी
आज हजारीबाग टाउन स्टेशन से पैसेंजर, एक्सप्रेस और वंदे भारत जैसी ट्रेनों की सुविधा मिल रही है। कोडरमा-बरकाकाना पैसेंजर ट्रेन से आसपास के छोटे स्टेशनों तक पहुंचना आसान हुआ है।
वहीं पटना-रांची वंदे भारत एक्सप्रेस से बिहार और झारखंड की राजधानी के बीच तेज यात्रा का विकल्प मिला है। इसके अलावा आसनसोल-हटिया एक्सप्रेस और गया-मुंबई लोकमान्य तिलक सुपरफास्ट एक्सप्रेस जैसी ट्रेनें भी इस रेलखंड से गुजरती हैं। इससे विद्यार्थियों, नौकरीपेशा लोगों और व्यापारियों को लाभ मिल रहा है।
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